रूस का 2026 संघीय बजट घाटा अब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3% तक पहुंचने का अनुमान है। यह मूल 1.6% लक्ष्य के करीब दोगुना है। मुख्य वजह यूक्रेन में युद्ध से जुड़ा बढ़ता खर्च है, जिसने राजस्व के मुकाबले सरकारी व्यय को तेजी से बढ़ाया है और क्रेमलिन को गैर-सैन्य मदों पर खर्च टालने के लिए मजबूर किया है।
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घाटा कितना बढ़ा है?
- जनवरी से अगस्त 2026 के बीच रूस का संघीय बजट घाटा 5.8 ट्रिलियन रूबल रहा, जो जीडीपी का 2.5% है। यह पूरे साल के लिए तय मूल लक्ष्य—3.8 ट्रिलियन रूबल या जीडीपी के 1.6%—से पहले ही ज्यादा है।
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- वित्त मंत्री एंतोन सिलुआनोव के अनुसार, 2026 का घाटा जीडीपी के 3% के भीतर रखने का लक्ष्य है। इससे पहले सरकारी बजट पोर्टल के आंकड़ों ने संकेत दिया था कि खर्च और घाटा योजना से 1 ट्रिलियन रूबल से अधिक बढ़ सकते हैं।
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अगस्त का अधिशेष क्या बताता है?
अगस्त में बजट को 660 अरब रूबल का अधिशेष मिला, जो एक साल में सबसे बड़ा मासिक अधिशेष था। यह मुख्यतः बड़ी सरकारी कंपनियों और राज्य बैंकों द्वारा पिछले वर्ष के मुनाफे पर दिए गए लाभांश के कारण हुआ।
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लेकिन यह एकबारगी राजस्व प्रवाह था। इसने जनवरी-अगस्त के संचयी घाटे को समाप्त नहीं किया। दूसरे शब्दों में, अगस्त का सकारात्मक आंकड़ा बजट की बुनियादी स्थिति में स्थायी सुधार का प्रमाण नहीं है।
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असैन्य खर्च क्यों टाला जा रहा है?
सरकार के सामने सीमित नकदी को प्राथमिकता के आधार पर बांटने की चुनौती है। रक्षा, सुरक्षा, हथियार उत्पादन, सैन्य बलों से जुड़े भुगतान और युद्ध संबंधी जरूरतों को वरीयता मिल रही है; इसके परिणामस्वरूप असैन्य कार्यक्रमों पर खर्च टाला जा रहा है।
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पहली छमाही में सैन्य खर्च 10.7 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 30% अधिक था। यह पहली छमाही की जीडीपी के 10.5% और अनुमानित पूरे साल की जीडीपी के 4.7% के बराबर है।
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यह खर्च 2026 के लिए बजट में रखे गए सैन्य आवंटन के लगभग तीन-चौथाई तक पहुंच चुका था। वार्षिक योजना में सैन्य खर्च का मानक जीडीपी का 6.4% था।
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घाटे की भरपाई कैसे होगी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्रेमलिन का तरीका कर संग्रह बढ़ाने, घरेलू कर्ज बाजार से उधारी लेने, उपलब्ध राजकोषीय संसाधनों का इस्तेमाल करने और असैन्य भुगतान टालने का मिश्रण है। हालांकि, इन स्रोतों में से प्रत्येक से कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
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2027 के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रारंभिक तौर पर घाटा जीडीपी के करीब 2% रहने का अनुमान बताया है। यह अनुमान तेल की कीमत लगभग 50 डॉलर प्रति बैरल मानने वाली एक “बहुत सतर्क” धारणा पर आधारित है।
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पुतिन का कहना है कि बढ़ता घाटा प्रबंधनीय है और इसमें रूसी अर्थव्यवस्था के लिए कोई “गंभीर” जोखिम नहीं है। जुलाई के अंत तक घाटा जीडीपी के 2.8% तक पहुंचने के बाद भी उन्होंने यही रुख रखा था।
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दबाव सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं
रूसी वित्त मंत्रालय कंपनियों को ड्रोन हमलों में क्षतिग्रस्त परिसरों की सुरक्षा और मरम्मत पर हुए खर्च को कर कानून में शामिल करने के लिए बदलावों पर काम कर रहा है।
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वैट और अन्य करों में बढ़ोतरी का उद्देश्य राजस्व मजबूत करना है, जबकि प्रतिबंध आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल रहे हैं और युद्ध खर्च बजट की क्षमता का बड़ा हिस्सा ले रहा है।
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महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, ड्रोन हमलों से हुई क्षति की मरम्मत, युद्ध उत्पादन और सामान्य सार्वजनिक सेवाओं—इन सभी जरूरतों को एक साथ वित्त देना सरकार के लिए बढ़ती चुनौती बन रहा है। उपलब्ध साक्ष्य इन उपायों की कुल अंतिम लागत तय नहीं करते।