ट्रंप प्रशासन के पहले प्रस्ताव के मुताबिक, 2031 में नई कारों और हल्के ट्रकों के पूरे बेड़े का औसत ईंधन-दक्षता लक्ष्य 50.4 से घटकर करीब 34.5 मील प्रति गैलन हो सकता है। यह 15.9 मील प्रति गैलन, यानी लगभग 32% की कमी है। अमेरिकी माप में एक मील प्रति गैलन (mpg) का अर्थ है कि वाहन एक गैलन ईंधन में कितनी दूरी तय करता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नए मानकों को मंजूरी दी है, लेकिन उस समय रिपोर्टों में अंतिम नियम के सटीक आंकड़े स्पष्ट नहीं थे। इसलिए 34.5 mpg को प्रस्ताव का लक्ष्य समझना चाहिए, पक्का अंतिम आंकड़ा नहीं।
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यह लक्ष्य असल में किस पर लागू होता है?
यह बेड़ा-औसत है—यानी वाहन निर्माता की कारों और हल्के ट्रकों के पूरे समूह का नियामकीय औसत। इसका मतलब यह नहीं कि हर अलग गाड़ी को सड़क पर चलाते समय ठीक 34.5 mpg देना होगा। यदि अंतिम नियम पहले के प्रस्ताव से मिलता-जुलता रहा, तो वाहन निर्माताओं के लिए तय औसत लक्ष्य बाइडन-काल के मानक से काफी नीचे होगा।
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प्रशासन क्या वजह बता रहा है?
ट्रंप ने बाइडन-काल के नियमों को प्रभावी रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने का दबाव बताया है। उनका कहना है कि मानक ढीले करने से नई गाड़ियों की लागत घटेगी और कंपनियों को खरीदारों की पसंद के मुताबिक वाहन बनाने की अधिक गुंजाइश मिलेगी। ये प्रशासन के बताए तर्क हैं—इसका यह अर्थ नहीं कि हर मॉडल की शोरूम कीमत जरूर कम होगी।
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यह बदलाव इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बिक्री को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां पलटने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। फरवरी में प्रशासन ने एक ऐसा नियम भी वापस लेने की बात कही थी, जो अनुपालन की गणना में इलेक्ट्रिक वाहनों के ईंधन-दक्षता मूल्य को प्रभावित करता था।
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कम शुरुआती कीमत, लेकिन पेट्रोल पर अधिक खर्च?
परिवहन विभाग के अनुमानों के अनुसार, कमजोर मानकों से नई गाड़ियों की शुरुआती लागत घट सकती है, लेकिन लंबे समय में ईंधन की खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बढ़ेगा। खरीदारों के लिए इसका सीधा मतलब संभावित अदला-बदली है: गाड़ी खरीदते समय कुछ बचत, लेकिन समय के साथ पेट्रोल पर अधिक खर्च। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी गाड़ी चुनी गई है और उसे कितना चलाया जाता है।
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पहले के प्रस्ताव के अनुमान में वाहन की शुरुआती लागत में औसतन करीब 930 डॉलर की कमी और 2050 तक ईंधन की खपत में लगभग 100 अरब गैलन की वृद्धि का हिसाब दिया गया था। ये प्रस्ताव से जुड़े अनुमान हैं, हर खरीदार के लिए तय नतीजे नहीं।
पर्यावरण समूह क्यों कर रहे हैं विरोध?
ईंधन-दक्षता के नियम वाहन निर्माताओं को कम पेट्रोल खर्च करने वाली गाड़ियां बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। लक्ष्य ढीला होने से यह दबाव कम पड़ सकता है; परिवहन विभाग के अपने अनुमानों में भी प्रस्ताव के तहत ईंधन खपत और उत्सर्जन बढ़ने की बात है। सिएरा क्लब ने बदलाव की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे अमेरिकियों के लिए परिवहन महंगा हो सकता है।
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इसलिए सवाल सिर्फ इतना नहीं कि डीलरशिप पर गाड़ी कुछ सस्ती होगी या नहीं। असली तुलना यह है कि खरीद के समय की संभावित बचत, आगे चलकर बढ़े ईंधन खर्च और प्रदूषण के असर से बड़ी होगी या नहीं। इस हिसाब का जवाब अंतिम नियम की शर्तों पर भी निर्भर करेगा।
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