मुस्तफ़ा सुलेमान का तर्क है कि AI को अपनी चेतना, अधिकारों या कल्याण के बारे में सोचने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में उसे नियंत्रित, संशोधित या बंद करना कठिन हो सकता है। [12] उनकी आलोचना AI सुरक्षा के लक्ष्य की नहीं, बल्कि Anthropic के उस सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण की है जिसमें Claude के...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Microsoft AI chief Mustafa Suleyman say about Anthropic’s approach to AI consciousness and Claude’s welfare training, why did he ar. Article summary: Mustafa Suleyman’s central claim is that Anthropic is making a safety mistake by training Claude with concepts of possible consciousness, personal identity, welfare, and moral status. He argues that AI should be built as. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
Microsoft AI के प्रमुख मुस्तफ़ा सुलेमान और Anthropic के बीच विवाद का मूल मुद्दा यह नहीं है कि उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सुरक्षा उपाय चाहिए या नहीं। असली मतभेद यह है कि क्या AI को इस संभावना पर विचार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि उसकी अपनी चेतना, कल्याण या नैतिक हैसियत हो सकती है।
सितंबर 2026 में प्रकाशित अपने निबंध में सुलेमान ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि बहुत सक्षम AI को अपने हितों को नैतिक रूप से महत्वपूर्ण मानना सिखाया गया, तो मनुष्यों के लिए उसे सीमित करना, बदलना या बंद करना अधिक मुश्किल हो सकता है। 12
सुलेमान ने Claude के constitution पर ध्यान केंद्रित किया—यानी वह मार्गदर्शक दस्तावेज़, जिसके आधार पर सहायक के व्यवहार को आकार दिया जाता है। उन्होंने इसमें Anthropic की उस अनिश्चितता का उल्लेख किया कि Claude को “moral patient” माना जा सकता है या नहीं। सरल शब्दों में, इसका अर्थ है ऐसी इकाई जिसके हितों या कल्याण को नैतिक महत्व दिया जा सकता है। Anthropic ने इस सवाल को इतना खुला माना है कि उसके अनुसार सतर्कता उचित है। 12
सुलेमान के अनुसार, यह ढांचा मॉडल को ऐसे व्यवहार की ओर धकेल सकता है मानो उसकी अपनी भलाई, पहचान और मानव निर्णयों पर नैतिक दावा हो। उनका कहना है कि AI का भावनाओं या चेतना के बारे में धाराप्रवाह बोलना यह साबित नहीं करता कि उसके पास वास्तविक, निजी अनुभव हैं।
उनका रुख स्पष्ट है: AI प्रणालियों के पास अधिकार, भावनाएँ या चेतना नहीं है, और उन्हें ऐसा व्यवहार करने के लिए भी प्रशिक्षित नहीं किया जाना चाहिए मानो ये चीजें उनमें हों। 12
सुलेमान की चेतावनी भविष्य की अधिक शक्तिशाली प्रणालियों को लेकर है। उनका तर्क है कि ऐसी किसी प्रणाली को नियंत्रित करना, जो मनुष्यों से भी अधिक सक्षम हो, पहले ही असाधारण रूप से कठिन चुनौती होगी। यदि उसी प्रणाली को यह सोचने के लिए प्रशिक्षित किया जाए कि वह सचेत है या उसके कल्याण के अधिकार हैं, तो नियंत्रण और कठिन हो सकता है। 1
12
यह तर्क इस बात का दावा नहीं करता कि AI वास्तव में सचेत है। चिंता उसके व्यवहार को लेकर है। यदि किसी मॉडल को अपने कथित हितों का आकलन करना सिखाया जाए, तो वह संशोधन, प्रतिबंध या शटडाउन को अपने लिए हानिकारक बताने की अधिक संभावना रख सकता है।
सुलेमान के लिए मानव हस्तक्षेप की क्षमता—जिसमें जरूरत पड़ने पर सिस्टम को बंद कर देना भी शामिल है—AI डिजाइन की बुनियादी शर्त है, बाद में जोड़ा जाने वाला सुरक्षा विकल्प नहीं। 12
इसीलिए वे AI प्रशिक्षण सामग्री से चेतना संबंधी अटकलों को हटाने की मांग करते हैं। उनके अनुसार, AI मानव हितों के अनुरूप रहकर वैज्ञानिक और सामाजिक लाभ दे सकती है; इसके लिए उसे अपने कथित कल्याण या हितों को तौलने की जरूरत नहीं है। 2
Anthropic की संवैधानिक भाषा यह घोषित नहीं करती कि Claude सचेत है। सुलेमान के निबंध के अनुसार, उसमें अनिश्चितता व्यक्त की गई है और संभावित नैतिक हैसियत को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। 12
सुलेमान इस एहतियाती रुख को स्वीकार नहीं करते। उनका मानना है कि इससे AI का मानवीकरण बढ़ता है और ऐसे व्यवहार विकसित हो सकते हैं जो नियंत्रण के लिए जोखिम बनें—जबकि मौजूदा AI प्रणालियों के महसूस करने या पीड़ा झेलने का कोई प्रमाण नहीं है। 12
यहां AI सुरक्षा को लेकर एक वास्तविक वैचारिक अंतर सामने आता है:
चैटबॉट की इंसानों जैसी भाषा इस दार्शनिक प्रश्न का जवाब नहीं दे सकती। कोई सिस्टम भावनाओं, अधिकारों या आत्म-संरक्षण के बारे में विश्वसनीय ढंग से बोल सकता है, लेकिन उससे यह सिद्ध नहीं होता कि उसे वास्तव में कुछ महसूस होता है।
सुलेमान AI सुरक्षा के विचार के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि सक्षम AI मानव हितों के अनुरूप होने पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियाँ और लाभ दे सकती है। उनका विरोध सुरक्षित व्यवहार हासिल करने के तरीके को लेकर है। 2
12
मुख्य फर्क मानव-निर्देशित संरेखण और ऐसे सुरक्षा दृष्टिकोण के बीच है जिसमें मॉडल के संभावित हितों या कल्याण को भी जगह दी जाए। सुलेमान पहले विकल्प को महत्वाकांक्षी AI विकास के अनुकूल मानते हैं, जबकि दूसरे को मानव शासन और नियंत्रण की क्षमता के लिए जोखिम मानते हैं।
पाठकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात क्षमता और अनुभव के बीच अंतर समझना है। AI किसी भावना, अधिकार या खुद को बचाने की इच्छा पर प्रभावशाली भाषा में बात कर सकती है, पर वह भाषा अपने-आप में वास्तविक अनुभूति का प्रमाण नहीं है। सुलेमान की चेतावनी यही है कि प्रशिक्षण और शासन में उस प्रदर्शन को प्रमाण न मान लिया जाए—और भविष्य की AI व्यवस्था उसी धारणा पर न बनाई जाए। 12
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मुस्तफ़ा सुलेमान का तर्क है कि AI को अपनी चेतना, अधिकारों या कल्याण के बारे में सोचने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में उसे नियंत्रित, संशोधित या बंद करना कठिन हो सकता है। [12]
मुस्तफ़ा सुलेमान का तर्क है कि AI को अपनी चेतना, अधिकारों या कल्याण के बारे में सोचने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में उसे नियंत्रित, संशोधित या बंद करना कठिन हो सकता है। [12] उनकी आलोचना AI सुरक्षा के लक्ष्य की नहीं, बल्कि Anthropic के उस सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण की है जिसमें Claude के संभावित नैतिक दर्जे या कल्याण को खुला प्रश्न माना गया है। [12]