23 जून 2025 को प्रक्षेपित छह मोड वाले फोटोनिक प्रोसेसर ने कम पृथ्वी कक्षा में आठ महीने तक काम किया और दो फोटॉनों का इंटरफेरेंस दर्ज किया। यंत्र ने फोटॉन जोड़े बनाए, उन्हें प्रोग्राम किए जा सकने वाले कांच के सर्किट से गुज़ारा और उनके आउटपुट मापे। इंटरफेरेंस की दर्ज दृश्यता 0.908 ± 0.191 थी—यानी माप में काफ़ी अनिश्चित...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did researchers operate a programmable photonic quantum processor aboard a spacecraft in low Earth orbit for the first time, and what di. Article summary: Researchers operated a small, programmable photonic processor in low Earth orbit by generating photon pairs aboard the spacecraft, routing them through a six-path glass chip, and measuring the photons at its outputs. Ove. Topic tags: general, academic, general web, education, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, water
एक छोटा फोटोनिक क्वांटम प्रोसेसर कम पृथ्वी-कक्षा में आठ महीने तक चला। इस दौरान उसने फोटॉन के जोड़े बनाए, उन्हें प्रोग्राम किए जा सकने वाले कांच के सर्किट में गुज़ारा और उनके आउटपुट मापे। खास बात यह है कि छह में से केवल तीन फोटॉन डिटेक्टर काम के लायक बचे थे। फिर भी, टीम ने दो फोटॉनों के बीच क्वांटम इंटरफेरेंस दर्ज किया। 1
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यह अंतरिक्ष में एक बुनियादी क्वांटम ऑपरेशन का प्रदर्शन है—उपयोगी काम करने वाले अंतरिक्ष-आधारित क्वांटम कंप्यूटर का नहीं। 1
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यह पेलोड 23 जून 2025 को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट से प्रक्षेपित हुआ और पृथ्वी से लगभग 510 किलोमीटर ऊपर कक्षा में पहुँचा। इसके हार्डवेयर में फोटॉन-जोड़ा स्रोत, छह-मोड वाला एकीकृत कांच का सर्किट, एकल-फोटॉन डिटेक्टर और नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल थे। 10
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काम की शुरुआत लेज़र और क्रिस्टल से होती थी, जिनसे फोटॉन के जोड़े बनते थे। फिर फोटॉन कांच के सर्किट से गुज़रते, जहाँ सूक्ष्म हीटर प्रकाश के रास्ते को नियंत्रित कर सकते थे। सर्किट के दूसरे छोर पर लगे डिटेक्टर दर्ज करते कि फोटॉन कहाँ पहुँचे। इन मापों के सहारे शोधकर्ता कक्षा में प्रोग्राम किए गए ऑपरेशन जाँच सके। 7
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प्रयोग में हाँग–ओउ–मैंडल इंटरफेरेंस देखा गया—एक विशिष्ट प्रभाव, जिसमें एक-दूसरे से अलग न पहचाने जा सकने वाले फोटॉन मिलने पर उनके संयुक्त आउटपुट का पैटर्न बदलता है। इस परीक्षण में इंटरफेरेंस की दृश्यता 0.908 ± 0.191 बताई गई। 10
इस संख्या के साथ दी गई अनिश्चितता अहम है: नतीजा इंटरफेरेंस के अवलोकन का समर्थन करता है, लेकिन इसे किसी परिपक्व क्वांटम प्रोसेसर की सटीक या निर्णायक प्रदर्शन-जाँच नहीं समझना चाहिए। 10
इसलिए उपलब्धि यह दिखाती है कि कक्षा में फोटॉन बनाए, नियंत्रित और मापे जा सकते हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि यंत्र ने कोई उपयोगी कंप्यूटिंग समस्या हल की या पारंपरिक कंप्यूटरों से बेहतर प्रदर्शन किया। 1
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प्रक्षेपण के बाद छह में से तीन डिटेक्टर इस्तेमाल करने योग्य नहीं रहे। कम डिटेक्टरों के कारण टीम के पास आउटपुट मापने के विकल्प घट गए और किए जा सकने वाले प्रयोग सीमित हुए। उपलब्ध स्रोत डिटेक्टरों के काम करना बंद करने की जानकारी देते हैं, लेकिन हर खराबी का निश्चित कारण नहीं बताते। 12
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कक्षा का माहौल भी चुनौतीपूर्ण था। रिपोर्टों में विकिरण, तापमान में बदलाव और सूर्य के प्रकाश से पैदा होने वाले शोर को लंबे समय तक काम जारी रखने के लिए चिंता का विषय बताया गया है। ऐसे प्रयोग में लंबे समय तक फोटॉन डिटेक्शन जुटाना ज़रूरी होता है; इस दौरान घटकों का धीरे-धीरे खराब होना या पृष्ठभूमि प्रकाश का व्यवधान असर डाल सकता है। 9
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परीक्षण इस बात का प्रमाण देता है कि छोटा फोटोनिक सिस्टम कक्षा में फोटॉन-जोड़े बनाकर उनमें क्वांटम ऑपरेशन कर सकता है। यह अंतरिक्ष में ही प्रसंस्करण की दिशा में एक शुरुआती कदम है, लेकिन इस प्रयोग में पृथ्वी-अवलोकन की तस्वीरों का विश्लेषण नहीं किया गया और न ही उपग्रह डेटा के विश्लेषण में कोई व्यावहारिक बढ़त दिखाई गई। भविष्य में पृथ्वी-अवलोकन डेटा के मशीन-लर्निंग विश्लेषण में ऐसे हार्डवेयर का इस्तेमाल एक प्रस्तावित संभावना है, इस परीक्षण का प्रदर्शित नतीजा नहीं। 1
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संतुलित निष्कर्ष यही है: यंत्र प्रक्षेपण के बाद भी काम करता रहा और उसने कक्षा में क्वांटम ऑप्टिकल ऑपरेशन किया। साथ ही, डिटेक्टरों की विफलता और अंतरिक्ष में काम करने की परिस्थितियों ने विश्वसनीयता तथा माप की सीमाएँ उजागर कीं—जिनका समाधान भविष्य के डिज़ाइनों को करना होगा। 1
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23 जून 2025 को प्रक्षेपित छह मोड वाले फोटोनिक प्रोसेसर ने कम पृथ्वी कक्षा में आठ महीने तक काम किया और दो फोटॉनों का इंटरफेरेंस दर्ज किया।
23 जून 2025 को प्रक्षेपित छह मोड वाले फोटोनिक प्रोसेसर ने कम पृथ्वी कक्षा में आठ महीने तक काम किया और दो फोटॉनों का इंटरफेरेंस दर्ज किया। यंत्र ने फोटॉन जोड़े बनाए, उन्हें प्रोग्राम किए जा सकने वाले कांच के सर्किट से गुज़ारा और उनके आउटपुट मापे।
इंटरफेरेंस की दर्ज दृश्यता 0.908 ± 0.191 थी—यानी माप में काफ़ी अनिश्चितता थी। पृथ्वी अवलोकन डेटा का प्रसंस्करण इस परीक्षण का नतीजा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रस्तावित उपयोग है।