चाँद की इन दो जगहों से वैज्ञानिकों को दो अलग समय की जानकारी मिल रही है। डिवार क्षेत्र की जाँच चाँद के लगभग 4.2 अरब वर्ष पुराने भीतरी इतिहास से जुड़ी है। मैकगेटचिन क्रेटर एक हालिया टक्कर को समझने का मौका देता है, जिसकी समय-सीमा तस्वीरों से तय की जा सकी है।
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डिवार में दबा पिंड कैसे पहचाना गया?
चाँद के उस हिस्से में, जो हमेशा पृथ्वी से दूर की ओर रहता है, शोधकर्ताओं ने कक्षा में मौजूद यानों से मिले गुरुत्वीय और चुंबकीय मापों की तुलना की। दोनों में एक ही इलाके पर दिखने वाली असामान्यताओं का मॉडल बनाकर उन्होंने जमीन के नीचे एक घने, चुंबकित पिंड की व्याख्या की। उनके अनुसार यह संभवतः कभी पिघली हुई ज्वालामुखीय चट्टान थी, जो बाद में ठोस हो गई। यह पहचान वहाँ से लाए गए नमूने की जाँच पर आधारित नहीं है।
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यदि यह व्याख्या सही है, तो चट्टान में दर्ज चुंबकत्व इस बात का स्वतंत्र संकेत है कि लगभग 4.2 अरब वर्ष पहले चाँद के भीतर चुंबकीय क्षेत्र पैदा करने वाली प्रक्रिया सक्रिय थी। लेकिन उस समय क्षेत्र की ताकत और चट्टान की उम्र मॉडल से निकाले गए अनुमान हैं—आज मौजूद किसी चंद्र चुंबकीय क्षेत्र का प्रत्यक्ष माप नहीं। उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर डिवार के लिए ताकत का कोई भरोसेमंद संख्यात्मक आँकड़ा तय नहीं होता।
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इसकी अहमियत इसलिए भी है कि अपोलो मिशनों से लाई गई चट्टानों ने चाँद के पुराने चुंबकीय क्षेत्र की ताकत और अवधि को लेकर अलग-अलग संकेत दिए हैं। नए नमूना-विश्लेषण से भी यह संभावना सामने आई है कि बहुत मजबूत चुंबकीय दौर अपवाद रहे हों, जबकि अधिकांश समय क्षेत्र कमजोर रहा हो। डिवार का दबा पिंड पुरानी पहेली में एक अलग तरह का साक्ष्य जोड़ता है, पर यह अपने आप नहीं बताता कि क्षेत्र लगातार सक्रिय था या बीच-बीच में मजबूत हुआ। आगे के कक्षीय माप और दूरवर्ती हिस्से से मिले, सटीक उम्र वाले नमूने इस निष्कर्ष को परख सकते हैं।
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मैकगेटचिन: नया गड्ढा, उससे बड़ा प्रभाव
मैकगेटचिन बनाने वाली टक्कर 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच हुई। 2025 में नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर की तस्वीरों की नियमित जाँच के दौरान रॉबर्ट वैगनर को गहरे घेरे वाला एक चमकीला धब्बा दिखा। पुरानी तस्वीरों से तुलना करने पर लगभग 222 मीटर चौड़ा और 43 मीटर गहरा नया क्रेटर सामने आया—सौरमंडल में अब तक पहचाने गए नए बने क्रेटरों में सबसे बड़ा। चमकीला धब्बा स्वयं गड्ढा नहीं, बल्कि टक्कर से बाहर उछली सामग्री है।
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तापीय मापों में क्रेटर के आसपास की जमीन असामान्य रूप से ठंडी मिली। इससे पता चलता है कि टक्कर ने केवल गड्ढा नहीं खोदा; उसने आसपास की ढीली चंद्र मिट्टी, जिसे रेगोलिथ कहते हैं, को भी कहीं बड़े क्षेत्र में प्रभावित किया। ऐसी मिट्टी के ढीली पड़ने पर उसकी गर्मी सँभालने की क्षमता बदल सकती है। आगे की तस्वीरें और तापमान माप बताएँगे कि यह ठंडा इलाका समय के साथ कैसे बदलता है। क्रेटर और उससे निकली सामग्री नीचे की परतों को समझने का अवसर भी देते हैं, हालांकि ठंडे क्षेत्र की सटीक वजह और उसके बने रहने की अवधि अभी जाँच के विषय हैं।
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