चीन का चांग’ई-7 एक रोबोटिक चंद्र मिशन है। इसका काम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के वातावरण का सर्वेक्षण करना और स्थायी छाया वाले गड्ढों में पानी की बर्फ तलाशना है। मिशन को 2026 में वेनचांग से लॉन्ग मार्च-5 रॉकेट पर भेजने की तैयारी थी, लेकिन चीन ने कहा कि यह तय लॉन्च अवधि की शर्तें पूरी नहीं करता। सितंबर 2026 तक नई आधिकारिक लॉन्च तारीख घोषित नहीं की गई है।
1
मिशन में कौन-कौन से यान होंगे?
चांग’ई-7 चार तरह के अंतरिक्ष यानों के साथ काम करेगा: एक ऑर्बिटर, चंद्र सतह पर उतरने वाला लैंडर, वहां चलने वाला रोवर और एक छोटी उछलने वाली जांच। ये मिलकर ऊपर से पूरे क्षेत्र का अध्ययन करेंगे और सतह पर अलग-अलग जगहों की जांच करेंगे। छोटी जांच का मकसद उन छायादार इलाकों तक पहुंचना है जहां पहियों वाला रोवर नहीं जा सकेगा।
3
4
ऑर्बिटर दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र का सर्वेक्षण करेगा और सतह पर उतरने के संभावित इलाकों का आकलन करेगा। शैकलटन क्रेटर के आसपास की जगहों पर विचार हुआ है, लेकिन उतरने की अंतिम जगह सार्वजनिक रूप से तय नहीं की गई है।
1
5
12
मिशन में छह अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक उपकरण भी शामिल होने हैं। घोषित उपकरणों में कैमरे, रडार और पानी का विश्लेषण करने वाले यंत्र शामिल हैं; इनके साथ चंद्र सतह और वातावरण का अध्ययन करने वाले प्रयोग भी होंगे।
1
9
बर्फ की खोज कैसे होगी?
लैंडर एक ही जगह पर रहकर सतह का अध्ययन करेगा, जबकि रोवर आसपास के उन इलाकों की पड़ताल कर सकेगा जहां चलना संभव है। छोटी उछलने वाली जांच को अंधेरे गड्ढों और खाइयों तक जाने के लिए बनाया गया है, जहां साधारण रोवर के पहुंचने की उम्मीद नहीं होती। वहां इसके उपकरण पानी और अन्य उड़नशील पदार्थों के संकेत खोजेंगे।
3
9
इसमें अलग-अलग तरीकों से जुटाई गई जानकारी अहम होगी। ऑर्बिटर बड़े क्षेत्र की तस्वीर और परिस्थितियों का अंदाज़ा देगा; सतह पर मौजूद उपकरण स्थानीय हालात की जांच करेंगे; और उछलने वाली जांच ठंडे, छाया वाले हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश करेगी, जो बर्फ की तलाश के लिए खास दिलचस्प हैं। मिशन का उद्देश्य इन जगहों का सर्वेक्षण और परीक्षण करना है—पहले से यह मान लेना नहीं कि वहां आसानी से इस्तेमाल की जा सकने वाली बर्फ मिल ही जाएगी।
3
10
धूप और स्थायी छाया—दोनों क्यों अहम हैं?
चंद्रमा के ध्रुवों पर कुछ गड्ढों के तल तक सीधी धूप कभी नहीं पहुंचती। ऐसे स्थायी छाया वाले इलाके बेहद ठंडे होते हैं और वहां पानी की बर्फ या दूसरे उड़नशील पदार्थ लंबे समय तक टिके रह सकते हैं। चांग’ई-7 इन इलाकों में ऐसे पदार्थ मौजूद हैं या नहीं, यह जांचने के साथ आसपास के वातावरण का भी अध्ययन करेगा।
1
12
इसके पास की ऊंची जमीन पर धूप कहीं अधिक पड़ सकती है। इसलिए किसी गड्ढे के किनारे के आसपास उतरने की जगह वैज्ञानिक काम के लिए दो तरह के इलाके पास-पास मुहैया करा सकती है: सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों के लिए रोशनी वाली जमीन और जांच के लिए छायादार क्षेत्र। शैकलटन क्रेटर का किनारा संभावित जगहों में चर्चा में रहा है, लेकिन अंतिम स्थल की पुष्टि नहीं हुई है।
7
12
अगर बर्फ मौजूद हो, पर्याप्त मात्रा में हो और उस तक पहुंचकर उसे संसाधित करना व्यावहारिक हो, तो भविष्य की खोज में उसका उपयोगी महत्व हो सकता है। लेकिन बर्फ का पता चलना अपने-आप यह नहीं बताता कि वहां कितनी बर्फ है या उसे निकालना संभव होगा।
1
7
लॉन्च टलने का क्या मतलब है?
चीन ने चांग’ई-7 को 2026 में लॉन्च करने की तैयारी की थी। लेकिन 23 अगस्त को अधिकारियों ने बताया कि मिशन तय लॉन्च अवधि में उड़ान नहीं भर सकेगा, क्योंकि वह लॉन्च की शर्तें पूरी नहीं करता। सार्वजनिक घोषणा में नई तारीख नहीं दी गई; बाद की एक रिपोर्ट ने भी कहा कि कोई आधिकारिक नई तारीख घोषित नहीं हुई है।
इससे मिशन का समय बदला है, उसके घोषित वैज्ञानिक लक्ष्य नहीं। चांग’ई-7 की योजना अब भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का सर्वेक्षण करने और वहां के वातावरण, पानी की बर्फ तथा दूसरे संसाधनों का अध्ययन करने की है।
2
भविष्य की चंद्र योजनाओं में इसकी जगह
दक्षिणी ध्रुव का यह सर्वेक्षण चीन के 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के लक्ष्य और साझेदारों के साथ प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान केंद्र की योजना से जुड़ा है। नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम भी मानव खोज और लंबे समय तक मौजूदगी की तैयारी के तहत दक्षिणी ध्रुव पर ध्यान दे रहा है।
17
18
दोनों कार्यक्रमों के लिए यह जानना उपयोगी होगा कि वहां का भूभाग, संभावित संसाधन और काम करने की परिस्थितियां कैसी हैं। लेकिन रोबोटिक सर्वेक्षण और चंद्रमा पर बेस बनाना एक ही बात नहीं है: चांग’ई-7 के नतीजे भविष्य के फैसलों में मदद कर सकते हैं, मगर सुरक्षित पहुंच, संसाधनों की मात्रा और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल जैसे सवाल फिर भी बाकी रहेंगे।