डॉ. मोहम्मद अल कुवैती ने कहा कि 2026 के संघर्ष में यूएई के किसी लक्ष्य पर हर ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमले के साथ उसी लक्ष्य पर साइबर हमला भी हुआ। यूएई के अनुसार, अभियान में नेटवर्क में घुसपैठ की कोशिशें, रैनसमवेयर और फिशिंग शामिल थे; चरम पर प्रतिदिन करीब 8 लाख प्रयास दर्ज हुए। अल कुवैती ने महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे पर ब...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did UAE Cybersecurity Council chief Dr. Mohamed Al Kuwaiti report about Iran’s systematic pairing of every missile and drone strike aga. Article summary: Dr. Mohamed Al Kuwaiti described a coordinated hybrid campaign: he said every Iranian missile or drone strike against a UAE target—including ports, refineries and airports—was accompanied by a cyberattack aimed at that s. Topic tags: general, general web, user generated, government, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
यूएई साइबर सुरक्षा परिषद के प्रमुख डॉ. मोहम्मद अल कुवैती का कहना है कि 2026 के संघर्ष में देश को हाइब्रिड युद्ध का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, यूएई के किसी लक्ष्य पर होने वाले हर ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमले के साथ उसी लक्ष्य को निशाना बनाकर साइबर हमला भी किया गया। यानी दबाव केवल हवा या जमीन से नहीं, बल्कि डिजिटल प्रणालियों और जनविश्वास पर भी बनाया गया। 6
यूएई साइबर सुरक्षा परिषद ने कहा कि फरवरी में लड़ाई शुरू होने के बाद विमानन, ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्रों के खिलाफ समन्वित साइबर गतिविधियों का पता लगाकर उन्हें रोका गया। 2
रिपोर्ट किए गए तरीकों में नेटवर्क में सेंध लगाने के प्रयास, रैनसमवेयर तैनात करना और राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों तथा अहम क्षेत्रों के खिलाफ व्यवस्थित फिशिंग अभियान शामिल थे। 14 अल कुवैती ने यह भी चेताया कि खतरा केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार भ्रामक सामग्री और हेरफेर किए गए संदेश लोगों, समुदायों और जरूरी सेवाओं के प्रति भरोसा कमजोर कर सकते हैं।
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इसका अर्थ यह है कि किसी तकनीकी हमले को रोक भी दिया जाए, तो उसके समानांतर फैलाई गई गलत सूचनाएं या छेड़छाड़ वाले मीडिया संकट के समय भ्रम, घबराहट और अविश्वास पैदा कर सकते हैं।
संघर्ष के चरम पर यूएई में प्रतिदिन करीब 8 लाख साइबर हमले के प्रयास दर्ज किए गए—यह युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग चार गुना था, ऐसा साइबर सुरक्षा परिषद के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टिंग में कहा गया। 2 अलग से, अल कुवैती ने सितंबर के एक मंगलवार को 6.4 लाख साइबर हमले दर्ज होने की बात कही।
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इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि इतनी ही प्रणालियों में सेंध लग गई थी। इनमें अवरुद्ध स्कैन, फिशिंग संदेश और अन्य असफल या रोके गए दुर्भावनापूर्ण प्रयास भी शामिल हो सकते हैं।
अल कुवैती ने कहा कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) यूएई के खिलाफ हुए “कई” हमलों के पीछे थी और ईरान इस डिजिटल आक्रामकता के प्रमुख कारकों में से एक है। 1
हालांकि, यह यूएई के एक अधिकारी का आकलन है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग हर साइबर घटना या हर कथित भौतिक-हमले और साइबर-हमले की जोड़ी के लिए आईआरजीसी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती। साइबर संघर्ष में पहचान कठिन होती है, क्योंकि हमले बिचौलियों, साझा औजारों या राज्य से जुड़े समूहों के जरिए चलाए जा सकते हैं।
अल कुवैती के अनुसार जवाब का आधार सामूहिक रक्षा था—सरकारी संस्थाओं, देशी निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों के बीच सूचना साझा करना तथा आपस में जुड़ी प्रणालियों पर समन्वित प्रतिक्रिया देना। उन्होंने साइबर सुरक्षा को सरकार, उद्योग और समाज—तीनों की साझा जिम्मेदारी बताया है।
