वियतनाम के केंद्रीय बैंक—स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (SBV)—के डिप्टी गवर्नर फाम थान हा ने 7 अक्टूबर को हनोई में कहा कि सितंबर में महंगाई बढ़ने से साल के बाकी महीनों में मौद्रिक नीति चलाना अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। इसके बावजूद, उनके मुताबिक कीमतें अभी नियंत्रण में हैं। उन्होंने यह भी माना कि साल के अंत तक महंगाई पर काबू रखने का दबाव बहुत अधिक है, जबकि कारोबारों के लिए कर्ज़ की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है।
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महंगाई के आंकड़े लक्ष्य के करीब, लेकिन दबाव बढ़ा
सितंबर में वियतनाम की सालाना महंगाई दर 5.08% रही, जो अगस्त के 4.89% से अधिक है। महीने-दर-महीने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 0.62% की बढ़ोतरी हुई। ईंधन और गैस की कीमतों के साथ आवास, शिक्षा और दूसरी लागतों में वृद्धि ने भी कीमतों को ऊपर धकेला।
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जनवरी से सितंबर तक CPI औसतन 4.52% बढ़ा—सरकार के करीब 4.5% के वार्षिक लक्ष्य से थोड़ा ऊपर। इसी अवधि में कोर महंगाई 4.26% रही।
3 हा ने सितंबर की सालाना दर को कई वर्षों में ऊंचे स्तरों में से एक बताया और कहा कि इससे शेष वर्ष में कीमतों के प्रबंधन का दबाव बढ़ा है।
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ब्याज दरों पर एक साथ कई दबाव
ईरान युद्ध से जुड़ी वैश्विक तेल लागत महंगाई को बढ़ा सकती है और बैंकों की धन जुटाने की लागत पर भी असर डाल रही है। दूसरी ओर, सरकार का कम-से-कम 10% आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य कर्ज़ की मांग को तेज कर रहा है। इन परिस्थितियों में जमा पर मिलने वाली और कर्ज़ पर लगने वाली ब्याज दरों को स्थिर रखना कठिन हो सकता है।
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वैश्विक ब्याज दरों का माहौल भी अहम है: अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने सितंबर में अपनी दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75–4% की सीमा में की थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि इस कदम का वियतनाम की दरों पर कितना सीधा असर पड़ा।
कर्ज़ जारी रखने के साथ जोखिम पर नजर
हा की बताई दिशा यह है कि केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति और कर्ज़ प्रबंधन को आर्थिक हालात के अनुसार लचीला रखे। बैंकों से बड़े और प्राथमिकता वाले विकास कार्यों को कर्ज़ देने को कहा गया है, जबकि जोखिम वाले ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने की बात भी सामने आई है।
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सितंबर 30 तक वियतनाम के बैंकिंग तंत्र में बकाया कर्ज़ 2025 के अंत से 11.59% बढ़ चुका था।
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9 ऐसे में नीति का संतुलन दो तरफ है: महंगाई और ऊर्जा कीमतों के जोखिम को संभालना, और साथ ही कारोबारों तक कर्ज़ का प्रवाह बनाए रखना।
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हा के बयान में साल के अंत के लिए किसी निश्चित ब्याज दर बदलाव, कर्ज़ की सीमा या महंगाई लक्ष्य पूरा होने की गारंटी नहीं दी गई। उनका संदेश महंगाई का जोखिम खत्म होने का नहीं, बल्कि उसे नियंत्रित करने और आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के बीच संतुलन बनाने का था।
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