ब्याज दर बढ़ने से मुद्रा का मजबूत होना तय नहीं होता। 18 सितंबर को बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने अपनी नीतिगत दर 1% से बढ़ाकर 1.25% की—यह 31 साल का उच्चतम स्तर था। लेकिन फैसला पहले से अपेक्षित था। नौ सदस्यीय बोर्ड में दो ने इसका विरोध किया, जिसे कारोबारियों ने आगे दरें कितनी जल्दी बढ़ेंगी, इस पर अनिश्चितता के संकेत के रूप में देखा। फैसले के बाद येन डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।
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दरों का अंतर अभी भी डॉलर के पक्ष में
22 सितंबर के एक बाजार विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दर 3.75%–4.00% के दायरे में थी। जापान की नई दर से यह करीब 2.5–2.75 प्रतिशत अंक अधिक थी। यही अंतर ‘कैरी ट्रेड’ को आकर्षक बनाता है: निवेशक कम ब्याज पर येन उधार लेकर अपेक्षाकृत अधिक प्रतिफल वाली परिसंपत्तियों में पैसा लगाते हैं। हालांकि, येन अचानक मजबूत हो जाए तो विनिमय दर से होने वाला नुकसान ब्याज से मिले लाभ पर भारी पड़ सकता है।
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सिल्वर वीक में क्या बदला?
जापान में सिल्वर वीक की छुट्टियों के कारण टोक्यो के शेयर और वायदा बाजार तथा सरकारी बॉन्ड बाजार 21 से 23 सितंबर तक बंद रहे; कारोबार 24 सितंबर को फिर शुरू होना था। विदेशी मुद्रा में कारोबार जारी रहा। छुट्टियों के दौरान कम कारोबार से विनिमय दर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जबकि जापानी शेयरों और बॉन्ड को उस दौरान हुए घटनाक्रम पर बाजार खुलने के बाद प्रतिक्रिया देनी होती है। छुट्टियां येन की कमजोरी को बढ़ा सकती थीं, लेकिन उसकी बुनियादी वजह अकेले छुट्टियां नहीं थीं।
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¥158 की तारीख को लेकर सावधानी जरूरी है। रिपोर्टों के मुताबिक, 18 सितंबर के BOJ फैसले के आसपास एक डॉलर करीब ¥158 तक पहुंचा था। वहीं 23 सितंबर की एक बाजार रिपोर्ट में भाव ¥157.46 बताया गया। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि डॉलर ने 23 सितंबर को ही ¥158 का स्तर पार किया था।
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फिर ¥160 इतना अहम क्यों?
जापान की पिछली येन-खरीद और 18 सितंबर को ‘रेट चेक’ किए जाने की रिपोर्टों के कारण कारोबारी नए सरकारी हस्तक्षेप की संभावना पर नजर रख रहे हैं। रेट चेक में अधिकारी बाजार सहभागियों से विनिमय दर के बारे में पूछते हैं; यह हस्तक्षेप से पहले का कदम हो सकता है, लेकिन अपने-आप में हस्तक्षेप नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टें ¥160 को कार्रवाई का तय स्तर नहीं बतातीं। येन कितनी तेजी से और कितने अव्यवस्थित ढंग से गिरता है, यह भी अहम हो सकता है।
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टोक्यो के बाजार खुलने पर येन और कमजोर रहता है तो निर्यातकों को फायदा हो सकता है, जबकि आयात महंगा होने की चिंता बढ़ सकती है। दूसरी ओर, चेतावनी या हस्तक्षेप से येन तेजी से चढ़ा तो येन उधार लेकर किए गए कैरी ट्रेड समेटने पड़ सकते हैं—ऐसा जोखिम पहले की येन की तेज बढ़त में भी दिख चुका है। सरकारी बॉन्ड पर दो विपरीत दबाव संभव हैं: BOJ से और दर बढ़ोतरी की उम्मीद बॉन्ड की कीमतें घटा सकती है, जबकि व्यापक जोखिम से बचने की होड़ में बॉन्ड की मांग बढ़ सकती है। ये संभावित स्थितियां हैं, 24 सितंबर के कारोबार की भविष्यवाणी नहीं।
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