ऑस्ट्रेलिया के एक सैन्य F-35 विमान से निकाले गए दो पुर्जे जाँच और संभावित मरम्मत या निस्तारण के लिए अमेरिका भेजे जा रहे थे। लेकिन खेप दक्षिण कोरिया में ठहराव के बाद हांगकांग पहुँची। ब्लूमबर्ग ने घटना की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया है कि पुर्जे चीनी अधिकारियों के कब्ज़े में हैं। मंज़िल क्यों बदली, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है।
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खेप में क्या था और उसका रास्ता कैसे बदला?
ब्लूमबर्ग के अनुसार, मई 2026 के अंत में UPS ऑस्ट्रेलियाई F-35 के कॉकपिट की पारदर्शी छत (कैनोपी) और हथियार रखने वाले खंड का दरवाज़ा अमेरिका ले जा रही थी। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया था कि प्रशांत महासागर पार करते समय अमेरिका जाने वाली खेप का रास्ता बदला गया; बाद की रिपोर्टों में हांगकांग पहुँचने से पहले दक्षिण कोरिया में ठहराव का ज़िक्र आया।
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इन रिपोर्टों से यह पता नहीं चलता कि मंज़िल किसने बदली, दक्षिण कोरिया के रास्ते जाने की वजह क्या थी या पुर्जे चीनी अधिकारियों तक कैसे पहुँचे। चीनी कब्ज़े संबंधी ब्लूमबर्ग की जानकारी अनाम सूत्रों पर आधारित है, चीनी अधिकारियों की सार्वजनिक पुष्टि पर नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग यह भी तय नहीं करती कि रास्ता बदलना गलती थी या जानबूझकर किया गया हस्तक्षेप।
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इस्तेमाल के लायक नहीं, फिर भी चिंता क्यों?
पेंटागन ने इन पुर्जों को अनुपयोगी बताया है—यानी वे अपने निर्धारित काम में इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। इसका यह अर्थ अपने-आप नहीं निकलता कि उनकी सामग्री से कोई तकनीकी जानकारी नहीं मिल सकती। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पुर्जों पर रडार तरंगों को सोखने वाली परत थी, जो विमान की ‘स्टेल्थ’ क्षमता से जुड़ी है। पुर्जों तक भौतिक पहुँच होने पर उनकी सामग्री या बनावट का अध्ययन किया जा सकता है। यह रिवर्स इंजीनियरिंग की आशंका है, इस बात का प्रमाण नहीं कि चीन ने F-35 की तकनीक दोहरा ली है।
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ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और निर्माता ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने खेप के रास्ता बदलने की पुष्टि की, लेकिन कहा कि उनके हिसाब से इसमें संवेदनशील पुर्जे नहीं थे। अमेरिकी रक्षा विभाग के F-35 संयुक्त कार्यक्रम कार्यालय ने अनुपयोगी पुर्जों की खेप से जुड़ी समस्या स्वीकार की है। अमेरिकी सांसदों ने भी जाँच शुरू की है। विमान निर्माता लॉकहीड मार्टिन ने पुर्जों को अनुपयोगी और उनके दोहन का जोखिम कम माना है।
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ये आकलन पुर्जों पर कथित रडार-अवशोषक परत से उठी चिंता को पूरी तरह समाप्त नहीं करते। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसा कोई सार्वजनिक तकनीकी आकलन नहीं है जो बताए कि उनसे वास्तव में क्या जानकारी निकाली जा सकती है।
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जाँच में किन सवालों के जवाब चाहिए?
मामला केवल विमान की सुरक्षा का नहीं, बल्कि निकाले गए पुर्जों की अंतरराष्ट्रीय ढुलाई पर निगरानी का भी है। जाँच में यह तय करना होगा कि खेप के रास्ते और उसकी अभिरक्षा में बदलाव कहाँ हुआ, पुर्जे वापस मिल सकते हैं या नहीं, और ढुलाई के सुरक्षा उपाय बदलने की ज़रूरत है या नहीं। पेंटागन और उद्योग साझेदार पुर्जे वापस पाने और घटना की जाँच पर काम कर रहे हैं।
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शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित मुलाकात से पहले चीनी कब्ज़े की रिपोर्ट इस मामले को और संवेदनशील बनाती है। हालांकि, खेप का रास्ता बदलने का उस मुलाकात से कोई संबंध था या पुर्जों की जाँच की जा चुकी है—इसका सार्वजनिक प्रमाण नहीं है।
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