तेल बाज़ार में गुरुवार की तेज़ी की एक बड़ी वजह यह आशंका थी कि डीज़ल समेत तैयार ईंधनों की आपूर्ति और तंग हो सकती है। चीन के कुछ अक्टूबर ईंधन निर्यात रुकने और रूस के डीज़ल निर्यात प्रतिबंध बढ़ाने की खबरों ने चिंता बढ़ाई। इसके साथ मध्य पूर्व में जहाज़ों की आवाजाही को लेकर जोखिम फिर चर्चा में आया। शुक्रवार को आपात ईंधन और कच्चे तेल के भंडार जारी करने की योजना ने चिंता को कुछ कम किया। फिर भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क—ब्रेंट और अमेरिकी WTI—एक जैसी मात्रा में नहीं गिरे।
गुरुवार को कीमतें क्यों चढ़ीं?
बाज़ार का ध्यान सिर्फ कच्चे तेल पर नहीं, बल्कि उसे रिफ़ाइन करके बनाए जाने वाले ईंधनों, खासकर डीज़ल, पर भी था। खबरों के मुताबिक, चीन की रिफ़ाइनरियों ने अक्टूबर के कुछ ईंधन निर्यात रोक दिए या रद्द किए। रूस ने भी डीज़ल निर्यात पर अपनी पाबंदियां बढ़ाईं। इससे आयात करने वाले देशों के लिए उपलब्ध ईंधन घटने की आशंका पैदा हुई।
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भूराजनीतिक घटनाओं ने इस चिंता को और हवा दी। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की अतिरिक्त तैनाती की खबरों के बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर हमलों की खबर आई। इससे तेल की खेपों के बाधित होने का डर फिर उभरा—हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक, मध्य पूर्व से कच्चे तेल का प्रवाह युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौट आया था।
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गुरुवार के कारोबार के अंत में ब्रेंट 4.4% बढ़कर 102.31 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी बेंचमार्क WTI 2.7% चढ़कर 92.87 डॉलर पर पहुंचा।
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शुक्रवार को नरमी क्यों आई?
अतिरिक्त आपात भंडार जारी करने की संभावना ने निर्यात और जहाज़रानी से जुड़े जोखिमों के सामने कुछ राहत दी। शुक्रवार को G7—यानी दुनिया की सात प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के समूह—ने चार महीनों में 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और डीज़ल के भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की। योजना के शुरुआती दौर में डीज़ल की बड़ी मात्रा जारी करने की बात भी थी। इससे ईंधन की तंग आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ घटी।
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शुक्रवार के अंतिम भाव में दोनों बेंचमार्क की चाल अलग रही। ब्रेंट 6 सेंट फिसलकर 102.25 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि WTI 1.76 डॉलर गिरकर 91.11 डॉलर पर आ गया।
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शुक्रवार के शुरुआती भाव और बंद भाव में फर्क
शुक्रवार के कारोबार के दौरान आई कुछ खबरों में कीमतें अंतिम भाव से अलग थीं। मसलन, शुरुआती रिपोर्टों में ब्रेंट 102.60 डॉलर और WTI 93.14 डॉलर पर बताए गए; बाद में सत्र के दौरान इससे कम भाव भी दर्ज हुए। ये अलग-अलग समय के भाव थे—शुक्रवार के बंद भाव नहीं।
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हफ्ते की हलचल के पीछे दो तरह की आशंकाएं थीं: डीज़ल जैसे परिष्कृत ईंधनों की कमी और नए तनाव से तेल की खेपों पर पड़ सकने वाला असर। भंडार जारी करने की योजना ने पहली चिंता को कुछ कम किया, लेकिन टैंकर हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरों के चलते आपूर्ति का जोखिम बना रहा।