NGC 362D में मिलिसेकंड पल्सर और सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 0.18 गुना वाला हीलियम श्वेत बौना एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं। इस जोड़े की कक्षीय अवधि करीब 0.17 दिन, यानी लगभग 4.1 घंटे है। तारकीय विकास के मॉडल के अनुसार, पल्सर और उसके साथी के बीच पदार्थ का आदान प्रदान करीब 60 करोड़ साल पहले समाप्त हुआ।
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did astronomers discover about the young helium white dwarf orbiting the millisecond pulsar NGC 362D (PSR J0103-7050D) in the globular. Article summary: Astronomers identified an unusually young, very low-mass helium white dwarf as the companion to the millisecond pulsar NGC 362D in the globular cluster NGC 362. Its estimated mass is about 0.18 times the Sun’s, making th. Topic tags: general, government, academic, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts wi
NGC 362D, जिसे PSR J0103−7050D भी कहा जाता है, गोलाकार तारागुच्छ NGC 362 में मौजूद एक मिलिसेकंड पल्सर है। इसकी खासियत है इसका साथी—एक बेहद कम-द्रव्यमान वाला हीलियम श्वेत बौना, जिसका अनुमानित द्रव्यमान सूर्य का करीब 0.18 गुना है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह तारा अभी श्वेत बौने की ठंडी होती अवस्था तक नहीं पहुँचा है। दोनों के बीच पदार्थ का आदान-प्रदान लगभग 60 करोड़ साल पहले समाप्त हुआ होगा। 2
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MeerKAT रेडियो दूरबीन के अवलोकनों से पल्सर की पहचान हुई। उसकी लगभग 0.17 दिन—करीब 4.1 घंटे—की कक्षीय अवधि ने संकेत दिया कि वह एक करीबी द्वितारा प्रणाली का हिस्सा है। 6
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इसके बाद शोधकर्ताओं ने हबल अंतरिक्ष दूरबीन से अलग-अलग फ़िल्टरों और समय पर ली गई गहरी तस्वीरों में पल्सर की स्थिति से मेल खाता एक प्रकाश-स्रोत खोजा। उसकी रोशनी का विश्लेषण करने पर वह बहुत कम-द्रव्यमान वाला हीलियम श्वेत बौना निकला, जो अभी ठंडा होने से पहले की अवस्था में है। 2
दोनों दूरबीनों के काम अलग-अलग, लेकिन एक-दूसरे के पूरक थे: रेडियो अवलोकनों ने पल्सर और उसकी कक्षा को समझने में मदद की, जबकि हबल के प्रकाशीय आँकड़ों से उसका धुंधला साथी पहचाना गया। 2
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श्वेत बौने की देखी गई विशेषताओं की तुलना द्वितारा प्रणालियों के नए विकास-मॉडलों से की गई। इस तुलना के आधार पर अनुमान है कि साथी से पल्सर तक पदार्थ का बहना करीब 0.6 अरब साल पहले थमा था। यह मॉडल से निकला समय-अनुमान है—घटना का सीधे देखा गया समय नहीं। 2
श्वेत बौने का कम द्रव्यमान और उसका अभी ठंडा होने से पहले की अवस्था इस निष्कर्ष के अहम आधार हैं। इसलिए NGC 362D वैज्ञानिकों को ऐसी प्रणाली की दुर्लभ झलक देता है जिसमें पदार्थ का आदान-प्रदान अपेक्षाकृत हाल में समाप्त हुआ। 2
शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि पदार्थ के आदान-प्रदान के अंतिम दौर में बाहर निकली कुछ सामग्री श्वेत बौने के आसपास अब भी मौजूद हो सकती है। अध्ययन पर आई एक रिपोर्ट में ऐसे संभावित परिवेशी पदार्थ के संकेतों का ज़िक्र है, लेकिन उपलब्ध जानकारी उसकी संरचना तय नहीं करती और न ही उसकी मौजूदगी को पक्की खोज के रूप में स्थापित करती है। 6
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यह फर्क अहम है: कुछ पल्सरों में साथी के आसपास का आयनित पदार्थ रेडियो संकेतों को रोक सकता है या ग्रहण लगा सकता है, लेकिन यह सामान्य संभावना अपने-आप में इस बात का सबूत नहीं कि NGC 362D में ऐसा हो रहा है। 3
तारकीय विकास के एक प्रमुख विचार के मुताबिक, जब एक न्यूट्रॉन तारा अपने साथी से पदार्थ खींचता है, तो वह तेज़ी से घूमने लगता है। पदार्थ का प्रवाह रुकने के बाद साथी श्वेत बौने के रूप में बच सकता है। इस प्रक्रिया को पल्सर का ‘रीसाइक्लिंग’ कहा जाता है। NGC 362D में तेज़ घूमता पल्सर और हीलियम श्वेत बौना इस प्रक्रिया के बाद के अपेक्षाकृत शुरुआती दौर का अध्ययन करने का अवसर देते हैं। 2
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मिलिसेकंड पल्सर अपने नियमित रेडियो स्पंदनों के कारण ब्रह्मांडीय घड़ियों की तरह भी काम आते हैं। NGC 362D जैसे जोड़े से वैज्ञानिक यह जाँच सकते हैं कि पदार्थ का आदान-प्रदान थमने के बाद क्या होता है—और क्या आसपास बची सामग्री रेडियो स्पंदनों के मापन को प्रभावित कर सकती है। इस प्रणाली में ऐसा असर अभी साबित नहीं हुआ है; यह खुला हुआ सवाल है। 3
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NGC 362D में मिलिसेकंड पल्सर और सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 0.18 गुना वाला हीलियम श्वेत बौना एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं।
NGC 362D में मिलिसेकंड पल्सर और सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 0.18 गुना वाला हीलियम श्वेत बौना एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं। इस जोड़े की कक्षीय अवधि करीब 0.17 दिन, यानी लगभग 4.1 घंटे है।
तारकीय विकास के मॉडल के अनुसार, पल्सर और उसके साथी के बीच पदार्थ का आदान प्रदान करीब 60 करोड़ साल पहले समाप्त हुआ।