यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तेल और गैस कितने महंगे हुए हैं। वह यह देख रहा है कि क्या बढ़े हुए ऊर्जा बिल वेतन की मांग, कंपनियों के दूसरे उत्पादों की कीमतों और लोगों की भविष्य की महंगाई संबंधी उम्मीदों को भी बदल रहे हैं। ऐसा हुआ तो महंगाई को वापस नीचे लाना मुश्किल हो सकता है; अभी उपलब्ध संकेत वेतन–कीमतों के ऐसे दुष्चक्र की पुष्टि नहीं करते।
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वेतन पर इतनी नजर क्यों?
ऊर्जा महंगी होते ही समग्र महंगाई दर बढ़ सकती है। ECB के मुताबिक अलग जोखिम उसका दूसरे दौर का असर है—जब शुरुआती झटका वेतन, कंपनियों की कीमतें या मुनाफे का मार्जिन और महंगाई की उम्मीदों तक फैल जाए। अगस्त में यूरो क्षेत्र की महंगाई 3.3% पहुंची थी, जिसकी लगभग पूरी वजह ऊर्जा की बढ़ी कीमतें थीं; अन्य बुनियादी कीमत दबाव अपेक्षाकृत सीमित थे।
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ECB की नीति-निर्धारण परिषद के सदस्य ओली रेहन ने कहा कि वेतन वृद्धि मध्यम है और दूसरे दौर के असर अब तक नहीं दिखे हैं। मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन के मुताबिक, कर्मचारी बढ़ती जीवन-यापन लागत से वाकिफ हैं, लेकिन नियोक्ताओं के लिए उसकी भरपाई करने वाली बड़ी वेतन वृद्धि देना मुश्किल है। इससे वेतन की प्रतिक्रिया फिलहाल कमजोर रहने की वजह समझ आती है, हालांकि आगे बदलाव की संभावना खत्म नहीं होती।
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गैस का जोखिम और अगली दर वृद्धि
लेन का कहना है कि तेल और गैस, दोनों की कीमतों में दूसरी लहर की बढ़ोतरी के कारण ऊर्जा का झटका मार्च में ECB की उम्मीद से अधिक लंबा चल सकता है। उनके अनुसार महंगाई कुछ समय तक ऊंची रहेगी और 2027 के मध्य से ECB के लक्ष्य की ओर लौटना शुरू करेगी। ऐतिहासिक स्तरों से काफी नीचे गैस भंडार को फिर भरने की कोशिशों ने गैस की कीमतें बढ़ाने में मदद की है; इससे घरों के हीटिंग और कारोबार की बिजली लागत पर असर पड़ सकता है। लेकिन लंबे समय तक ऊर्जा महंगी रहना, अपने आप में वेतन या दूसरी कीमतें तेज होने का प्रमाण नहीं है।
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ECB ने जून के बाद सितंबर 2026 में फिर अपनी प्रमुख ब्याज दरें 25 आधार अंक, यानी 0.25 प्रतिशत अंक, बढ़ाईं। सितंबर के फैसले से उसकी जमा सुविधा दर 2.50% हो गई। बैंक का अनुमान है कि औसत महंगाई 2026 में 3.0%, 2027 में 2.5% और 2028 में 2.1% रहेगी।
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ऊर्जा कीमतें बढ़ने पर निवेशकों ने आगे और दर वृद्धि की संभावना अधिक माननी शुरू की है। लेकिन ECB के उपाध्यक्ष बोरिस वुयचिच ने आगाह किया कि ये बाजार अनुमान मुख्यतः ऊर्जा कीमतों से संचालित हैं; बैंक फैसला व्यापक आर्थिक आंकड़ों को देखकर करेगा। दूसरी तिमाही में यूरो क्षेत्र की वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही और सितंबर के कारोबारी सर्वेक्षण में भी गतिविधि अप्रत्याशित रूप से तेज हुई। इससे ECB के पास अगली वृद्धि पर विचार करने की गुंजाइश बढ़ती है, उसका फैसला पहले से तय नहीं होता। निर्णायक संकेत यही रहेगा कि ऊर्जा लागत से वेतन और अन्य कीमतों में टिकाऊ बढ़ोतरी होती है या नहीं। उपलब्ध साक्ष्य वैश्विक वृद्धि के आंकड़ों का ECB के अगले फैसले पर कोई अलग प्रभाव स्थापित नहीं करते।
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