मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व रफ्तार के करीब लौट आया है। लेकिन इसे पूरी तरह सामान्य स्थिति कहना जल्दबाज़ी होगी: जहाज़ों की आवाजाही अब भी जोखिम में है और तेल उत्पादों की सप्लाई पीछे चल रही है।
JPMorgan के अनुसार, कच्चे तेल की खेप 17.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन—यानी युद्ध-पूर्व स्तर का 98%—तक पहुंची। वहीं Goldman Sachs का अनुमान है कि बीते हफ्ते फ़ारस की खाड़ी से तेल निर्यात 23.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो 2025 के औसत के बराबर है।
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सऊदी अरब ने कैसे बढ़ाई सप्लाई?
इस वापसी में सऊदी अरब की भूमिका अहम रही है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से अधिक खेपें गुजर रही हैं; कुछ तेल का एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में स्थानांतरण भी किया गया। साथ ही, ड्रोन हमलों से क्षतिग्रस्त सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की लगभग आधी क्षमता बहाल हो चुकी है। यह पाइपलाइन तेल को लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाने का ऐसा रास्ता देती है जो होर्मुज़ से होकर नहीं जाता।
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बैंकों के अनुमान अलग क्यों हैं?
इन दोनों आंकड़ों को एक ही पैमाने पर रखकर देखना ठीक नहीं होगा। JPMorgan का 17.5 मिलियन बैरल वाला अनुमान मध्य पूर्व के कच्चे तेल की खेप को युद्ध-पूर्व स्तर से तुलना करता है। Goldman Sachs का 23.3 मिलियन बैरल का आंकड़ा फ़ारस की खाड़ी के कुल तेल निर्यात का हालिया अनुमान है, जिसकी तुलना 2025 के औसत से की गई है।
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Goldman के अनुमान में “डार्क” शिपमेंट भी शामिल हैं—यानी ऐसे जहाज़ जो अपनी लोकेशन बताने वाले ट्रांसपोंडर बंद करके चलते हैं। ऐसे सफ़रों की सही गिनती मुश्किल है, इसलिए कुल निर्यात का अनुमान अनिश्चित रहता है।
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11 क्षेत्रीय औसत में सुधार का यह मतलब भी नहीं कि हर निर्यातक की सप्लाई लौट आई है: Goldman के मुताबिक सितंबर में ईरान ने समुद्र के रास्ते कच्चा तेल नहीं भेजा।
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कच्चा तेल लौटा, ईंधन की सप्लाई नहीं
कच्चे तेल के आंकड़े बेहतर दिखते हैं, लेकिन डीज़ल, पेट्रोल और दूसरे परिष्कृत उत्पादों का प्रवाह JPMorgan के अनुमान में 3 मिलियन बैरल प्रतिदिन—युद्ध-पूर्व स्तर का सिर्फ़ 58%—था। इसलिए कच्चे तेल का निर्यात लगभग पुराने स्तर पर पहुंचना, इस्तेमाल के लिए तैयार ईंधनों की सप्लाई सामान्य होने के बराबर नहीं है।
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सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव पड़ा है, फिर भी 30 सितंबर को ब्रेंट कच्चा तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
2 होर्मुज़ में जहाज़ों को खतरा और पाइपलाइन की अधूरी बहाली इस सुधार को पलट सकती है। फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि रास्तों से तेल फिर गुजर रहा है—यह नहीं कि वे पूरी तरह सुरक्षित हो गए हैं।
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