3 अक्टूबर तक IEA के मार्च वाले 400 मिलियन बैरल के वादे में से करीब 325 मिलियन जारी हो चुके थे; लगभग 75 मिलियन बैरल बाकी थे।[4][6] G7 की नई योजना में IEA के साथ तालमेल करके चार महीने में 100 मिलियन बैरल तक जारी करना और पहले 20 दिनों में पर्याप्त मात्रा में डीज़ल उपलब्ध कराना शामिल था।[28][41] यह स्पष्ट नहीं किया गया...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: As of October 3, how much of the IEA’s March 11 pledge to release 400 million barrels from strategic reserves had been delivered, what did t. Article summary: As of October 3, about **325 million barrels** of the IEA’s March 11 commitment of 400 million had been released—just over 81%, leaving roughly 75 million still to come. The G7’s October plan was for **up to 100 million . Topic tags: general, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
3 अक्टूबर तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सदस्य देशों ने मार्च में घोषित 400 मिलियन बैरल की आपातकालीन रिलीज़ में से लगभग 325 मिलियन बैरल बाज़ार के लिए जारी कर दिए थे। यानी वादे का 80% से अधिक पूरा हो चुका था और करीब 75 मिलियन बैरल बाकी थे। इसी बीच G7 ने IEA के समन्वय से 100 मिलियन बैरल तक डीज़ल और अन्य तेल भंडार जारी करने की नई योजना घोषित की। इसमें शुरुआती 20 दिनों में डीज़ल की बड़ी मात्रा उपलब्ध कराने पर जोर था।4
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लेकिन दोनों आंकड़ों के बीच एक अहम कड़ी अब भी साफ़ नहीं थी: G7 की नई 100 मिलियन बैरल योजना में मार्च के वादे से बचे करीब 75 मिलियन बैरल शामिल थे या यह उसके अलावा अतिरिक्त रिलीज़ थी। उपलब्ध रिपोर्टिंग ने इसका जवाब नहीं दिया।4
325 मिलियन बैरल का आंकड़ा मार्च में घोषित IEA की आपातकालीन कार्रवाई के तहत अब तक जारी मात्रा बताता है। यह अक्टूबर की G7 योजना के तहत हुई रिलीज़ का आंकड़ा नहीं है। मार्च की पहल का मकसद तेल बाज़ार में आपूर्ति व्यवधान का असर कम करना था। IEA ने यह भी चेताया था कि मध्य पूर्व से उत्पादन और निर्यात लंबे समय तक बाधित रहने पर डीज़ल और विमान ईंधन की आपूर्ति विशेष रूप से दबाव में आ सकती है।6
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G7 ने कहा कि IEA के माध्यम से समन्वित रिलीज़ तुरंत शुरू होगी और चार महीने चलेगी। पहले 20 दिनों में डीज़ल की पर्याप्त मात्रा जारी करने की योजना भी बताई गई। पर घोषणा में यह नहीं बताया गया कि नई योजना मार्च के अधूरे हिस्से को पूरा करेगी या उसके ऊपर अतिरिक्त बैरल जोड़ेगी। इसलिए दोनों आंकड़ों को जोड़कर अलग-अलग बैरलों का पक्का कुल बताना उचित नहीं होगा।4
कच्चे तेल को डीज़ल बनने से पहले रिफाइनरी में संसाधित करना पड़ता है। ऐसे में तैयार डीज़ल जारी करना, डीज़ल की तंगी को सीधे दूर करने का अधिक तात्कालिक रास्ता हो सकता है। IEA ने भी कहा था कि मध्य पूर्व से उत्पादन और निर्यात में लंबे समय तक कमी रहने पर डीज़ल बाज़ार खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि दूसरे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है।12
फ्रांस ने पहले एक प्रस्ताव रखा था: यूरोपीय देशों से 50 मिलियन बैरल डीज़ल और IEA सदस्यों से 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी किया जाए। यह G7 के फैसले से पहले चर्चा में आया प्रस्ताव था, न कि समूह की घोषणा में तय की गई मात्रा-विभाजन योजना। G7 ने शुरुआती डीज़ल रिलीज़ पर जोर दिया, लेकिन सार्वजनिक घोषणा में 50–50 का बंटवारा पुष्ट नहीं किया।
आपातकालीन भंडार खोलने के साथ G7 ने रिफाइनरियों के रखरखाव का समय आपस में मिलाकर तय करने की बात कही, ताकि कई इकाइयां एक साथ बंद न हों। जहां संभव हो, रिफाइनरियों का इस्तेमाल अस्थायी रूप से बढ़ाने और ऊर्जा तथा ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर साझेदार देशों के बीच रोक न लगाने की भी प्रतिबद्धता जताई गई। रिफाइनिंग क्षमता वाले देशों से बातचीत बढ़ाने का आह्वान भी किया गया।
इन कदमों का उद्देश्य उपलब्ध कच्चे तेल और तैयार ईंधन का बेहतर इस्तेमाल और व्यापार बनाए रखना है। हालांकि, इनसे यह गारंटी नहीं मिलती कि रिफाइनरियां होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाधित आपूर्ति की भरपाई कर देंगी या ईंधन उत्पादन की दूसरी सीमाएं दूर हो जाएंगी।12
G7 की घोषणा में रिलीज़ की अवधि और शुरुआती डीज़ल आपूर्ति की बात थी, लेकिन उपलब्ध विवरणों में आपातकालीन भंडार को दोबारा भरने के लिए तेल खरीदने का कोई निश्चित समय-सारिणी नहीं दी गई। इसलिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि भंडार की भरपाई कब और किस गति से होगी।
फिलहाल इस योजना को आपूर्ति पर तात्कालिक दबाव कम करने की कोशिश के रूप में देखना चाहिए—डीज़ल की समस्या सुलझ जाने के प्रमाण के रूप में नहीं। इसका असर इस पर निर्भर करेगा कि कितना ईंधन जारी होता है, वह बाज़ार तक कितनी जल्दी पहुंचता है और रिफाइनरी तथा व्यापार से जुड़े कदम आपूर्ति की बाधाओं को कितना कम कर पाते हैं।12
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3 अक्टूबर तक IEA के मार्च वाले 400 मिलियन बैरल के वादे में से करीब 325 मिलियन जारी हो चुके थे; लगभग 75 मिलियन बैरल बाकी थे।[4][6]
3 अक्टूबर तक IEA के मार्च वाले 400 मिलियन बैरल के वादे में से करीब 325 मिलियन जारी हो चुके थे; लगभग 75 मिलियन बैरल बाकी थे।[4][6] G7 की नई योजना में IEA के साथ तालमेल करके चार महीने में 100 मिलियन बैरल तक जारी करना और पहले 20 दिनों में पर्याप्त मात्रा में डीज़ल उपलब्ध कराना शामिल था।[28][41]
यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नई 100 मिलियन बैरल योजना में मार्च के वादे के बचे हुए 75 मिलियन बैरल शामिल हैं या नहीं। इसलिए दोनों आंकड़ों को जोड़कर कुल मात्रा बताना सही नहीं होगा।[4][18]