EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17] 13 और 14 वर्ष के बच्चे अभिभावक या संरक्षक की निगरानी वाले सीमित ‘मिनी अकाउंट’ इस्तेमाल कर सकेंगे; इ...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does the European Commission’s proposed EU Kids Act, unveiled by Ursula von der Leyen on September 17, seek to do—including its under-1. Article summary: The proposed EU KIDS Act would create EU-wide age gates for social media and impose “safety-by-design” duties on digital services used by under-18s. It is a proposal—not yet law—and would need agreement by both EU govern. Topic tags: general, government, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
यूरोपीय आयोग का प्रस्तावित EU KIDS Act बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया के साझा आयु-नियम बनाने तथा उनके इस्तेमाल वाले डिजिटल उत्पादों को शुरुआत से अधिक सुरक्षित बनाने की योजना है। इसे 17 सितंबर को पेश किया गया था, लेकिन यह अभी कानून नहीं है। अंतिम नियम बनने से पहले यूरोपीय संसद और EU सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली परिषद को इस पर बातचीत कर मंजूरी देनी होगी। 1
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17
प्रस्ताव में हर नाबालिग के लिए एक जैसा नियम नहीं है, बल्कि उम्र के साथ धीरे-धीरे अधिक स्वतंत्रता देने का ढांचा रखा गया है:
आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था EU के अलग-अलग सदस्य देशों में बन रहे भिन्न नियमों को एकरूप करेगी और उन सेवाओं पर बच्चों की निजता, सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े जोखिम घटाएगी जो खास तौर पर जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
यह केवल Facebook, Instagram या TikTok जैसे सोशल नेटवर्क तक सीमित प्रस्ताव नहीं है। नाबालिगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई डिजिटल सेवाएं इसके दायरे में आएंगी, जिनमें सोशल मीडिया, वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, AI कंपैनियन, चैटबॉट और ऐप स्टोर शामिल हैं। 2
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यानी प्रस्ताव का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बच्चा अकाउंट बना सकता है या नहीं। यह यह भी तय करना चाहता है कि 18 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल सेवा का डिजाइन और संचालन कैसा हो।
इस मसौदे का प्रमुख सिद्धांत ‘सेफ्टी बाय डिज़ाइन’ है—अर्थात सुरक्षा को बाद में जोड़ा जाने वाला फीचर न मानकर सेवा के मूल डिजाइन में शामिल करना। कंपनियों को यह दिखाना होगा कि उनकी सेवाएं उम्र के अनुरूप और सुरक्षित हैं; केवल नुकसान होने के बाद नियामक की कार्रवाई का इंतजार पर्याप्त नहीं होगा। 1
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प्रस्ताव में ऐसे फीचर और तौर-तरीकों पर रोक या पाबंदी की बात है जो बच्चों को जरूरत से ज्यादा समय तक जोड़े रख सकते हैं या अनचाहे संपर्क के जोखिम में डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
इसलिए KIDS Act केवल उम्र-सीमा का प्रस्ताव नहीं है। इसका उद्देश्य उन डिजाइन विकल्पों को भी सीमित करना है जो कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा की कीमत पर उनका ध्यान खींचने या कमाई बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं।
AI कंपैनियन और चैटबॉट के लिए अलग सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं। नाबालिगों के लिए इन्हें डिफॉल्ट रूप से बंद रखना होगा। ऐसे डिजाइन भी प्रतिबंधित होंगे जो मानवीय रिश्तों का अनुकरण करके भावनात्मक निर्भरता पैदा कर सकते हैं। 5
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AI कंपैनियन और सामान्य संवादात्मक चैटबॉट से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियों का उल्लंघन होने पर सेवा प्रदाता पर उसके कुल वैश्विक वार्षिक कारोबार के अधिकतम 6% तक प्रशासनिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
आयोग ने प्रस्ताव को अपनाकर आगे भेज दिया है, मगर अंतिम EU विनियमन अभी लागू नहीं हुआ है। यूरोपीय संसद और परिषद—जो सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करती है—EU की विधायी प्रक्रिया में इसके पाठ पर बातचीत करेंगी। उम्र की सीमाएं, दायरा, उम्र सुनिश्चित करने की व्यवस्था, प्रवर्तन और विस्तृत दायित्व अंतिम कानून बनने से पहले बदल सकते हैं। 6
इसलिए इसे मौजूदा कानून नहीं, बल्कि प्रस्तावित नियमों के रूप में समझना जरूरी है।
उम्र-आधारित पाबंदियां सबसे विवादित हिस्सों में रह सकती हैं। आलोचकों का तर्क है कि आयु-सीमा लागू कराना कठिन हो सकता है, बच्चे गलत उम्र दर्ज कर सकते हैं, और जांच के लिए अत्यधिक दखल देने वाली उम्र-सत्यापन प्रणालियों की जरूरत पड़ सकती है। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि व्यापक दायित्वों का असर अलग-अलग तरह से इस्तेमाल होने वाली सेवाओं पर जरूरत से ज्यादा या अनपेक्षित हो सकता है।
