जिस व्यक्ति के लिए फोन खरीदना ही इंटरनेट इस्तेमाल करने की सबसे बड़ी बाधा हो, उसके लिए चिप की बढ़ती कीमत मामूली बात नहीं है। मोबाइल उद्योग संगठन जीएसएमए का कहना है कि एआई डेटा सेंटरों की मांग से मेमोरी और अन्य चिप की लागत बढ़ रही है, और इसका असर शुरुआती कीमत वाले स्मार्टफोन पर दिखने लगा है।
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महंगी मेमोरी का असर सस्ते फोन पर ज्यादा क्यों?
एआई प्रणालियों के लिए अधिक क्षमता वाली मेमोरी की मांग बढ़ने पर चिप निर्माता ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे उपभोक्ता उपकरणों में लगने वाली पारंपरिक मेमोरी की आपूर्ति तंग हुई है। जीएसएमए के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्टों में उद्धृत काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, मेमोरी की कीमतें 2025 की तीसरी तिमाही से 2026 की पहली तिमाही के बीच दोगुने से अधिक हुईं और दूसरी तिमाही में फिर 80–90% बढ़ीं। ये चिप की कीमतों में बदलाव हैं, फोन की दुकान में बिकने वाली कीमतों में उतनी ही बढ़ोतरी नहीं।
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200 डॉलर से कम कीमत वाले फोन पर लागत का दबाव सबसे ज्यादा है। आईडीसी के मुताबिक, सबसे सस्ते फोन बनाने में लगने वाले पुर्जों की कुल लागत में अब मेमोरी का हिस्सा 65% से अधिक है। ऐसे में निर्माता कम मुनाफा स्वीकार कर सकते हैं, फोन की बनावट या पुर्जे बदल सकते हैं, या कीमत बढ़ा सकते हैं।
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बाजार के आंकड़े क्या कहते हैं?
आईडीसी ने अगस्त 2026 में अनुमान लगाया था कि इस साल दुनिया भर में स्मार्टफोन की आपूर्ति 16.7% घटकर एक अरब से कुछ अधिक फोन रह जाएगी। सीएनबीसी की रिपोर्ट में दिए आईडीसी के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में 100 डॉलर से कम कीमत वाले फोन की आपूर्ति एक साल पहले के मुकाबले लगभग 60% गिरी। यह एक तिमाही और एक खास मूल्य-श्रेणी का आंकड़ा है; इसे 200 डॉलर से कम कीमत वाले सभी फोन का पूर्वानुमान नहीं समझना चाहिए।
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आईडीसी को कम-से-कम 2028 तक मेमोरी की कीमतें बढ़ने की आशंका है। लेकिन उपलब्ध अनुमानों से यह तय नहीं होता कि 2030 में कितने स्मार्टफोन भेजे जाएंगे या मेमोरी की लागत के कारण कितने लोग इंटरनेट से वंचित रहेंगे।
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उप-सहारा अफ्रीका में दांव पर क्या है?
2025 के अंत में उप-सहारा अफ्रीका की सबसे कम आय वाली 20% आबादी के लिए शुरुआती कीमत वाला इंटरनेट-सक्षम फोन उसकी औसत मासिक आय के 76% के बराबर था। इसलिए नेटवर्क कवरेज होने पर भी फोन का महंगा होना लोगों के इंटरनेट अपनाने में देरी कर सकता है। जीएसएमए ने अपने सर्वेक्षण में शामिल निम्न और मध्यम आय वाले देशों में फोन की कीमत को मोबाइल इंटरनेट अपनाने की सबसे बड़ी बाधा बताया है।
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मार्च 2026 में जीएसएमए ने छह अफ्रीकी देशों में किफायती 4जी फोन के शुरुआती परीक्षण की घोषणा की थी। संगठन ने तभी चेताया था कि बढ़ती मेमोरी कीमतों के कारण 30–40 डॉलर का लक्षित मूल्य हासिल करना कठिन हो रहा है। जीएसएमए के एक अलग अनुमान के अनुसार, 20 डॉलर का इंटरनेट-सक्षम फोन उप-सहारा अफ्रीका में अतिरिक्त 23 करोड़ लोगों के लिए कनेक्टिविटी को आर्थिक रूप से सुलभ बना सकता है। यह कीमत पर आधारित एक मॉडल का नतीजा है—यह अनुमान नहीं कि वे सभी लोग इंटरनेट इस्तेमाल करने लगेंगे।
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निर्माता भी फोन के डिजाइन बदल रहे हैं और बढ़ी लागत ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। छोटे फोन और लैपटॉप निर्माताओं ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें मेमोरी की कमी 2027 तक बने रहने की आशंका है।
17 जीएसएमए और उसके साझेदारों की महत्वाकांक्षा 2030 तक अफ्रीका में एक अरब लोगों को इंटरनेट से जोड़ने की है। महंगे फोन इस राह को कठिन बनाते हैं, लेकिन लक्ष्य का नतीजा केवल मेमोरी की कीमत तय नहीं करेगी। जीएसएमए ने सस्ते उपकरणों पर कर और शुल्क हटाने की भी मांग की है; मौजूदा नेटवर्क कवरेज को वास्तविक इस्तेमाल में बदलना भी अहम है।
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