हवाई अड्डों, ऊर्जा प्रणालियों और संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में यह मॉडल खास महत्व रखता है, क्योंकि इनके स्वामित्व, संचालन और तकनीकी निर्भरताएं अक्सर सार्वजनिक तथा निजी संस्थाओं में बंटी होती हैं। व्यावहारिक सबक यही है कि किसी घटना को एक संगठन या क्षेत्र से दूसरे तक फैलने से पहले रोकने के लिए तेज खुफिया-साझाकरण और समन्वित प्रतिक्रिया जरूरी है।
अल कुवैती ने साइबर युद्ध के नियम तय करने, डिजिटल संपत्तियों की रक्षा करने और यह परिभाषित करने के लिए कि महत्वपूर्ण ढांचे पर बड़ा साइबर हमला कब युद्ध की कार्रवाई माना जाए, एक ‘साइबर जिनेवा कन्वेंशन’ का आह्वान किया है। 3
यह मांग एक व्यावहारिक कानूनी दुविधा की ओर इशारा करती है: किसी देश की नागरिक सेवाएं साइबर हमले से बाधित हो सकती हैं, जबकि हमलावर की पहचान विवादित रह सकती है। जवाबी कार्रवाई का असर सीमाओं के पार या गैर-लड़ाकों पर भी पड़ सकता है। स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानदंड इन कठिनाइयों को खत्म नहीं करेंगे, लेकिन नागरिक बुनियादी ढांचे, जवाबदेही और राज्य की प्रतिक्रिया की सीमाओं पर अपेक्षाएं तय कर सकते हैं।
जुलाई 2026 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने अल कुवैती को आईटीयू-टी स्टडी ग्रुप 17 के अरब क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह निकाय सूचना सुरक्षा मानकीकरण, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पहचान, गोपनीयता और उभरती प्रौद्योगिकियों पर काम करता है। यूएई ने एआई और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन भी सार्वजनिक रूप से दोहराया है।
ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर, अमेरिका की एफबीआई और नीदरलैंड्स की एआईवीडी की संयुक्त चेतावनी में कहा गया कि ईरानी राज्य साइबर कर्ताओं ने कम-से-कम 2025 से असंतुष्टों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ CHOSEN BRICK स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया। यह मैलवेयर संपर्कों, ईमेल और सोशल-मीडिया संदेशों को एकत्र कर सकता है, जिससे पीड़ितों की गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
अभियान में व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर स्पीयर-फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग हुआ; एनसीएससी के अनुसार, स्पाइवेयर स्क्रीन कैप्चर और संदेशों का इतिहास भी इकट्ठा कर सकता है।
यहां उपलब्ध सामग्री में ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि CHOSEN BRICK का इस्तेमाल कथित यूएई अवसंरचना अभियान में किया गया था। इसकी प्रासंगिकता केवल इतनी है कि व्यापक खतरे के परिदृश्य में महत्वपूर्ण प्रणालियों को बाधित करने वाले अभियान और व्यक्तियों की लक्षित निगरानी, दोनों शामिल हो सकते हैं। दोनों के उद्देश्य, पीड़ित और तकनीकी संदर्भ अलग हैं; इन्हें एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
यूएई अपनी ‘सेंटेनियल 2071’ दृष्टि के तहत एआई को व्यापक रूप से अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में चुनौती सिर्फ अनधिकृत नेटवर्क पहुंच रोकने की नहीं, बल्कि भरोसे, संचार और आवश्यक सेवाओं को सुरक्षित रखने की भी है, जो लगातार डिजिटल प्रणालियों पर निर्भर होती जा रही हैं।
अल कुवैती का समन्वित मिसाइल, ड्रोन और साइबर हमलों वाला आकलन एक व्यापक तैयारी की जरूरत बताता है: भौतिक सुरक्षा, साइबर रक्षा, संकट-संचार और दुष्प्रचार से निपटने की क्षमता को साथ काम करना होगा। हाइब्रिड संघर्ष में केवल एक परत की रक्षा पर्याप्त नहीं हो सकती। 6
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डॉ. मोहम्मद अल कुवैती ने कहा कि 2026 के संघर्ष में यूएई के किसी लक्ष्य पर हर ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमले के साथ उसी लक्ष्य पर साइबर हमला भी हुआ।
डॉ. मोहम्मद अल कुवैती ने कहा कि 2026 के संघर्ष में यूएई के किसी लक्ष्य पर हर ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमले के साथ उसी लक्ष्य पर साइबर हमला भी हुआ। यूएई के अनुसार, अभियान में नेटवर्क में घुसपैठ की कोशिशें, रैनसमवेयर और फिशिंग शामिल थे; चरम पर प्रतिदिन करीब 8 लाख प्रयास दर्ज हुए।
अल कुवैती ने महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे पर बड़े हमलों के लिए स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय नियम तय करने हेतु ‘साइबर जिनेवा कन्वेंशन’ की वकालत की।