सुविधा के साथ एक असहज सवाल
AI वियरेबल्स—यानी चश्मे, पिन या छोटे रिकॉर्डर जैसे शरीर पर पहने जाने वाले उपकरण—स्मार्टफोन से आगे की कंप्यूटिंग का रास्ता दिखाते हैं। वे तस्वीरें लेने, बातचीत रिकॉर्ड करने या आसपास की चीज़ों के बारे में AI से पूछने की सुविधा दे सकते हैं। लेकिन दुनिया को देखने-सुनने की यही क्षमता दूसरों के मन में यह सवाल भी उठाती है: क्या मुझे रिकॉर्ड किया जा रहा है, और क्या मुझे मना करने का कोई मौका है?
मेटा के Ray-Ban AI चश्मे इस खींचतान की मिसाल हैं। EssilorLuxottica ने बताया कि 2025 में ऐसे चश्मों के 70 लाख जोड़े बिके। फिर भी बिक्री के आंकड़े अपने-आप यह साबित नहीं करते कि लोग सार्वजनिक जगहों पर इन्हें सहजता से स्वीकार करते हैं। निजता को लेकर आपत्तियां, कुछ ठिकानों के प्रतिबंध और कानूनी मुकदमे इस तकनीक की सामाजिक स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करते हैं।
3
1
चश्मा पहनने वाले की मर्ज़ी, आसपास के लोगों की क्या?
उपयोगकर्ता तय कर सकता है कि कैमरा या माइक्रोफोन चालू करना है या नहीं। पास खड़े लोगों को अक्सर यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कुछ रिकॉर्ड हो रहा है या नहीं—और उनके लिए रिकॉर्डिंग से बाहर रहने का रास्ता भी साफ नहीं होता। छिपकर रिकॉर्डिंग की चिंताओं के चलते ब्रिटेन के कुछ ठिकानों ने स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। अमेरिका में एक मुकदमे में भी लोगों ने दावा किया है कि उनकी सहमति के बिना उन्हें रिकॉर्ड किया गया। ये आरोप हैं; अभी अदालत में साबित हुए निष्कर्ष नहीं।
1
5
मेटा का कहना है कि चश्मे पर लगी छोटी लाइट रिकॉर्डिंग का संकेत देती है। कंपनी के मुताबिक, लाइट ढक जाने पर कैमरा रिकॉर्डिंग रोक देता है; उसने लाइट के साथ छेड़छाड़ या उसे नुकसान पहुंचाने की स्थिति में भी कैमरा बंद करने की सुरक्षा जोड़ने की बात कही है।
8
10
लेकिन यह संकेत हर स्थिति में उतना साफ नहीं हो सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मॉडलों में कैमरे का इस्तेमाल करने वाली कुछ AI सुविधाएं—मसलन किसी जगह या पौधे की पहचान पूछना—रिकॉर्डिंग वाली लाइट जलाए बिना कैमरे का उपयोग कर सकती हैं। इससे आसपास मौजूद व्यक्ति के लिए यह समझना कठिन हो सकता है कि कैमरा कब काम कर रहा है।
7
एक अलग चिंता रिकॉर्डिंग के बाद डेटा के साथ क्या होता है, इसे लेकर है। मुकदमे के वादी आरोप लगाते हैं कि संवेदनशील फुटेज विदेश में काम करने वाले समीक्षकों तक पहुंचा। यह आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन इससे सवाल सिर्फ रिकॉर्डिंग दिखने या न दिखने तक सीमित नहीं रहता: डेटा कहां जाता है और उसे कौन देख सकता है, यह भी अहम है।
1
3
कैमरा न हो, या रिकॉर्डिंग जान-बूझकर शुरू हो
कुछ प्रतिस्पर्धी उत्पाद कैमरे के बजाय ऑडियो पर ध्यान देते हैं। कैमरा-रहित पिन और रिकॉर्डर चश्मों से जुड़ी दृश्य निगरानी की चिंता कम कर सकते हैं; वहीं बटन दबाकर रिकॉर्डिंग शुरू करना लगातार या अनजाने में कैप्चर होने की आशंका घटा सकता है। लेकिन माइक से रिकॉर्ड की गई बातचीत में भी दूसरों की जानकारी और सहमति मायने रखती है।
5
Plaud का उदाहरण लें: कंपनी के मुताबिक, उसका रिकॉर्डर ऑडियो को डिवाइस पर रखता है, जब तक उपयोगकर्ता उसे ट्रांसफर करने का विकल्प न चुने। साथ ही, वह क्लाउड स्टोरेज और AI से तैयार किए गए ट्रांसक्रिप्ट भी देता है। यानी कैमरा न होना या अपलोड को टालना अपने-आप में निजता का पूरा समाधान नहीं—डेटा कैसे संभाला जाता है, इसकी स्पष्ट जानकारी भी जरूरी है।
डिवाइस पर AI से मदद, पर पूरी गारंटी नहीं
जानकारी को डिवाइस पर ही प्रोसेस करने से क्लाउड तक जाने वाले डेटा की मात्रा घट सकती है। लेकिन कंपनियों को फिर भी बताना होगा कि क्या सेव होता है, क्या अपलोड किया जाता है और क्या इंसानी समीक्षा के लिए उपलब्ध हो सकता है। रिकॉर्डिंग का संकेत इतना स्पष्ट होना चाहिए कि आसपास के लोग भी उसे समझ सकें—भले ही उन्होंने वह डिवाइस खरीदा न हो।
9
14
कार्यालयों में मीटिंग नोट्स बनाने या बातचीत का सार तैयार करने जैसे उपयोग काम के हो सकते हैं। मगर कारोबारों को यह सुविधा कार्यस्थल की नीतियों, गोपनीय चर्चाओं और रिकॉर्ड किए जा रहे लोगों के प्रति जिम्मेदारियों के साथ तौलनी होगी।
4
फिलहाल स्मार्टफोन का विकल्प नहीं, उसके साथी
निकट भविष्य में AI वियरेबल्स उपयोगी, सीमित कामों के साथी बन सकते हैं—जैसे हाथ खाली रखकर इस्तेमाल होने वाले चश्मे या जान-बूझकर चालू किए जाने वाले मीटिंग रिकॉर्डर। लेकिन अभी उन्हें स्मार्टफोन का साबित विकल्प कहना जल्दबाजी होगी। असली कसौटी यह है कि कंपनियां इन उपकरणों को उपयोगी बनाते हुए आसपास के लोगों और ग्राहकों से सिर्फ निजता के आश्वासन पर भरोसा करने की अपेक्षा न करें।
1
2
8