वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के 70वें महासम्मेलन ने साफ कर दिया कि अमेरिका-ईरान विवाद अब केवल परमाणु निरीक्षणों तक सीमित नहीं रहा। इसमें कूटनीतिक दबाव, सैन्य चेतावनियां, प्रतिनिधित्व को लेकर टकराव और होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजरानी की असुरक्षा भी जुड़ गई है। मूल गतिरोध वही है—ईरान का यूरेनियम संवर्धन और IAEA निरीक्षकों की पहुंच—लेकिन दोनों पक्षों की भाषा और कदम अधिक टकरावपूर्ण हो गए हैं।
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अमेरिका का प्रस्ताव: संवर्धन छोड़िए, बाहर से ईंधन पाइए
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि यदि ईरान अपने देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन को स्थायी रूप से समाप्त कर दे, तो अमेरिका उसके लिए विदेश से परमाणु ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था का समर्थन करेगा। यानी वॉशिंगटन ने एक संभावित कूटनीतिक रास्ता सुझाया, पर उसकी शर्त ईरान के घरेलू संवर्धन कार्यक्रम का अंत है।
राइट ने कहा कि अमेरिका बातचीत से समाधान चाहता है, लेकिन यह भी चेतावनी दी कि अन्यथा ईरान को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका ने ईरान से IAEA के साथ पूर्ण सहयोग और निरीक्षकों को पहुंच देने की मांग भी दोहराई।
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ईरान के परमाणु प्रमुख को वियना में प्रवेश नहीं
तनाव का एक अहम प्रतीक मोहम्मद इस्लामी को ऑस्ट्रिया में प्रवेश न मिलने का मामला रहा। इस्लामी ईरान के परमाणु मामलों के उपराष्ट्रपति और एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान के प्रमुख हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के विरोध के बाद ऑस्ट्रिया ने उन्हें प्रतिबंध-छूट नहीं दी, जिससे वे IAEA सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित नहीं कर सके।
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तेहरान ने इसे केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं माना। ईरानी राजदूत रेज़ा नजफ़ी ने कहा कि यह ईरान के अधिकारों और देशों की संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। ईरान ने ऑस्ट्रिया के कार्यवाहक राजनयिक को भी तलब किया।
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निरीक्षण और पिकऐक्स माउंटेन पर बढ़ता विवाद
IAEA बोर्ड पहले ही ईरान पर मांगी गई जानकारी और निरीक्षण पहुंच न देने को लेकर दबाव बढ़ा रहा था। एजेंसी के समक्ष चिंता यह है कि वह ईरान के घोषित परमाणु पदार्थों और संबंधित सुविधाओं की पर्याप्त पुष्टि नहीं कर पा रही है।
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इसी बीच IAEA ने भारी सुरक्षा वाले पिकऐक्स माउंटेन स्थल पर निर्माण गतिविधि देखे जाने की बात कही। हालांकि एजेंसी ने यह नहीं कहा कि वहां वास्तव में कौन-सी गतिविधियां हो रही हैं। ईरान ने संबंधित आरोपों को “मीडिया हाइप” बताया और कहा कि वह IAEA के सुरक्षा-निगरानी दायित्वों का पालन कर रहा है।
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सैन्य बयानबाजी और बातचीत का ठहराव
अमेरिकी संदेशों में यह संकेत और मजबूत हुआ कि कूटनीति विफल होने पर ईरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करने का विकल्प अपनाया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने निरीक्षणों को व्यावहारिक रूप से कठिन बना दिया है। तेहरान ने साथ ही यह भी कहा कि वह सद्भावनापूर्ण बातचीत के लिए तैयार है और परमाणु हथियार नहीं चाहता।
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उपलब्ध जानकारी से इतना स्पष्ट है कि वार्ता और सत्यापन की प्रक्रिया गतिरोध में है। लेकिन निरीक्षण संकट के लिए जिम्मेदारी किसकी है और क्षेत्रीय सैन्य घटनाओं का क्रम क्या रहा, इन पर अमेरिका और ईरान के दावे परस्पर विरोधी हैं; स्रोत इन दावों का स्वतंत्र अंतिम निपटारा नहीं करते।
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होरमुज़ में टैंकर घटना ने जोखिम बढ़ाया
परमाणु टकराव का असर समुद्री सुरक्षा पर भी दिखाई दिया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि पनामा के ध्वज वाला तेल टैंकर एल गैया एक प्रतिबंधित नौवहन क्षेत्र में नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराया और उसमें आग लग गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस विवरण को खारिज किया। उसके अनुसार, टैंकर को पहले एक ईरानी मिसाइल ने निशाना बनाया था, जिससे वह निष्क्रिय हो गया, और बाद में उस पर ड्रोन से हमला हुआ। रॉयटर्स ने दोनों परस्पर विरोधी दावों की रिपोर्ट दी है; इसलिए घटना के सटीक क्रम और जिम्मेदारी पर विवाद बना हुआ है।
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निष्कर्ष
वियना सम्मेलन में कूटनीति की बात जरूर हुई, लेकिन उसके लिए जरूरी आधार कमजोर होते दिखे—निरीक्षकों की पहुंच, स्वीकार्य सुरक्षा-निगरानी व्यवस्था और क्षेत्रीय सैन्य घटनाओं पर न्यूनतम साझा समझ। अमेरिका का ईंधन-आपूर्ति प्रस्ताव एक संभावित रास्ता है, पर उसके साथ दी गई सैन्य चेतावनी और ईरानी प्रतिनिधि को रोके जाने जैसे कदम बताते हैं कि समझौते की जमीन फिलहाल और कठिन हो गई है।