एक जुड़ी हुई आलोचना यह है कि केवल बच्चों की पहुंच रोकने से प्लेटफॉर्मों के मूल प्रोत्साहन—लोगों को लंबे समय तक जोड़े रखना, डेटा का इस्तेमाल और विज्ञापन से कमाई—पर पर्याप्त असर नहीं पड़ेगा। KIDS Act इस तर्क का आंशिक जवाब नशे जैसी आदत बढ़ाने वाले फीचरों, प्रोफाइलिंग आधारित फीड और नाबालिगों के लिए व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रस्तावित पाबंदियों के जरिये देता है। मगर ये प्रावधान अंतिम कानून में रहते हैं या नहीं और इन्हें लागू कैसे किया जाएगा, यह विधायी बहस के केंद्र में होगा। 5
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आयोग के अनुसार, प्रस्ताव की तैयारी में विशेषज्ञों के साथ उद्योग, अभिभावकों और युवाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। 2 उपलब्ध सामग्री किसी व्यक्तिगत सलाहकार के तकनीक उद्योग से संबंध, हितों के टकराव या कदाचार के विशिष्ट आरोपों की पुष्टि नहीं करती। इसलिए इस विषय में इससे आगे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उम्र के आधार पर पहुंच के नियमों पर दुनिया के कई हिस्सों में चर्चा चल रही है। लेकिन उपलब्ध स्रोत गैर-EU देशों के व्यक्तिगत उपायों का पर्याप्त विस्तृत और तुलनीय विवरण नहीं देते। इतना स्पष्ट है कि EU का यह प्रस्ताव बच्चों के लिए ऑनलाइन सेवाओं को अधिक सुरक्षात्मक बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है—हालांकि निजता, लागू करने के तरीके और प्लेटफॉर्म जवाबदेही जैसे कठिन सवाल अभी खुले हैं।
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EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17]
EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17] 13 और 14 वर्ष के बच्चे अभिभावक या संरक्षक की निगरानी वाले सीमित ‘मिनी अकाउंट’ इस्तेमाल कर सकेंगे; इनके लिए रोजाना एक घंटे की सीमा प्रस्तावित है। [2][5][17]
नियम सोशल मीडिया से आगे वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, AI कंपैनियन, चैटबॉट और ऐप स्टोर तक जाएंगे। उम्र सत्यापन, निजता और प्लेटफॉर्म के कारोबारी प्रोत्साहनों पर बहस अभी बाकी है। [2][17][46]
EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17] 13 और 14 वर्ष के बच्चे अभिभावक या संरक्षक की निगरानी वाले सीमित ‘मिनी अकाउंट’ इस्तेमाल कर सकेंगे; इ...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does the European Commission’s proposed EU Kids Act, unveiled by Ursula von der Leyen on September 17, seek to do—including its under-1. Article summary: The proposed EU KIDS Act would create EU-wide age gates for social media and impose “safety-by-design” duties on digital services used by under-18s. It is a proposal—not yet law—and would need agreement by both EU govern. Topic tags: general, government, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
यूरोपीय आयोग का प्रस्तावित EU KIDS Act बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया के साझा आयु-नियम बनाने तथा उनके इस्तेमाल वाले डिजिटल उत्पादों को शुरुआत से अधिक सुरक्षित बनाने की योजना है। इसे 17 सितंबर को पेश किया गया था, लेकिन यह अभी कानून नहीं है। अंतिम नियम बनने से पहले यूरोपीय संसद और EU सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली परिषद को इस पर बातचीत कर मंजूरी देनी होगी। 1
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प्रस्ताव में हर नाबालिग के लिए एक जैसा नियम नहीं है, बल्कि उम्र के साथ धीरे-धीरे अधिक स्वतंत्रता देने का ढांचा रखा गया है:
आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था EU के अलग-अलग सदस्य देशों में बन रहे भिन्न नियमों को एकरूप करेगी और उन सेवाओं पर बच्चों की निजता, सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े जोखिम घटाएगी जो खास तौर पर जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
यह केवल Facebook, Instagram या TikTok जैसे सोशल नेटवर्क तक सीमित प्रस्ताव नहीं है। नाबालिगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई डिजिटल सेवाएं इसके दायरे में आएंगी, जिनमें सोशल मीडिया, वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, AI कंपैनियन, चैटबॉट और ऐप स्टोर शामिल हैं। 2
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यानी प्रस्ताव का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बच्चा अकाउंट बना सकता है या नहीं। यह यह भी तय करना चाहता है कि 18 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल सेवा का डिजाइन और संचालन कैसा हो।
