हां। हाइबरनेशन के दौरान भूरे और काले भालू आमतौर पर मल त्याग नहीं करते, जबकि पेशाब या तो बिल्कुल नहीं होता या बहुत कम होता है।
11 लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इंसानों की तरह महीनों तक बस मल-मूत्र रोके रहते हैं। उनका शरीर अपशिष्ट बनने की रफ्तार घटाता है और उसके कुछ हिस्सों को फिर से उपयोग में ले लेता है।
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मल क्यों नहीं बनता?
हाइबरनेशन में भालू खाते नहीं हैं, इसलिए आंतों तक नए भोजन के अपचित अवशेष पहुंचते ही नहीं।
9 हालांकि आंतें पूरी तरह खाली भी नहीं होतीं: उनमें बलगम बनता रहता है और कोशिकाएं झड़ती रहती हैं। इन बचे हुए पदार्थों से एक ठोस-सी गांठ बनती है, जिसे फीकल प्लग या मल-रोधक गांठ कहा जाता है।
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अर्थात, यह पेट में आधे साल का सामान्य मल जमा हो जाना नहीं है।
पेशाब का क्या होता है?
भालू की किडनियां बंद नहीं होतीं, लेकिन उनकी रक्त को छानने की क्षमता—ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट या GFR—बहुत घट जाती है। हाइबरनेट कर रहे भालुओं में यह दर लगभग 70% तक कम हो सकती है, जिससे पेशाब का उत्पादन बेहद कम हो जाता है।
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इससे भी दिलचस्प बात यह है कि मूत्राशय की परत के जरिये पेशाब का पानी और नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ, जैसे यूरिया, वापस रक्त में अवशोषित हो सकते हैं।
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14 इससे शरीर पानी बचाता है और मूत्राशय में लगातार पेशाब जमा होने की समस्या नहीं होती।
यूरिया ‘कचरा’ नहीं, दोबारा काम आने वाला पदार्थ बन जाता है
यूरिया प्रोटीन के चयापचय से बनने वाला नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट है। हाइबरनेशन में आंतों के बैक्टीरिया इसे तोड़ने में भूमिका निभाते हैं। इससे निकला नाइट्रोजन अमीनो अम्लों—यानी प्रोटीन के निर्माण-घटकों—के निर्माण में इस्तेमाल हो सकता है।
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यही नाइट्रोजन-रीसाइक्लिंग भालू को लंबे उपवास और निष्क्रियता के दौरान प्रोटीन बचाने में मदद करने वाले महत्वपूर्ण अनुकूलनों में से एक है।
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आसान भाषा में समझें
भालू सर्दियों में ‘बंद’ नहीं हो जाता। उसका शरीर एक बेहद किफायती व्यवस्था में चला जाता है:
- भोजन नहीं आता, इसलिए नया मल बहुत कम बनता है;
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- किडनियां बहुत धीमी गति से काम करती हैं;
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- पानी और मूत्र के कुछ घटक वापस शरीर में पहुंच जाते हैं;
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- और नाइट्रोजन वाले कुछ अपशिष्ट को फिर से उपयोगी पोषक घटकों में बदला जाता है।
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इसीलिए वह बिना खाए-पिए और लगभग बिना मल-मूत्र त्यागे कई महीनों तक मांद में रह सकता है।
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साक्ष्य का निष्कर्ष
हाइबरनेशन में पेशाब न करना किडनियों के पूरी तरह बंद हो जाने का संकेत नहीं है। उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि निस्यंदन में बड़ी कमी और मूत्र के घटकों का पुनःअवशोषण—दोनों इस असाधारण अनुकूलन के अहम हिस्से हैं।
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