25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक का मकसद अगली महामारी से निपटने की तैयारियों के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाना था। लेकिन प्रस्तावित घोषणा पर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने समर्थन नहीं दिया, इसलिए सदस्य देश साझा सहमति तक नहीं पहुंच सके। यह घोषणा राजनीतिक संकल्प थी, देशों पर लागू होने वाले कानूनी नियम नहीं।
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आपत्ति किस बात पर थी?
यूरोपीय संघ ने कहा कि मसौदा बौद्धिक संपदा से जुड़ी उसकी सीमाओं—जिन्हें उसने अपनी ‘रेड लाइन’ बताया—के खिलाफ जाता है।
1 इस विवाद की पृष्ठभूमि में एक पुराना सवाल है: महामारी से जुड़े उत्पाद बनाने की तकनीक साझा करने की शर्तें क्या हों? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अलग महामारी समझौते पर 2025 की बातचीत में तकनीक का हस्तांतरण स्वैच्छिक और दोनों पक्षों की सहमति से तय शर्तों पर होने का मुद्दा विवाद का कारण बना था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी यह साबित नहीं करती कि तब विवादित हर प्रावधान संयुक्त राष्ट्र की 2026 की घोषणा में भी था।
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अमेरिका ने भी कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र के मसौदे का पूरा समर्थन नहीं कर सकता। उसके प्रतिनिधि के अनुसार कुछ ‘महत्वपूर्ण मुद्दे’ बाकी थे, लेकिन उपलब्ध उद्धरण यह नहीं बताता कि वे मुद्दे क्या थे।
10 इसलिए अमेरिका और यूरोपीय संघ की आपत्तियों को एक जैसा बताना, या अमेरिका की ओर से कोई विशिष्ट वैचारिक तर्क मान लेना, उपलब्ध साक्ष्य से आगे जाना होगा।
अब क्या हो सकता है?
25 सितंबर की रिपोर्टिंग के मुताबिक घोषणा बाद में, संभवतः दिसंबर में, संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान के लिए आ सकती है। यह संभावना है, घोषणा स्वीकार होने का फैसला नहीं।
10 फिलहाल सहमति न बनने का सीधा असर महामारी तैयारी पर एकजुट राजनीतिक संदेश को लगा है; इससे कोई कानूनी रूप से लागू महामारी-दायित्व रद्द नहीं हुआ।
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मसौदे में अधिक वित्तपोषण, प्रयोगशालाओं की क्षमता, देशों के बीच तालमेल और दवाओं व टीकों तक बेहतर पहुंच की बात थी।
5 तकनीक और उत्पादों तक पहुंच उन देशों के लिए खास मायने रखती है जिनकी अपनी उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं है। लेकिन उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि कोविड काल में टीकाकरण की असमानता के लिए अकेले बौद्धिक संपदा नियम कितने जिम्मेदार थे।
WHO के महामारी समझौते से इसका क्या संबंध है?
संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा और WHO का महामारी समझौता दो अलग पहल हैं। WHO का समझौता मई 2025 में अपनाया गया था, लेकिन रोगजनकों के नमूने साझा करने और बदले में उनसे विकसित टीकों, जांच साधनों तथा उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करने वाले अनुबंध पर सहमति अभी बाकी थी।
3 संयुक्त राष्ट्र की घोषणा पर गतिरोध उस बातचीत का फैसला नहीं करता। हालांकि, दोनों बहसें दिखाती हैं कि सबके लिए समान पहुंच के वादे को साझा नियमों में बदलना कितना कठिन है।
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