वोक्सवैगन की 18 सितंबर की मुनाफ़े संबंधी चेतावनी ने उसके पुनर्गठन की वजह को और स्पष्ट कर दिया है, लेकिन पुनर्गठन की शुरुआत उस दिन नहीं हुई थी। कंपनी के पर्यवेक्षी बोर्ड ने 3 सितंबर को मुख्य योजना मंज़ूर कर दी थी। चेतावनी के बाद उसके प्रमुख VW ब्रांड ने कहा कि योजना पर अमल तेज़ किया जाएगा।
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कंपनी को अब 2026 में परिचालन मार्जिन अधिकतम 1% रहने की उम्मीद है, जबकि पिछला अनुमान 4–5.5% था। उसने लगभग €10 अरब के एकमुश्त खर्च की जानकारी दी है। इसमें पोर्शे में उसकी हिस्सेदारी से जुड़ा करीब €6 अरब का मूल्य-घटाव शामिल है—यानी उस हिस्सेदारी का लेखांकन मूल्य कम करना।
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नौकरियों और कारखानों पर क्या बदलेगा?
योजना के तहत दुनिया भर में 50,000 और पद घटाए जाने हैं। यह पहले से चल रही 50,000 पदों की कटौती के अतिरिक्त है; कुल संख्या 2030 तक लगभग 1 लाख हो सकती है। दोनों चरण सितंबर की मुनाफ़ा चेतावनी से पहले की योजना का हिस्सा थे। इसलिए चेतावनी को उसके ऊपर 50,000 और नौकरियां घटाने की नई घोषणा समझना ग़लत होगा।
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वोक्सवैगन उत्पादन क्षमता घटाना और अपने मॉडलों की संख्या में बड़ी कटौती करना चाहता है; कंपनी ने 2035 तक मॉडलों की संख्या आधी करने का लक्ष्य बताया है। जर्मनी के एम्डेन, त्स्विकाउ, हनोवर और नेकारज़ुल्म संयंत्रों में मौजूदा मॉडलों का उत्पादन 2031 से चरणबद्ध ढंग से समाप्त होने पर आगे क्या बनाया जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है। कंपनी विकल्प तलाश रही है—अनिश्चित भविष्य का अर्थ घोषित बंदी नहीं है। उपलब्ध स्रोत पुर्ज़ों की संख्या घटाने का कोई पक्का, समूह-व्यापी संख्यात्मक लक्ष्य भी स्थापित नहीं करते।
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दबाव कहां से आ रहा है?
अमेरिकी आयात शुल्क लागत बढ़ा रहे हैं। चीन में कमजोर बिक्री और स्थानीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा वोक्सवैगन और पोर्शे पर दबाव डाल रही है; चीनी वाहन निर्माता यूरोप में भी अपनी जगह बना रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव के बीच लाभप्रदता संभालना और मुश्किल हो रहा है। इसी संदर्भ में स्पेनिश ब्रांड SEAT को धीरे-धीरे हटाकर Cupra पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना की खबर आई है, लेकिन यह कोई घोषित फ़ैसला नहीं है।
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योजना पर श्रमिक प्रतिनिधियों की आपत्तियां पहले भी थीं। मुनाफ़ा चेतावनी के बाद जर्मनी में ऑटो कर्मचारियों ने प्रदर्शन किए, जबकि वोक्सवैगन की वर्क्स काउंसिल—कर्मचारियों का प्रतिनिधि निकाय—ने निवेश, शुल्क, बिजली की कीमतों और चरणबद्ध सेवानिवृत्ति पर कदम उठाने को कहा। इस तरह कंपनी के सामने चुनौती केवल कटौती की रफ़्तार बढ़ाने की नहीं, बल्कि उसे कर्मचारियों और संयंत्रों के भविष्य पर जारी विवाद के बीच लागू करने की भी है।
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