‘हाइब्रिड युद्ध’ शब्द आम तौर पर ऐसे दबाव के लिए इस्तेमाल होता है जो पारंपरिक युद्ध से नीचे के स्तर पर हो—जैसे तोड़फोड़, साइबर हमले या दुष्प्रचार। लेकिन जब ड्रोन सीमाएं पार करके गिरते या विस्फोट करते हैं, तो कुछ यूरोपीय अधिकारियों को लगता है कि यह शब्द खतरे के प्रत्यक्ष और भौतिक असर को कम करके दिखाता है। यह घटनाओं को कैसे समझा जाए, इस पर बहस है; इससे यह साबित नहीं होता कि हर ड्रोन जानबूझकर किसी नाटो देश को निशाना बना रहा था या मॉस्को ने हर घटना का आदेश दिया था।
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‘हाइब्रिड’ शब्द पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
यूरोपीय सरकारें और समाचार माध्यम अब भी इस शब्द का व्यापक इस्तेमाल करते हैं। इसके आलोचकों का कहना है कि हवाई क्षेत्र का उल्लंघन, ड्रोन का गिरना और संदिग्ध तोड़फोड़ जैसी घटनाओं के ठोस नतीजे होते हैं, जिन्हें ‘हाइब्रिड’ कहने भर से पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। फर्क अहम है: कोई घटना खतरनाक हो सकती है, भले ही उसकी मंशा या जिम्मेदारी अभी तय न हुई हो।
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यूरोपीय नेताओं और विश्लेषकों ने इन घटनाओं के व्यापक सिलसिले को यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों पर दबाव डालने और नाटो की एकजुटता को परखने की संभावित कोशिश बताया है। यह रूस के इरादों का आकलन है—इस बात का प्रमाण नहीं कि गठबंधन पर सीधा हमला आसन्न है।
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रोमानिया और मोल्दोवा की घटनाएं क्या बताती हैं?
यूक्रेन पर 24 सितंबर को हुए रूसी हमले के दौरान मोल्दोवा की राष्ट्रपति ने कहा कि चार ड्रोन देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए और कम-से-कम एक में विस्फोट हुआ। रोमानिया ने बताया कि एक हवाई यान उसके हवाई क्षेत्र में आने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ; उसने एफ-16 लड़ाकू विमान भी उड़ाए। हमले के दौरान पोलैंड ने भी सैन्य विमान तैनात किए। ये घटनाएं दिखाती हैं कि यूक्रेन में जारी लड़ाई सीमा पार जोखिम पैदा कर सकती है—लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि हर हवाई सीमा उल्लंघन जानबूझकर किया गया था।
दोनों देशों की स्थिति अलग है: रोमानिया नाटो का सदस्य है, जबकि मोल्दोवा नहीं। 24 सितंबर की दुर्घटना के लिए रोमानियाई अधिकारियों ने सीधे रूस को जिम्मेदार नहीं ठहराया, जबकि मोल्दोवा के अधिकारियों ने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ को रूसी बताया। अलग रिपोर्टों में रोमानिया द्वारा पहले एक विस्फोटक ले जा रहे ड्रोन को समुद्र के निकट गैस प्लेटफॉर्म के पास मार गिराने का भी उल्लेख है—यह दिखाता है कि हर घटना पर प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होती।
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डेनमार्क की चेतावनी में क्या था—और क्या नहीं?
डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा ने आकलन दिया कि रूस की शत्रुतापूर्ण गतिविधियां अधिक बार हो सकती हैं। उसने सीमित सैन्य हमले का कम, लेकिन बढ़ता हुआ जोखिम भी बताया और कहा कि रूस का मकसद नाटो को बांटना है। यह चेतावनी तनाव बढ़ने और गठबंधन की एकजुटता पर चिंता जताती है; यह नहीं कहती कि व्यापक युद्ध शुरू हो चुका है। रूस ने हाइब्रिड हमलों और तोड़फोड़ में शामिल होने से इनकार किया है।
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नाटो महासचिव मार्क रूटे ने कहा है कि गठबंधन के पास तोड़फोड़ और ड्रोन की घटनाओं से निपटने की योजनाएं हैं। वहीं, बार-बार लड़ाकू विमानों को उड़ाना यह भी दिखाता है कि हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का जवाब देना और अहम ढांचे की सुरक्षा करना कितना चुनौतीपूर्ण है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है।
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भूमध्यसागर से जुड़े खतरे की खबर अभी पुष्टि नहीं है
द गार्जियन में उद्धृत एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन, फ्रांस और इटली को अगले साल भूमध्यसागर से संभावित रूसी ड्रोन हमले के बारे में चेतावनी दी गई थी। उपलब्ध जानकारी इसे एक संभावित खतरे को लेकर दी गई चेतावनी के रूप में पेश करती है—न कि किसी पुष्ट रूसी अभियान या हो चुके हमले के रूप में।
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कुल तस्वीर गंभीर है, लेकिन अनिश्चित भी। यूरोपीय अधिकारी घटनाओं के इस सिलसिले को नाटो की तैयारी और एकता की परीक्षा मानते हैं, जबकि हर घटना की परिस्थितियां और जिम्मेदारी अलग-अलग हैं। ‘हाइब्रिड’ शब्द इन गतिविधियों के पारंपरिक युद्ध से नीचे रहने की प्रकृति बताता है; आलोचकों की चिंता है कि यह शब्द उनके बढ़ते भौतिक असर को ओझल न कर दे।
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