विकासशील देशों का कहना था कि अगर AI का विकास और उसके मानक मुख्यतः अमीर देशों और कंपनियों के हाथ में रहे, तो उनकी जरूरतें पीछे छूट सकती हैं और वैश्विक असमानता बढ़ सकती है। AI से उत्पादकता और स्वास्थ्य, शिक्षा व दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की संभावना है; लेकिन नौकरियों, असमान पहुंच और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जता...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: At the September 2026 UN discussions on artificial intelligence, why did developing nations demand an equal say in designing AI and setting. Article summary: Developing nations argued that they should help design AI and write its rules because decisions made chiefly by wealthy countries and technology companies could leave poorer countries dependent on systems that do not mee. Topic tags: general web, ai safety, openai, prompt engineering, ai. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र की चर्चाओं में विकासशील देशों ने साफ कहा कि वे केवल दूसरे देशों में बनी AI तकनीक के उपयोगकर्ता या बाहर से तय किए गए मानकों के पालनकर्ता बनकर नहीं रहना चाहते। उनकी मांग थी कि AI कैसे बनेगा और उसके नियम क्या होंगे—इन फैसलों में उनकी भी सार्थक भागीदारी हो। 1
इस मांग के पीछे व्यावहारिक चिंता थी: अगर तकनीक और उसके नियमन पर नियंत्रण कुछ धनी देशों और बड़ी कंपनियों के पास केंद्रित रहा, तो AI स्थानीय जरूरतों के अनुरूप न हो सकता है और मौजूदा वैश्विक असमानता को और गहरा कर सकता है। 1
AI से उत्पादकता बढ़ाने और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है। विश्व बैंक के मुताबिक, विकासशील देशों के लिए बाजार में उपलब्ध AI को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक ढालना खास तौर पर अहम है। कम लागत वाले AI उपकरण सीमित संसाधनों वाले माहौल में भी उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन जोखिम भी हैं। विश्व बैंक ने चेताया कि AI कॉल सेंटर और सॉफ्टवेयर, वित्त तथा कारोबारी सेवाओं से जुड़ी शुरुआती स्तर की नौकरियों के अवसर घटा सकता है—ऐसे काम कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए रोजगार का रास्ता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी आगाह किया है कि AI के लाभ कुछ देशों और कंपनियों तक सीमित रहे, तो डिजिटल और आर्थिक खाई बढ़ सकती है।
AI केवल सॉफ्टवेयर का मामला नहीं है। इसे चलाने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करने के लिए भरोसेमंद बिजली, इंटरनेट और डिजिटल ढांचे की जरूरत पड़ती है। साथ ही, ऐसे लोगों की जरूरत है जो AI को बनाएं, स्थानीय संदर्भ के मुताबिक ढालें और जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकें। 7
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2.2 अरब लोग अब भी ऑफलाइन थे। वहीं, महासचिव की रिपोर्ट ने AI क्षमता बढ़ाने के लिए उपलब्ध वित्तपोषण के बिखरे होने और अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया। ऐसे अंतर बने रहें, तो जिन जगहों पर बिजली, कनेक्टिविटी या प्रशिक्षित कर्मचारी कम हैं, वहां AI से मिलने वाले फायदे भी सीमित रह सकते हैं।
ग्लोबल साउथ के कई नेताओं ने AI के साझा नियम बनाने में विकासशील देशों की आवाज़ को जरूरी बताया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाना जरूरी है, लेकिन जोखिमों से निपटने के लिए देशों के बीच वैश्विक समन्वय भी अनिवार्य है। 10 AI कंपनियों के कुछ नेताओं ने भी सरकारों से मिलकर सुरक्षा उपाय तय करने की अपील की।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इससे अलग था। उन्होंने AI को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को कम करके पेश किया, नए अंतरराष्ट्रीय नियंत्रणों का विरोध किया और “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” के बजाय “सुपर इंटेलिजेंस” नाम को बढ़ावा दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी इस क्षेत्र पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकते हैं। 13
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बहस का मूल सवाल इसलिए सिर्फ यह नहीं था कि AI कितनी तेजी से आगे बढ़ेगा। सवाल यह भी था कि उसके फायदे किसे मिलेंगे, जोखिमों का बोझ किस पर पड़ेगा और भविष्य के नियम बनाने में किन देशों की आवाज़ सुनी जाएगी।
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विकासशील देशों का कहना था कि अगर AI का विकास और उसके मानक मुख्यतः अमीर देशों और कंपनियों के हाथ में रहे, तो उनकी जरूरतें पीछे छूट सकती हैं और वैश्विक असमानता बढ़ सकती है।
विकासशील देशों का कहना था कि अगर AI का विकास और उसके मानक मुख्यतः अमीर देशों और कंपनियों के हाथ में रहे, तो उनकी जरूरतें पीछे छूट सकती हैं और वैश्विक असमानता बढ़ सकती है। AI से उत्पादकता और स्वास्थ्य, शिक्षा व दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की संभावना है; लेकिन नौकरियों, असमान पहुंच और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।
AI का लाभ उठाने के लिए भरोसेमंद बिजली, किफायती इंटरनेट, डिजिटल ढांचा और प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है—और वैश्विक नियमों पर देशों के बीच सहयोग भी।