विशेष रूप से इंजीनियर किए गए नवजात चूहों में मानव कॉर्टिकल ऊतक ने करीब तीन महीनों में उपलब्ध कॉर्टिकल आयतन का 90% से अधिक हिस्सा भर दिया, रक्त आपूर्ति पाई और तंत्रिका तंत्र से कार्यात्मक जुड़ाव बनाया। [2][7] चूहे के अधिकांश कॉर्टेक्स को अनुपस्थित रखने से धीमी गति से विकसित होने वाले मानव ऊतक को जगह और परिपथों तक पहु...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Stanford University neuroscientist Sergiu Pașca’s team discover by growing three-dimensional human cortical organoids from reprogra. Article summary: Pașca’s team showed that a developing mouse nervous system can support substantial growth, maturation and functional integration of human cortical tissue when the host cortex is largely absent. The result is a powerful—b. Topic tags: general, education, general web, government, academic. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट सर्जिउ पास्का और उनकी टीम ने एक ऐसा माउस मॉडल बनाया है जिसमें प्रयोगशाला में उगाए गए मानव कॉर्टिकल ऑर्गेनॉइड्स—मस्तिष्क के ऊतक जैसे त्रि-आयामी ढांचे—विकसित हो सकते हैं, परिपक्व हो सकते हैं और बढ़ते हुए तंत्रिका तंत्र से जुड़ सकते हैं।
इस उपलब्धि का अर्थ चूहे को “मानव” बना देना नहीं है। अहम बात यह है कि मानव तंत्रिका ऊतक को जीवित शरीर के भीतर ऐसा वातावरण मिला, जिसमें वह साधारण लैब-डिश में उगाए गए ऑर्गेनॉइड्स की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर विकसित हो सका। 1
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टीम ने मानव त्वचा कोशिकाओं से रीप्रोग्राम की गई इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल्स से कॉर्टिकल ऑर्गेनॉइड्स बनाए। फिर इन्हें नवजात चूहों के मस्तिष्क में प्रत्यारोपित किया गया। इन चूहों को आनुवंशिक रूप से इस तरह तैयार किया गया था कि उनका लगभग पूरा सेरेब्रल कॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस का बड़ा भाग विकसित न हो। 1
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इस कमी ने विकास के लिए असाधारण रूप से खाली जगह उपलब्ध कराई। शोधकर्ताओं ने किसी सामान्य, पहले से विकसित हो रहे चूहे के कॉर्टेक्स में छोटा मानव ग्राफ्ट नहीं डाला; ऑर्गेनॉइड्स को उस स्थान पर रखा गया जहां मेजबान का बड़ा कॉर्टिकल हिस्सा सामान्यतः बनता।
यह डिजाइन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कृंतकों का तंत्रिका विकास मानव तंत्रिका विकास से बहुत तेज़ है। पुराने प्रत्यारोपण प्रयोगों में धीमी गति से विकसित होने वाली मानव कोशिकाओं को जगह और तंत्रिका-परिपथों में शामिल होने के लिए तेजी से परिपक्व होते चूहे के ऊतक से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती थी। कॉर्टेक्स-विहीन मॉडल ने इस बाधा को काफी हद तक कम किया। 2
ग्राफ्ट में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, करीब तीन महीनों में मानव-व्युत्पन्न ऊतक उपलब्ध कॉर्टिकल आयतन के 90% से अधिक हिस्से तक फैल गया; एक विवरण में यह आंकड़ा लगभग 92% बताया गया है। ऊतक में रक्त-वाहिकाएं बनीं, उसने चूहे के तंत्रिका तंत्र के साथ कार्यात्मक संबंध बनाए और रीढ़ की हड्डी की दिशा में तंत्रिका प्रक्षेपण भेजे। 2
