1958 में शुरू हुई ग्रेट लीप फॉरवर्ड का लक्ष्य चीन का तेज़ी से औद्योगीकरण और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। इसके तहत ग्रामीण आबादी को बड़े सामूहिक कम्यूनों में संगठित किया गया और इस्पात उत्पादन पर ज़ोर दिया गया। लोगों को खेती से हटाकर उद्योग और अन्य परियोजनाओं में लगाया गया। अवास्तविक उत्पादन लक्ष्य और अनाज की सरकारी वसूली...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What was the "Great Leap Forward," and why did it lead to famine?. Article summary: The Great Leap Forward was Mao Zedong’s campaign, launched in 1958, to rapidly industrialize China and increase farm output by organizing rural people into large communes and pushing steel production. Instead, its polici. Topic tags: general, government, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thu
ग्रेट लीप फॉरवर्ड चीन के नेता माओ ज़ेडोंग की वह मुहिम थी, जिसका मकसद देश का तेज़ी से औद्योगीकरण करना और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। 1958 में शुरू हुई इस योजना के तहत ग्रामीण आबादी को बड़े सामूहिक कम्यूनों में संगठित किया गया और इस्पात उत्पादन जैसे कामों के लिए लोगों को जुटाया गया। लेकिन मुहिम अपने घोषित लक्ष्यों तक नहीं पहुँची। उसकी नीतियों और योजना की नाकामियों ने 1959 से 1961 के बीच आए भीषण अकाल को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। 5
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इस्पात बनाने और बड़े निर्माण कार्यों की मुहिम में अनेक किसानों को खेतों से हटाकर दूसरे कामों में लगाया गया। कुछ लोगों को कच्चा माल जुटाने और भट्टियाँ चलाने में लगाया गया, जबकि उन्हें फसल उगाने और काटने में काम करना था। इससे खेती का श्रम बाधित हुआ। 1
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सामूहिक खेती की व्यवस्था में निजी तौर पर भोजन उगाने पर भी रोक लगी और खेती को बड़े पैमाने पर संगठित किया गया। कृषि से श्रमिकों को हटाने और योजना संबंधी दूसरी गलतियों के साथ इन बदलावों ने अनाज उत्पादन में तेज़ गिरावट में योगदान दिया। 4
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उत्पादन के लक्ष्य अवास्तविक थे। उन्हें पूरा दिखाने के दबाव में फसल की पैदावार की रिपोर्टें भी वास्तविकता से अलग हो सकती थीं। इस बीच सरकार अनाज की वसूली जारी रखे हुए थी, जिससे ग्रामीण समुदायों के पास खाने के लिए कम अनाज बचा। घटती पैदावार के साथ इन फैसलों और वितरण की खामियों ने संकट को और गहरा किया। 7
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खराब मौसम ने भी हालात बिगाड़े, लेकिन उपलब्ध स्रोत नीतिगत फैसलों और योजना की नाकामियों को संकट के प्रमुख कारणों में गिनते हैं। इसलिए अकाल को केवल प्राकृतिक परिस्थितियों का नतीजा नहीं माना जा सकता। 2
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मृतकों की सटीक संख्या निश्चित नहीं है और प्रकाशित अनुमान अलग-अलग हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में आई समीक्षा करीब 3 करोड़ मौतों का अनुमान देती है। बीबीसी 1959 से 1961 के अकाल के लिए 1 करोड़ से 4 करोड़ तक का दायरा बताता है। 1
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ग्रेट लीप फॉरवर्ड का यह दौर दिखाता है कि जब श्रम को खेती से हटाया जाए, कृषि योजना गलत हो और खाद्यान्न की वसूली जारी रहे, तो घटती पैदावार एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकती है। मौतों के आंकड़े पर अनुमान अलग हैं, लेकिन उपलब्ध स्रोत नीतिगत नाकामियों को इस अकाल की अहम वजह बताते हैं। 2
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1958 में शुरू हुई ग्रेट लीप फॉरवर्ड का लक्ष्य चीन का तेज़ी से औद्योगीकरण और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। इसके तहत ग्रामीण आबादी को बड़े सामूहिक कम्यूनों में संगठित किया गया और इस्पात उत्पादन पर ज़ोर दिया गया।
1958 में शुरू हुई ग्रेट लीप फॉरवर्ड का लक्ष्य चीन का तेज़ी से औद्योगीकरण और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। इसके तहत ग्रामीण आबादी को बड़े सामूहिक कम्यूनों में संगठित किया गया और इस्पात उत्पादन पर ज़ोर दिया गया। लोगों को खेती से हटाकर उद्योग और अन्य परियोजनाओं में लगाया गया। अवास्तविक उत्पादन लक्ष्य और अनाज की सरकारी वसूली ने खाद्य संकट को बढ़ाया; खराब मौसम भी एक योगदानकर्ता था, लेकिन अकेली वजह नहीं।