चीन में पैर बाँधने की प्रथा का पता लगभग 10वीं सदी से मिलता है। छोटे पैर सुंदरता और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े थे, जबकि शोध कुछ समुदायों में लड़कियों के घरेलू हस्तशिल्प के काम की भूमिका भी दिखाता है। यह प्रथा हर जगह एक ही समय पर खत्म नहीं हुई। एक संदर्भ इसका अंत 1949 से जोड़ता है, जबकि अन्य विवरणों के अनुसार यह 20वीं...
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शोध उत्तर

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चीन में लड़कियों के पैर बाँधने की प्रथा पूरे प्राचीन इतिहास में नहीं चली। इसके प्रमाण लगभग 10वीं सदी से मिलते हैं, जब छोटे पैरों को स्त्री-सौंदर्य और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाने लगा। लेकिन इस लंबे इतिहास को सिर्फ सुंदरता की धारणा से नहीं समझा जा सकता: शोध में घरेलू अर्थव्यवस्था और लड़कियों के कपड़ा-कताई जैसे हस्तशिल्प कार्यों की भूमिका की ओर भी संकेत मिलता है।1
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मिसौरी विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र संग्रहालय के अनुसार, पैर बाँधने के प्रमाण दक्षिणी तांग काल, यानी 937 से 956 ईस्वी के बीच के हैं। छोटे पैरों को पसंद किए जाने का सांस्कृतिक संकेत इससे पहले का हो सकता है, लेकिन ऐसी पसंद अपने-आप में पैर बाँधने की प्रथा का प्रमाण नहीं है।1
इसमें पैरों को कसकर पट्टियों से लपेटा जाता था। उँगलियों को नीचे मोड़ा जाता और कई मामलों में हड्डियाँ तोड़ी जाती थीं। इससे चलने-फिरने की क्षमता पर स्थायी असर पड़ सकता था।1
छोटे पैर सुंदरता और सामाजिक हैसियत के आदर्श बन गए थे। कुछ जगहों पर बँधे पैरों को बेहतर विवाह-संभावनाओं से भी जोड़ा जाता था।2
11 इन मान्यताओं से समझ आता है कि इस प्रथा का सामाजिक दबाव क्यों बना, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हर परिवार ने एक ही वजह से ऐसा किया।
आर्थिक शोध इस कहानी का एक और पहलू सामने रखता है। एक अध्ययन में पैर बाँधने और व्यावसायिक हस्तशिल्प—खासकर सूत कातने—के बीच संबंध पाया गया। इसके निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ समुदायों में लड़कियों के श्रम की भूमिका रही हो सकती है।9 महिलाओं के जीवन-वृत्तांतों में भी बँधे पैरों वाली लड़कियों के घर के लिए या कमाई के वास्ते सूत कातने और कपड़ा बुनने का उल्लेख मिलता है।
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इसलिए इसे सिर्फ सौंदर्य या आकर्षण से जोड़कर देखना अधूरा होगा। अलग-अलग जगहों पर आर्थिक परिस्थितियाँ अलग थीं, और उपलब्ध शोध यह नहीं कहता कि हर परिवार या समुदाय ने इस प्रथा को एक ही कारण से अपनाया।9
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20वीं सदी में यह रिवाज घटने लगा, लेकिन हर जगह एक साथ बंद नहीं हुआ। इसके पतन में पैर बाँधने के विरोध में चले अभियान और बदलती सामाजिक परिस्थितियों का योगदान था। कुछ विवरण बताते हैं कि यह प्रथा 20वीं सदी के मध्य तक जारी रही।5
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स्रोत इसके अंत की अलग-अलग समय-सीमाएँ देते हैं। ब्रिटानिका इसे 1949 में चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना तक प्रचलित बताती है, जबकि हार्वर्ड गज़ेट के अनुसार यह 20वीं सदी के मध्य तक समाप्त हो चुकी थी।5
10 इसलिए सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि यह प्रथा अलग-अलग जगहों पर अलग समय पर लुप्त हुई—इसके खत्म होने की कोई एक सर्वमान्य तारीख नहीं है।
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चीन में पैर बाँधने की प्रथा का पता लगभग 10वीं सदी से मिलता है। छोटे पैर सुंदरता और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े थे, जबकि शोध कुछ समुदायों में लड़कियों के घरेलू हस्तशिल्प के काम की भूमिका भी दिखाता है।
चीन में पैर बाँधने की प्रथा का पता लगभग 10वीं सदी से मिलता है। छोटे पैर सुंदरता और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े थे, जबकि शोध कुछ समुदायों में लड़कियों के घरेलू हस्तशिल्प के काम की भूमिका भी दिखाता है। यह प्रथा हर जगह एक ही समय पर खत्म नहीं हुई। एक संदर्भ इसका अंत 1949 से जोड़ता है, जबकि अन्य विवरणों के अनुसार यह 20वीं सदी के मध्य तक धीरे धीरे लुप्त हुई।