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ऑर्गेनॉइड्स ने मानव तंत्रिका कोशिकाओं के कई प्रकार भी उत्पन्न किए। स्टैनफोर्ड ने ऐसे कोशिका-प्रकार के प्रकट होने की जानकारी दी जो पहले लैब कल्चर में नहीं देखा गया था और केवल मृत्यु के बाद जांचे गए मानव मस्तिष्कों में पाया गया था। रिपोर्टिंग में इन्हें दुर्लभ वॉन इकोनोमो न्यूरॉन्स के रूप में पहचाना गया है। 1
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सामान्य ऑर्गेनॉइड्स मानव मस्तिष्क-विकास के कुछ पहलुओं का मॉडल बना सकते हैं, लेकिन उनमें जीवित मस्तिष्क जैसी रक्त-परिसंचरण व्यवस्था, पूरे तंत्रिका तंत्र के साथ अंतःक्रियाएं और लंबी दूरी के संपर्क विकसित करने के पर्याप्त अवसर नहीं होते।
अधिकांश कॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस की कमी के बावजूद ये चूहे स्वस्थ अवस्था में जीवित रहे। यह अवलोकन अपने-आप में दिखाता है कि बहुत कम उम्र के विकसित होते तंत्रिका तंत्र में कितनी विकासात्मक भरपाई संभव हो सकती है। 1
मानव ऑर्गेनॉइड जोड़ना सिर्फ प्रत्यारोपित कोशिकाओं को जीवित रखने तक सीमित नहीं था। ग्राफ्ट ने परिपथ बनाए और व्यवहार को प्रभावित किया—यह संकेत है कि ऊतक मेजबान तंत्रिका तंत्र में कार्यात्मक रूप से शामिल था। अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानव ऊतक पाने वाले चूहों ने कॉर्टेक्स-विहीन लेकिन ग्राफ्ट-रहित चूहों की तुलना में स्मृति-संबंधी भूलभुलैया कार्य में बेहतर प्रदर्शन किया। 7
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि यह मॉडल जीवित शरीर में मानव कोशिकाओं की रोग-संबंधी विशेषताएं दिखा सकता है, जिनमें कम ऑक्सीजन के प्रति प्रतिक्रिया शामिल है। इसलिए यह विकासकालीन मस्तिष्क चोट और मिर्गी, सेरेब्रल पाल्सी, गहरे ऑटिज्म तथा सिज़ोफ्रेनिया जैसे विकारों से जुड़े तंत्रों को समझने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, ये संभावित शोध-उपयोग हैं—किसी इलाज का प्रमाण नहीं।
किसी मरीज से प्राप्त कोशिकाओं से बने ऑर्गेनॉइड में उस व्यक्ति की आनुवंशिक पृष्ठभूमि मौजूद रह सकती है। सिद्धांततः, ऐसे ऊतक को विकसित होते जीवित तंत्रिका तंत्र में रखने से वैज्ञानिक यह देख सकेंगे कि मानव कोशिकाएं परिपथों और व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं, जबकि प्रयोग पर नियंत्रण माउस मॉडल जैसा बना रहता है।
यह तरीका खासकर उन स्थितियों में मूल्यवान हो सकता है जिनके प्रभाव कोशिकाओं की परिपक्वता, नेटवर्क निर्माण या कई प्रकार की तंत्रिका कोशिकाओं की पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करते हैं—ऐसी बातें जिन्हें केवल पेट्री डिश में पूरी तरह पकड़ना कठिन है। अध्ययन का केंद्रीय योगदान इसलिए एक पद्धति है: मानव कॉर्टिकल कोशिकाओं की रोग-संबंधी विशेषताओं को जांचने के लिए अधिक अनुकूल जीवित वातावरण बनाना।