इस मसौदे का प्रमुख सिद्धांत ‘सेफ्टी बाय डिज़ाइन’ है—अर्थात सुरक्षा को बाद में जोड़ा जाने वाला फीचर न मानकर सेवा के मूल डिजाइन में शामिल करना। कंपनियों को यह दिखाना होगा कि उनकी सेवाएं उम्र के अनुरूप और सुरक्षित हैं; केवल नुकसान होने के बाद नियामक की कार्रवाई का इंतजार पर्याप्त नहीं होगा। 1
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प्रस्ताव में ऐसे फीचर और तौर-तरीकों पर रोक या पाबंदी की बात है जो बच्चों को जरूरत से ज्यादा समय तक जोड़े रख सकते हैं या अनचाहे संपर्क के जोखिम में डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
इसलिए KIDS Act केवल उम्र-सीमा का प्रस्ताव नहीं है। इसका उद्देश्य उन डिजाइन विकल्पों को भी सीमित करना है जो कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा की कीमत पर उनका ध्यान खींचने या कमाई बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं।
AI कंपैनियन और चैटबॉट के लिए अलग सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं। नाबालिगों के लिए इन्हें डिफॉल्ट रूप से बंद रखना होगा। ऐसे डिजाइन भी प्रतिबंधित होंगे जो मानवीय रिश्तों का अनुकरण करके भावनात्मक निर्भरता पैदा कर सकते हैं। 5
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AI कंपैनियन और सामान्य संवादात्मक चैटबॉट से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियों का उल्लंघन होने पर सेवा प्रदाता पर उसके कुल वैश्विक वार्षिक कारोबार के अधिकतम 6% तक प्रशासनिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
आयोग ने प्रस्ताव को अपनाकर आगे भेज दिया है, मगर अंतिम EU विनियमन अभी लागू नहीं हुआ है। यूरोपीय संसद और परिषद—जो सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करती है—EU की विधायी प्रक्रिया में इसके पाठ पर बातचीत करेंगी। उम्र की सीमाएं, दायरा, उम्र सुनिश्चित करने की व्यवस्था, प्रवर्तन और विस्तृत दायित्व अंतिम कानून बनने से पहले बदल सकते हैं। 6
इसलिए इसे मौजूदा कानून नहीं, बल्कि प्रस्तावित नियमों के रूप में समझना जरूरी है।
उम्र-आधारित पाबंदियां सबसे विवादित हिस्सों में रह सकती हैं। आलोचकों का तर्क है कि आयु-सीमा लागू कराना कठिन हो सकता है, बच्चे गलत उम्र दर्ज कर सकते हैं, और जांच के लिए अत्यधिक दखल देने वाली उम्र-सत्यापन प्रणालियों की जरूरत पड़ सकती है। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि व्यापक दायित्वों का असर अलग-अलग तरह से इस्तेमाल होने वाली सेवाओं पर जरूरत से ज्यादा या अनपेक्षित हो सकता है।
एक जुड़ी हुई आलोचना यह है कि केवल बच्चों की पहुंच रोकने से प्लेटफॉर्मों के मूल प्रोत्साहन—लोगों को लंबे समय तक जोड़े रखना, डेटा का इस्तेमाल और विज्ञापन से कमाई—पर पर्याप्त असर नहीं पड़ेगा। KIDS Act इस तर्क का आंशिक जवाब नशे जैसी आदत बढ़ाने वाले फीचरों, प्रोफाइलिंग आधारित फीड और नाबालिगों के लिए व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रस्तावित पाबंदियों के जरिये देता है। मगर ये प्रावधान अंतिम कानून में रहते हैं या नहीं और इन्हें लागू कैसे किया जाएगा, यह विधायी बहस के केंद्र में होगा। 5
17
आयोग के अनुसार, प्रस्ताव की तैयारी में विशेषज्ञों के साथ उद्योग, अभिभावकों और युवाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। 2 उपलब्ध सामग्री किसी व्यक्तिगत सलाहकार के तकनीक उद्योग से संबंध, हितों के टकराव या कदाचार के विशिष्ट आरोपों की पुष्टि नहीं करती। इसलिए इस विषय में इससे आगे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उम्र के आधार पर पहुंच के नियमों पर दुनिया के कई हिस्सों में चर्चा चल रही है। लेकिन उपलब्ध स्रोत गैर-EU देशों के व्यक्तिगत उपायों का पर्याप्त विस्तृत और तुलनीय विवरण नहीं देते। इतना स्पष्ट है कि EU का यह प्रस्ताव बच्चों के लिए ऑनलाइन सेवाओं को अधिक सुरक्षात्मक बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है—हालांकि निजता, लागू करने के तरीके और प्लेटफॉर्म जवाबदेही जैसे कठिन सवाल अभी खुले हैं।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17]
EU KIDS Act अभी कानून नहीं, बल्कि 17 सितंबर को पेश किया गया यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है। इसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 15 साल से स्वतंत्र अकाउंट की अनुमति देने की योजना है। [1][6][17] 13 और 14 वर्ष के बच्चे अभिभावक या संरक्षक की निगरानी वाले सीमित ‘मिनी अकाउंट’ इस्तेमाल कर सकेंगे; इनके लिए रोजाना एक घंटे की सीमा प्रस्तावित है। [2][5][17]
नियम सोशल मीडिया से आगे वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, AI कंपैनियन, चैटबॉट और ऐप स्टोर तक जाएंगे। उम्र सत्यापन, निजता और प्लेटफॉर्म के कारोबारी प्रोत्साहनों पर बहस अभी बाकी है। [2][17][46]