फ्रांस में सोमवार, 5 अक्टूबर को 400–500 हाई स्कूलों में पढ़ाई पूरी या आंशिक रूप से रुक सकती है। शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे के मुताबिक, कई स्कूलों में कक्षाएं चलाने के लिए जरूरी सुरक्षा स्थितियां पूरी नहीं हैं। इसका मतलब यह नहीं कि सभी स्कूल पूरी तरह बंद होंगे—कुछ में केवल आंशिक रूप से पढ़ाई स्थगित हो सकती है।
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इस बीच, छात्र संगठनों और शिक्षक यूनियनों ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को आगे की कार्रवाई की तैयारी की है।
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छात्र किस बात का विरोध कर रहे हैं?
प्रदर्शन सितंबर के मध्य में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुए। शुरुआती लामबंदी राजधानी के दक्षिण-पूर्व में स्थित क्रेतेय के एक हाई स्कूल से जुड़ी थी; वहां शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी को लेकर असंतोष था। इसके बाद प्रदर्शन फ्रांस के दूसरे इलाकों तक फैल गए।
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छात्रों की शिकायतों में शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की कमी, जरूरत से ज्यादा बड़ी कक्षाएं, जर्जर स्कूल भवन और लंबे या तनावपूर्ण शेड्यूल शामिल हैं। उनकी व्यापक मांग है कि शिक्षा के लिए अधिक संसाधन दिए जाएं और पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जाए।
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400–500 स्कूलों में पढ़ाई क्यों रुक सकती है?
गेफ्रे ने कहा कि अनुमानित 400–500 हाई स्कूलों में कक्षाएं चलाने के लिए सुरक्षा की जरूरी शर्तें पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में आग लगाई गई या तोड़फोड़ हुई है। यह अनुमान उन स्कूलों का है जहां पढ़ाई पूरी तरह या आंशिक रूप से बाधित हो सकती है—यह सभी स्कूलों के पूरी तरह बंद होने का आंकड़ा नहीं है।
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बाधा का स्तर दिन-ब-दिन बदलता रहा है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को करीब 400 स्कूल बंद रहने की आशंका थी। उसी दिन दोपहर तक शिक्षा मंत्रालय की एक अलग गिनती में 564 स्कूल प्रभावित बताए गए। ये अलग समय और अलग पैमाने के आंकड़े हैं, एक ही अंतिम कुल संख्या नहीं।
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झड़पें, चोटें और गिरफ्तारियां
कुछ प्रदर्शनों के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और दंगा-रोधी पुलिस के साथ झड़पें हुईं। कुछ जगहों पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
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प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तारियों की संख्या भी बढ़ी। शुरुआती दौर में अधिकारियों ने 440 गिरफ्तारियों और 76 लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। सप्ताहांत तक आई खबरों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 5,000 से अधिक बताई गई; इनमें अधिकतर नाबालिग बताए गए।
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घायलों के आंकड़े रिपोर्ट और तारीख के हिसाब से अलग-अलग हैं। बाद की एक रिपोर्ट में 170 छात्रों और 65 स्कूल कर्मचारियों के घायल होने का जिक्र था। उसी रिपोर्ट में करीब 400 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात अलग से कही गई। इन संख्याओं को पहले के आंकड़ों के साथ जोड़कर एक ही समय की कुल संख्या नहीं मानना चाहिए।
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सरकार, पुलिस और मानवाधिकार समूहों का रुख
प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने संकट बैठक बुलाई और विरोध फैलने के बीच मंत्रियों की यात्राएं रद्द कर दीं। शिक्षा मंत्री ने माना कि छात्रों की कुछ मांगें जायज हैं, लेकिन हिंसा के जोखिम और स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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प्रधानमंत्री के करीबी एक व्यक्ति ने कहा कि खुफिया अधिकारियों ने सरकार को बताया था कि इस आंदोलन की शुरुआत कट्टर-वामपंथी नेताओं ने की। यह अधिकारियों की बताई गई राय का विवरण है; इससे यह साबित नहीं होता कि सभी छात्रों के पीछे एक ही राजनीतिक मकसद है या प्रदर्शनकारियों की शिक्षा संबंधी शिकायतें बदल जाती हैं।
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पुलिस ने स्कूलों की नाकेबंदी और हिंसक घटनाओं का सामना किया है। पेरिस के पुलिस प्रमुख ने छात्रों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लौटने की अपील की। एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल पर चिंता जताई और संवाद तथा तनाव कम करने का आग्रह किया। उपलब्ध रिपोर्टों से यह तय नहीं होता कि कितनी गिरफ्तारियां या बल-प्रयोग गैरकानूनी थे।
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अब आगे क्या?
छात्र आयोजकों ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को फिर जुटने का आह्वान किया है और शिक्षक यूनियनों ने उस दिन हड़ताल की अपील की है। यह अगली कार्रवाई बताएगी कि बेहतर स्कूल सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कितना समर्थन जुटा पाता है—और सरकार सुरक्षा चिंताओं तथा स्कूलों की हालत सुधारने की मांगों के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
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