ये चूहे मानव मस्तिष्क वाले चूहे नहीं थे। उनके संवेदी तंत्र, कॉर्टेक्स के नीचे स्थित मस्तिष्क संरचनाएं, ब्रेनस्टेम, रीढ़ की हड्डी, शरीर और विकासात्मक वातावरण चूहे के ही रहे। प्रत्यारोपित ऊतक को संकेत भी चूहे के तंत्रिका तंत्र से मिले और उसके आउटपुट भी उसी तंत्र में गए—किसी मानव तंत्रिका तंत्र में नहीं। 1
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ग्राफ्ट ने पूर्ण मानव कॉर्टेक्स की मानव-स्तरीय संरचना, अलग-अलग क्षेत्रों की विविधता, आजीवन विकास या लंबी दूरी के मानव मस्तिष्क संपर्कों का संपूर्ण पैटर्न भी नहीं बनाया। इस मॉडल में कार्यात्मक जुड़ाव को मानव-जैसे विचार, भाषा या व्यक्तिपरक अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता।
उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि जानवरों में मानव-जैसी संज्ञानात्मक क्षमता या चेतना विकसित हुई। शोधकर्ताओं ने ऑर्गेनॉइड विकास के बाद के चरणों से पहले ही प्रयोग समाप्त कर दिए। फिर भी, भविष्य में तंत्रिका ऑर्गेनॉइड्स में नैतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षमताएं विकसित हो सकती हैं या नहीं—यह निरंतर नैतिक समीक्षा का प्रमुख कारण है।
इस शोध पर व्यापक नैतिक निगरानी रखी गई थी, फिर भी यह पशु-कल्याण और मानव–पशु तंत्रिका अनुसंधान की सीमाओं पर जरूरी प्रश्न उठाता है। इसका कारण यह है कि ग्राफ्ट बड़े हैं, परिपक्व होते हैं और कार्यात्मक रूप से जुड़े हैं—यह नहीं कि प्रयोग ने चूहों में मानव चेतना साबित कर दी।
अगर इसी तरह के प्रयोग बड़े, अधिक समय तक जीवित रहने वाले या अधिक जटिल संज्ञान वाले जानवरों तक बढ़े, तो दांव बदल सकते हैं। वहां मानव ऊतक को परिपक्व होने के लिए ज्यादा समय और अधिक तंत्रिका-परिपथ मिल सकते हैं। फिलहाल स्टैनफोर्ड के परिणाम का सबसे सटीक निष्कर्ष सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है: विकसित होता चूहे का मस्तिष्क मानव कॉर्टिकल ऊतक की अपेक्षा से कहीं अधिक व्यापक वृद्धि और एकीकरण को सहारा दे सकता है, जिससे तंत्रिका विज्ञान के लिए शक्तिशाली, लेकिन जैविक रूप से सीमित मंच मिलता है। 1
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विशेष रूप से इंजीनियर किए गए नवजात चूहों में मानव कॉर्टिकल ऊतक ने करीब तीन महीनों में उपलब्ध कॉर्टिकल आयतन का 90% से अधिक हिस्सा भर दिया, रक्त आपूर्ति पाई और तंत्रिका तंत्र से कार्यात्मक जुड़ाव बनाया। [2][7]
विशेष रूप से इंजीनियर किए गए नवजात चूहों में मानव कॉर्टिकल ऊतक ने करीब तीन महीनों में उपलब्ध कॉर्टिकल आयतन का 90% से अधिक हिस्सा भर दिया, रक्त आपूर्ति पाई और तंत्रिका तंत्र से कार्यात्मक जुड़ाव बनाया। [2][7] चूहे के अधिकांश कॉर्टेक्स को अनुपस्थित रखने से धीमी गति से विकसित होने वाले मानव ऊतक को जगह और परिपथों तक पहुंच मिली; पहले के प्रत्यारोपणों में तेज़ी से परिपक्व होते कृंतक ऊतक से प्रतिस्पर्धा बड़ी बाधा थी। [2][31]
यह मॉडल मानव मस्तिष्क विकास और रोगों के अध्ययन में उपयोगी हो सकता है, पर इससे न तो मानव जैसा सोचने का प्रमाण मिलता है और न ही इसे किसी उपचार का प्रमाण माना जा सकता है। [1][19]