अमेरिका ने 4 अक्टूबर को दक्षिणी इंग्लैंड के RAF Fairford से अपने सभी 12 B-1 बमवर्षक हटा लिए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कमांडरों को विमानों और अमेरिकी कर्मियों पर संभावित हमले की नई खुफिया चेतावनी मिली थी। समाचार रिपोर्टों में कथित योजना को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जोड़ा गया, लेकिन सार्वजनिक जानकारी से यह साबित नहीं होता कि ईरान ने हमले का आदेश दिया था या गिरफ्तार लोग उसकी तैयारी कर रहे थे।
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बमवर्षकों को तुरंत क्यों हटाया गया?
अमेरिकी अधिकारियों ने इस कदम की वजह ड्रोन हमले की आशंका बताई। वापसी की जल्दबाज़ी इतनी थी कि खबरों के मुताबिक कुछ विमान और उनके चालक दल हवाई ईंधन भरने की व्यवस्था पूरी होने से पहले ही रवाना हो गए। पेंटागन ने पुष्टि की कि बमवर्षक अमेरिका में अपने ठिकानों पर लौट गए हैं, लेकिन खतरे से जुड़ी विशिष्ट खुफिया जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
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यह कदम Fairford के पास चल रही सुरक्षा जांच के बाद आया। 27 सितंबर को एयरबेस के आसपास संदिग्ध वैन की खबरों के बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। ब्रिटिश पुलिस ने बाद में बताया कि वैन में कुछ मात्रा में पेट्रोल मिला, लेकिन कोई देसी विस्फोटक उपकरण बरामद नहीं हुआ। केवल पेट्रोल मिलने से यह साबित नहीं होता कि वैन में ड्रोन या विस्फोटक थे, या संदिग्ध किसी विदेशी सरकार के लिए काम कर रहे थे।
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क्या पता है और क्या अब भी स्पष्ट नहीं?
अमेरिकी सूत्रों ने एक संभावित IRGC-निर्देशित योजना का ज़िक्र किया, जिसका निशाना विमान और वहां तैनात लोग हो सकते थे। कुछ रिपोर्टों ने कथित तरीके की तुलना यूक्रेन के 2025 के “ऑपरेशन स्पाइडरवेब” से की थी। उस अभियान में ट्रकों से छोड़े गए ड्रोन ने रूसी एयरबेस पर हमला किया था। हालांकि, यह तुलना रिपोर्टों में किया गया दावा है—Fairford में प्रस्तावित कार्रवाई का पुष्ट विवरण नहीं। सार्वजनिक जानकारी यह साबित नहीं करती कि संदिग्धों के पास ड्रोन थे या हमला करने की कोई व्यावहारिक योजना थी।
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6 अक्टूबर तक जांच में सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। पहले गिरफ्तार किए गए पांच लोगों को जांच जारी रहने के दौरान जमानत पर रिहा कर दिया गया था; बाद की गिरफ्तारियों से कुल संख्या सात हुई। उस तारीख तक पुलिस ने किसी पर आरोप तय नहीं किए थे। जमानत पर रिहाई का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है और न ही यह अपराध साबित करती है—जांच जारी थी।
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ब्रिटिश पुलिस ने यह भी कहा कि वे इस पहलू की जांच कर रहे हैं कि क्या मामले से जुड़े लोग किसी विदेशी राज्य के लिए, जानबूझकर या अनजाने में, काम कर रहे थे। यह जांच की एक दिशा है, इस बात का सार्वजनिक निष्कर्ष नहीं कि तेहरान ने इस घटना का निर्देश दिया था। ब्रिटिश अधिकारियों ने अलग से कहा है कि ब्रिटेन को ईरान से ऊंचे स्तर का खतरा है, जबकि ईरान ने Fairford से जुड़े आरोपों में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
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ट्रंप, वेंस और रुबियो के बयान अलग-अलग क्यों दिखे?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि एयरबेस को मिली धमकियों के कारण बमवर्षकों को हटाया गया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे कथित साज़िश के बाद “अत्यधिक सावधानी” बरतने का कदम बताया। इसके उलट, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बमवर्षकों की वापसी और जांच के बीच कोई सीधा संबंध नहीं था; उनके मुताबिक, पेंटागन नियमित रूप से सैन्य संसाधनों को दूसरी जगह तैनात करता है। सार्वजनिक रूप से इन अलग-अलग बयानों का मेल नहीं बैठाया गया है।
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सैन्य अभियानों के लिए इस कदम का क्या अर्थ है?
Fairford का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी बमवर्षक अभियानों के लिए किया गया था। विमानों को अमेरिका लौटाने से वे उस ठिकाने से हट गए, लेकिन वे अमेरिकी सेवा से बाहर नहीं हुए। इस कदम से अपने-आप यह भी नहीं माना जा सकता कि अमेरिका कहीं और से हमला करने में असमर्थ हो गया। उपलब्ध रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि इस बदलाव से अभियानों की उड़ानों की संख्या पर कितना असर पड़ा।
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यह वापसी सुरक्षा से जुड़ी एक व्यापक चिंता भी दिखाती है: अगर स्थानीय स्तर पर भर्ती किए गए संदिग्धों से जुड़े किसी विश्वसनीय खतरे के कारण हमला होने से पहले ही कोई अहम सैन्य ठिकाना कम उपयोगी हो जाए, तो विरोधी इसी तरह की—और अपनी भूमिका से इनकार की गुंजाइश रखने वाली—तोड़फोड़ की कोशिशों को फायदेमंद मान सकते हैं। यह संभावित रणनीतिक जोखिम है, इस बात का सबूत नहीं कि ईरान, रूस या किसी अन्य देश ने Fairford के संदिग्धों को निर्देश दिया था।
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कुछ रिपोर्टों में डिएगो गार्सिया को अमेरिकी बमवर्षकों के लिए एक संभावित वैकल्पिक ठिकाने के रूप में बताया गया। लेकिन उपलब्ध खबरें तैनाती या ईंधन और अन्य आपूर्ति की पूरी योजना नहीं देतीं। वे यह भी नहीं बतातीं कि ठिकाना बदलने से अभियानों पर कितना असर पड़ेगा।
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