ऊर्जा संकट का केंद्र अब सिर्फ़ कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं, बल्कि उसे उपयोगी ईंधन में बदलने और बाज़ार तक पहुँचाने की क्षमता भी है। कच्चा तेल और डीज़ल जुड़े हुए हैं, लेकिन एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते: कच्चे तेल को रिफाइनरी में संसाधित करने के बाद ही उससे डीज़ल, पेट्रोल या विमान ईंधन बनता है। इसलिए खाड़ी क्षेत्र और रूस में रिफाइनरी तथा निर्यात प्रभावित हों, तो कच्चे तेल का प्रवाह सुधरने पर भी डीज़ल की आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होती। अगस्त में खाड़ी देशों और रूस का संयुक्त डीज़ल और गैसऑयल निर्यात फरवरी से 1.6 million barrels per day कम था।
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कच्चे तेल की उपलब्धता से डीज़ल की कमी अपने-आप क्यों नहीं मिटती?
ईरान संघर्ष ने मध्य पूर्व में रिफाइनरियों के कामकाज और टैंकरों की आवाजाही को बाधित किया है। रूस की रिफाइनरियों को हुए नुकसान और रूसी ईंधन निर्यात पर लगी पाबंदियों ने भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए उपलब्ध डीज़ल घटाया है।
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दूसरी रिफाइनरियों के पास इस कमी को पूरा करने की अतिरिक्त क्षमता सीमित है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, अगस्त में दुनिया भर की रिफाइनरियों का कुल प्रसंस्करण एक साल पहले के मुकाबले 4.2 million barrels per day कम था। इस गिरावट में मध्य पूर्व, रूस और एशिया के कुछ हिस्सों का योगदान था।
6 अगर कच्चे तेल का निर्यात रिफाइनरी संचालन और तैयार ईंधन की खेपों से पहले सुधरता है, तो अतिरिक्त कच्चा तेल तुरंत अतिरिक्त डीज़ल में नहीं बदल जाएगा।
कम भंडार और सीमित रिफाइनरी क्षमता का दोहरा दबाव
आपूर्ति बाधित होने पर भंडार कुछ राहत दे सकता है, लेकिन यह सहारा भी कम हो रहा है। यूरोप के एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र में डीज़ल का भंडार सितंबर में उस मौसम के लिए अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया।
18 अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) का अनुमान है कि अमेरिका में डीज़ल समेत डिस्टिलेट ईंधनों का भंडार 2027 के बड़े हिस्से तक पिछले पाँच साल के न्यूनतम स्तर से नीचे रह सकता है।
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जब रिफाइनरी की अतिरिक्त क्षमता कम हो और भंडारण में ईंधन भी घट रहा हो, तो छूटी हुई आपूर्ति की भरपाई के विकल्प कम रह जाते हैं। रिफाइनरियों को अलग-अलग उत्पादों के बीच उत्पादन का संतुलन भी बनाना पड़ता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दबाव में रिफाइनर डीज़ल और कुछ अन्य उत्पादों को जहाज़ों तथा बिजलीघरों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल ऑयल से ज़्यादा प्राथमिकता दे रहे थे—इससे उन बाज़ारों पर भी दबाव बढ़ा।
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रिफाइनिंग मार्जिन क्या बताते हैं?
क्रैक स्प्रेड कच्चे तेल और उससे बने परिष्कृत ईंधन की कीमतों के बीच का अंतर है। जब डीज़ल के दाम कच्चे तेल से तेज़ बढ़ते हैं, तो यह अंतर चौड़ा होता है। इससे संकेत मिलता है कि समस्या सिर्फ़ कच्चे तेल की कीमत नहीं, बल्कि उसे संसाधित करने की क्षमता या तैयार ईंधन की उपलब्धता में भी है।
17 मौजूदा बाधाओं पर रिपोर्टिंग में रिकॉर्ड ऊँचे रिफाइनिंग मार्जिन और परिष्कृत ईंधनों की तेज़ी से बढ़ती कीमतों का ज़िक्र है।
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इसका मतलब यह नहीं कि कच्चे तेल के दाम अप्रभावित हैं: मध्य पूर्व में आपूर्ति और जहाज़रानी की बाधाओं ने उन्हें भी ऊपर धकेला है। लेकिन डीज़ल पर दबाव ज़्यादा तीखा हो सकता है, क्योंकि इसकी उपलब्धता कच्चे तेल के उत्पादन के साथ-साथ चालू रिफाइनरियों, पर्याप्त भंडार और भरोसेमंद परिवहन पर भी निर्भर करती है।
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माल ढुलाई और महँगाई पर क्या असर पड़ सकता है?
परिवहन और खेती में डीज़ल एक अहम लागत है; ईंधन की लागत विनिर्माण को भी प्रभावित करती है। जहाज़ों के ईंधन की तंग आपूर्ति माल ढुलाई महँगी कर सकती है।
20 कारोबार अपने बढ़े हुए परिचालन खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुँचा सकते हैं, लेकिन उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि ऐसा कितना होगा या महँगाई पर कुल असर कितना पड़ेगा।
इसलिए आगे भी तंगी बने रहने का जोखिम है, लेकिन इससे कीमतों का कोई निश्चित रास्ता तय नहीं होता। IEA ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल का सामान्य प्रवाह 2027 तक टल रहा है; दूसरी रिपोर्टिंग के मुताबिक डीज़ल की कमी अगले साल तक रह सकती है।
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2 राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि बाधित रिफाइनरी उत्पादन और निर्यात कब सुधरते हैं, जहाज़रानी कितनी सामान्य होती है और भंडार फिर से कितना भरता है—सिर्फ़ कच्चे तेल का निर्यात बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा।