संयुक्त राष्ट्र महासभा में 23 सितंबर को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का संदेश दो हिस्सों में था: ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, लेकिन विवाद का कूटनीतिक समाधान चाहता है। तेल बाज़ार ने इसे जल्द समझौते का संकेत नहीं माना। पहले बातचीत की उम्मीद में नरम पड़ी कीमतें भाषण वाले दिन चढ़ गईं। यह बाज़ार की बदली हुई धारणा है, बातचीत विफल होने का प्रमाण नहीं।
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ब्रेंट और WTI: दोनों चढ़े, पर बराबर नहीं
23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 3.83 डॉलर, यानी 3.86%, बढ़कर 103.08 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) में 1.64 डॉलर, यानी 1.81%, की बढ़त हुई और यह 92.16 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसलिए तेल में ‘करीब 4% उछाल’ की बात ब्रेंट पर लागू होती है, WTI पर नहीं।
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इससे पहले सप्ताह में अमेरिका–ईरान कूटनीति की संभावना और सऊदी अरब से तेल की खेपों में आंशिक सुधार के संकेतों ने कीमतों पर दबाव डाला था। पेज़ेश्कियान के भाषण ने बाज़ार को याद दिलाया कि बातचीत की इच्छा और जल्द समझौता होना अलग बातें हैं।
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समझौते पर दोनों देशों का रुख
एक दिन पहले, 22 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि युद्ध खत्म करने का समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ कर सकता है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि समझौता जल्द हो सकता है। जवाब में पेज़ेश्कियान ने दबाव के आगे समर्पण से इनकार किया, पर कूटनीतिक समाधान के लिए दरवाज़ा खुला रखा। इन बयानों से बातचीत की गुंजाइश दिखती है; यह नहीं कि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत हो चुके हैं।
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तनाव के केंद्र में होर्मुज़ जलडमरूमध्य भी है—तेल ढुलाई का अहम समुद्री रास्ता। पेज़ेश्कियान ने अपने भाषण में ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और इस रास्ते से व्यापार सीमित करने की ईरान की कोशिशों का ज़िक्र किया। बातचीत से वहां तनाव घटता है या आवाजाही और बाधित होती है, इसका असर तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
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आगे तेल और महंगाई के लिए क्या मायने हैं?
भाषण से पहले जारी सितंबर के अनुमान में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने मध्य पूर्व से आपूर्ति घटने और वैश्विक तेल भंडार कम होने के बीच 2026 के लिए कीमतों का अनुमान बढ़ाया था। उसने पूरे साल में ब्रेंट का औसत करीब 91 डॉलर और WTI का 84.65 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान दिया था। ये सालाना औसत के पुराने अनुमान हैं, 23 सितंबर के उछाल के बाद अगले दिन की कीमत का पूर्वानुमान नहीं।
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अगर होर्मुज़ से खेपों में और रुकावट आती है, तो तेल पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है। इसके उलट, आवाजाही बहाल कराने वाला समझौता दबाव कम कर सकता है। तेल लंबे समय तक महंगा रहने से महंगाई का जोखिम भी बढ़ता है। हालांकि उपलब्ध स्रोत OECD की किसी खास महंगाई चेतावनी या उसके प्रभाव के भरोसेमंद संख्यात्मक अनुमान की पुष्टि नहीं करते; इसलिए उससे जुड़ा कोई आंकड़ा बताना उचित नहीं होगा।
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