सऊदी अरामको की प्रतिक्रिया तीन हिस्सों में रही: क्षतिग्रस्त ईस्ट–वेस्ट पाइपलाइन में पंपिंग बहाल करना, खाड़ी के रास्ते अधिक तेल भेजना और ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक शिपिंग व्यवस्था करना। यह पाइपलाइन पूर्वी सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है। 13 सितंबर को ड्रोन हमलों के बाद इसे बंद करना पड़ा और यानबू से कच्चे तेल का लदान रुक गया।
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पाइपलाइन चली, पर यानबू से निर्यात नहीं
22 सितंबर को पाइपलाइन कम दर पर फिर चालू हुई। उस दिन सूत्रों ने संभावना जताई थी कि यानबू से निर्यात जल्द शुरू हो सकता है। लेकिन 24 सितंबर की जानकारी अधिक स्पष्ट थी: पाइपलाइन में पंप किया जा रहा तेल बढ़ रहा था, जबकि यानबू में टैंकरों पर लदान अभी शुरू नहीं हुआ था। यानी पाइपलाइन का चालू होना, बंदरगाह से निर्यात सामान्य होने के बराबर नहीं था।
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मरम्मत के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से को बाइपास करके कुछ दिनों में लगभग आधी क्षमता और करीब छह सप्ताह में पूरी क्षमता लौटाने का लक्ष्य बताया गया था। बाद में रॉयटर्स ने एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से पूर्ण बहाली में छह से आठ सप्ताह लगने का अनुमान दिया। ये अनुमान थे, हासिल की जा चुकी बहाली के आँकड़े नहीं। रॉयटर्स के अनुसार तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए थे—शुरुआती आकलन से एक अधिक।
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ग्राहकों तक तेल पहुँचाने के दूसरे रास्ते
शिपिंग आँकड़ों के मुताबिक, अरामको ने 20 सितंबर को खाड़ी में सात बड़े टैंकरों पर करीब 1.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल लादा। अलग से, व्यापार सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सितंबर और अक्टूबर में रास तनूरा से आने वाले करीब 6 करोड़ बैरल तेल को ओमान के सोहार में एक जहाज़ से दूसरे में स्थानांतरित करने के लिए बेचा गया था। यह बिक्री और आगे के लदान की व्यवस्था थी; इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा तेल ग्राहकों तक पहुँच चुका था।
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एक अन्य रिपोर्ट में व्यापारियों के हवाले से कहा गया कि अरामको ने सितंबर के मध्य से एशियाई खरीदारों को अक्टूबर–नवंबर में आपूर्ति के लिए करीब 10 करोड़ बैरल तेल बेचा। इस बिक्री, सोहार वाली व्यवस्था और टैंकरों पर पहले से लादे गए तेल के आँकड़ों को जोड़ना गलत होगा: ये कारोबार और ढुलाई के अलग-अलग चरण बताते हैं और इनके बीच कितना दोहराव है, यह स्पष्ट नहीं है।
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आगे क्या देखना होगा?
अरामको के मुख्य कार्यकारी अमीन नासिर ने बाधित परिचालन को ‘कुछ दिनों में’ बहाल कर सकने की क्षमता की बात कही और चौथे तथा पाँचवें निर्यात मार्ग के अध्ययन का ज़िक्र किया। इसे मौजूदा पाइपलाइन की पूरी मरम्मत हो जाने की पुष्टि नहीं मानना चाहिए; प्रस्तावित मार्गों की मंज़िल और शुरू होने की तारीख भी स्पष्ट नहीं थी।
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22 सितंबर को सऊदी तेल का प्रवाह बढ़ने और पाइपलाइन फिर चलने के बीच तेल की कीमतें गिरीं। फिर भी खाड़ी से अधिक शिपमेंट या सोहार के जरिए स्थानांतरण से यह साबित नहीं होता कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही सामान्य हो गई है। 24 सितंबर तक सबसे अहम अधूरा कदम यानबू से टैंकर लदान की बहाली था।
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तारीखों पर एक सावधानी: कुछ सैटेलाइट तस्वीरों के विवरण में हमले की तारीख 11 सितंबर दी गई है, जबकि पाइपलाइन बंद होने की रिपोर्ट 13 सितंबर की है। दोनों तारीखों को एक ही घटना का निश्चित समय मानकर नहीं पढ़ना चाहिए।
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