MIT की मशीन लर्निंग प्रणाली ने कम संख्या में प्रयोगों के डेटा के आधार पर mRNA ले जाने वाले लिपिड नैनोपार्टिकल्स के फ़ॉर्मूले और घटकों के अनुपात बेहतर करने में मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयोगात्मक फ़ॉर्मूले ने कमरे के तापमान पर एक साल और लगभग 37°C पर दो महीने तक सक्रियता बनाए रखी। चूहों में परीक्षण के बाद प्रतिरक्...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did MIT researchers use a small data machine learning algorithm to identify FDA approved stabilizing ingredients and optimize their rati. Article summary: MIT researchers used a data efficient machine learning approach to select stabilizing ingredients and tune their proportions around the lipid nanoparticles that carry mRNA, rather than relying on a large trial and error . Topic tags: general web, ai, workflow, productivity, code. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, chart
MIT शोधकर्ताओं ने mRNA वैक्सीन को ढोने वाले लिपिड नैनोपार्टिकल्स (LNPs) के फ़ॉर्मूले को बेहतर करने के लिए कम डेटा पर काम करने वाला मशीन-लर्निंग तरीका अपनाया। हर बार हज़ारों संभावित मिश्रणों को आज़माने के बजाय, एल्गोरिदम ने सीमित प्रयोगों के नतीजों से सीखकर अगले फ़ॉर्मूले और घटकों के अनुपात चुनने में मदद की। 10
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LNPs में लिपिड घटक mRNA को कोशिकाओं तक पहुँचाने में मदद करते हैं। शोधकर्ताओं ने इनके आसपास के फ़ॉर्मूले को बदलकर गर्मी में स्थिरता बेहतर करने की कोशिश की। मशीन-लर्निंग प्रणाली ने छोटे प्रयोगात्मक डेटा से अगली जाँच के लिए विकल्प सुझाए, जिससे बड़े पैमाने पर केवल अनुमान के आधार पर परीक्षण करने की ज़रूरत घट सकती है। 10
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उपलब्ध स्रोत स्थिरकारी घटकों के सटीक नाम और उनके अनुपातों की पुष्टि नहीं करते। इसलिए यह निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है कि कौन-से FDA-अनुमोदित घटक चुने गए या उनका सटीक मिश्रण क्या था।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रयोगात्मक फ़ॉर्मूले ने कमरे के तापमान पर एक साल तक और लगभग 37°C (98°F) पर दो महीने तक सक्रियता बनाए रखी। 10
14 जब इस तरह तैयार COVID-19 वैक्सीन को चूहों में परखा गया, तो उससे बनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया Moderna जैसी mRNA वैक्सीन से मिली प्रतिक्रिया जितनी मज़बूत बताई गई।
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शोधकर्ताओं ने फ़ॉर्मूले को माइक्रोनीडल पैच के ज़रिये देने की संभावना भी दिखाई। ऐसे पैच त्वचा पर लगाए जाते हैं और इनमें बहुत छोटे सुई-जैसे उभार दवा पहुँचाते हैं। रिपोर्ट में इस तरीके को अलग-अलग वैक्सीन फ़ॉर्मूले और mRNA पेलोड के लिए संभावित रूप से उपयोगी बताया गया है; लेकिन उपलब्ध जानकारी हर संयोजन के लिए अलग, पक्के परीक्षण-नतीजे नहीं देती। 10
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अगर आगे के अध्ययन और मनुष्यों में परीक्षण इन नतीजों की पुष्टि करते हैं, तो mRNA वैक्सीन को हर समय बहुत ठंडा रखने पर निर्भरता घट सकती है। इससे उन जगहों पर भंडारण और वितरण आसान होने की संभावना है जहाँ ठंडे तापमान वाली आपूर्ति-व्यवस्था सीमित है। 10
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फिर भी, ये पशुओं में किए गए शुरुआती परीक्षण हैं। इनसे यह साबित नहीं होता कि कोई स्वीकृत वैक्सीन मनुष्यों में भी इसी तरह सुरक्षित और प्रभावी रहेगी, या उसकी वास्तविक शेल्फ लाइफ़ इतनी ही होगी।
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MIT की मशीन लर्निंग प्रणाली ने कम संख्या में प्रयोगों के डेटा के आधार पर mRNA ले जाने वाले लिपिड नैनोपार्टिकल्स के फ़ॉर्मूले और घटकों के अनुपात बेहतर करने में मदद की।
MIT की मशीन लर्निंग प्रणाली ने कम संख्या में प्रयोगों के डेटा के आधार पर mRNA ले जाने वाले लिपिड नैनोपार्टिकल्स के फ़ॉर्मूले और घटकों के अनुपात बेहतर करने में मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयोगात्मक फ़ॉर्मूले ने कमरे के तापमान पर एक साल और लगभग 37°C पर दो महीने तक सक्रियता बनाए रखी। चूहों में परीक्षण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की तुलना ताज़ा mRNA वैक्सीन से की गई। [10][13][14]
फ़ॉर्मूले को माइक्रोनीडल पैच के ज़रिये देने की भी रिपोर्ट है। हालांकि, उपलब्ध स्रोत हर वैक्सीन फ़ॉर्मूले और mRNA प्रकार के लिए अलग अलग नतीजे स्थापित नहीं करते। [10][14]