अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फ़ातिह बिरोल की चेतावनी का सीधा अर्थ यह नहीं है कि यूरोप इस सर्दी में डीज़ल से वंचित हो जाएगा। चिंता यह है कि आपूर्ति में और कमी आई तो उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। यूरोप आयात पर बहुत निर्भर है, उसके पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं को दिक्कतें हैं, भंडार कम हैं और रिफाइनरियों के पास उत्पादन तेजी से बढ़ाने की सीमित गुंजाइश है। यह मेल कीमतों में और उछाल या कुछ जगहों पर आपूर्ति की कमी का जोखिम बढ़ाता है।
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आपूर्ति पर एक साथ कई तरफ़ से दबाव
मध्य पूर्व के संघर्ष ने क्षेत्र से ईंधन की रिफाइनिंग और निर्यात को बाधित किया है। वहीं, यूक्रेनी हमलों से रूसी रिफाइनरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है और रूस ने डीज़ल निर्यात पर रोक लगाई है। जब बाज़ार में आने वाला ईंधन घटता है, तो पहले से कम भंडार आपूर्ति की रुकावट झेलने की क्षमता भी कम कर देते हैं। यूरोप और अमेरिका में डीज़ल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
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आयात पर निर्भरता यूरोप को क्यों अधिक जोखिम में डालती है?
आयात पर निर्भर होने का मतलब है कि यूरोपीय खरीदारों को उपलब्ध मालवाहक खेपों के लिए दूसरे खरीदारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। अगस्त में समुद्री मार्ग से यूरोप आए डीज़ल का करीब आधा हिस्सा अमेरिका से आया था। इसलिए अगर दूसरे निर्यातक जल्दी आपूर्ति नहीं बढ़ा पाते, तो अमेरिकी आपूर्ति का महत्व और बढ़ जाता है।
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इस संकट में कच्चे तेल और तैयार डीज़ल के बीच फर्क भी अहम है। कच्चे तेल का भंडार जारी करने से मदद मिल सकती है, लेकिन उसे डीज़ल बनाने के लिए रिफाइनरी क्षमता चाहिए। जहां रिफाइनरियां ही सीमित हों, वहां कच्चे तेल से तुरंत तैयार ईंधन की कमी पूरी नहीं हो सकती। इसलिए भंडार से राहत मिल सकती है, पर बाधित उत्पादन अपने-आप बहाल नहीं होता।
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भंडार जारी करने पर चर्चा—फैसला अभी नहीं
बिरोल ने कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर IEA के सदस्य देश अतिरिक्त आपातकालीन भंडार जारी करने पर चर्चा कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि नया सामूहिक भंडार-रिलीज़ तय हो चुका है। ऐसे कदम कुछ समय के लिए बाज़ार का दबाव घटा सकते हैं, लेकिन बाधित आपूर्ति का स्थायी विकल्प नहीं हैं।
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देशों के अपने कदम भी दिखाते हैं कि सरकारें स्थानीय उपलब्धता और कीमतों को संभालने की कोशिश कर रही हैं। सर्बिया ने राज्य भंडार से करीब 5,000 टन डीज़ल बाज़ार में उतारने और ईंधन निर्यात पर पाबंदी बढ़ाने का कदम उठाया है।
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8 इटली में Eni की Enilive ने खुदरा ईंधन कीमतों पर अस्थायी सीमा की घोषणा की। ऐसे कदम स्थानीय उपभोक्ताओं को कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन यूरोप की कुल डीज़ल आपूर्ति में बड़ी बढ़ोतरी नहीं करते।
अमेरिकी निर्यात प्रतिबंध की आशंका
अमेरिका से डीज़ल निर्यात पर 90 दिन की रोक लगने की खबर यूरोप के लिए अहम है, क्योंकि इससे आयात का एक बड़ा स्रोत सीमित हो सकता है और दूसरे बाज़ारों में कीमतें बढ़ सकती हैं। लेकिन यह प्रस्ताव की खबर है, लागू किया गया प्रतिबंध नहीं: व्हाइट हाउस ने ऐसी योजना की रिपोर्ट का खंडन किया है।
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अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा कि निर्यात रोकने से उलटा असर हो सकता है—रिफाइनरियों में भंडारण भरने पर उन्हें उत्पादन घटाना पड़ सकता है। यूरोपीय संघ ने वॉशिंगटन के सामने अपनी चिंता रखी है।
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7 इसलिए यूरोप की असली चुनौती केवल महंगे ईंधन की नहीं, बल्कि ऐसे बाज़ार में भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखने की है जहां कमी की भरपाई के विकल्प सीमित हैं।