कुशनर ने दोहा हमले को “भयानक” और सैन्य रूप से असफल बताया; उनके मुताबिक इससे इज़रायल वैश्विक स्तर पर अलग थलग पड़ा और अमेरिका को समझौते के लिए दबाव बनाने का अवसर मिला। [3][13] नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का कहना है कि गाज़ा सिटी में सैन्य कार्रवाई, दोहा हमला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव ने हमास को अपनी मांगें छोड...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Jared Kushner say about how the Trump administration used Israel’s international isolation after its unsuccessful September 9, 2025. Article summary: Kushner said the Doha strike was “a terrible thing” and an unsuccessful military operation that left Israel “globally isolated.” He said the Trump administration exploited that diplomatic vulnerability to press Israel in. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
जेरेड कुशनर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर किए गए इज़रायली हमले के बाद पैदा हुए कूटनीतिक संकट को वार्तागत दबाव में बदला। उनके मुताबिक यह अभियान सैन्य रूप से सफल नहीं रहा, इज़रायल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर गया और इसी बदली हुई स्थिति का इस्तेमाल वॉशिंगटन ने गाज़ा युद्धविराम तथा बंधक-समझौते के लिए किया। 3
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कुशनर ने दोहा हमले को “भयानक” बताया और कहा कि वह “सैन्य अभियान के रूप में असफल” रहा। उनके शब्दों में, इससे इज़रायल “वैश्विक स्तर पर अलग-थलग” हो गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ताकारों ने इस परिस्थिति का उपयोग इज़रायल को ऐसे समझौते की ओर धकेलने में किया, जिससे वह अब संतुष्ट है। 3
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उनका तर्क यह नहीं था कि हमले की सैन्य सफलता से समझौता हुआ। बल्कि, उनके अनुसार इसकी राजनीतिक कीमत—अंतरराष्ट्रीय निंदा और इज़रायल की कमजोर कूटनीतिक स्थिति—ने अमेरिका को इज़रायल पर दबाव बढ़ाने का अवसर दिया। समझौते पर बातचीत पहले से चल रही थी। 9
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9 सितंबर 2025 के हमले में दोहा स्थित हमास से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया था। हमास ने कहा कि उसके वरिष्ठ नेता बच गए, जबकि बीबीसी के अनुसार पांच निचले स्तर के हमास सदस्य और एक क़तरी सुरक्षा अधिकारी मारे गए। कतर ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। 17
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उसी महीने बाद में, बीबीसी द्वारा उद्धृत व्हाइट हाउस के विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर के प्रधानमंत्री से क़तरी सुरक्षा अधिकारी की मौत और कतर की संप्रभुता के उल्लंघन पर खेद जताया। उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल भविष्य में ऐसा हमला नहीं करेगा। 17
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने कुशनर की व्याख्या खारिज कर दी। पार्टी का कहना था कि गाज़ा सिटी में अभियान बढ़ाने का फैसला, कतर में हमास नेतृत्व पर हमला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव—इन सबने मिलकर हमास को अपनी मांगें छोड़ने और बचे हुए बंधकों को रिहा करने पर सहमत होने के लिए मजबूर किया।
दोनों पक्ष एक ही घटना को बिल्कुल अलग ढंग से देखते हैं:
ये संबंधित पक्षों के राजनीतिक आकलन हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं होता कि किसी एक कार्रवाई ने अकेले समझौता कराया।
प्रारंभिक युद्धविराम और बंधक व्यवस्था के बाद विवाद गाज़ा के अगले चरण पर केंद्रित हो गया। अमेरिका समर्थित रूपरेखा में हमास के हथियार और शासन-अधिकार छोड़ने, इज़रायली बलों की वापसी, हमास की जगह फ़िलिस्तीनी प्रशासन और एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की संभावना शामिल थी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कौन पहले क्या करेगा। अगस्त 2026 में रॉयटर्स ने बताया कि इज़रायल और हमास अपनी मूल मांगों पर अड़े रहे और वार्ता बिना सफलता समाप्त हुई। रिपोर्ट की गई रूपरेखा में हमास का चरणबद्ध निरस्त्रीकरण और इज़रायल की चरणबद्ध वापसी शामिल थी, जबकि हमास का कहना था कि क्रियान्वयन के लिए इज़रायल को पहले अपनी प्रतिबद्धताएं निभानी होंगी।
दूसरी ओर, इज़रायल का कहना है कि हमास के व्यापक और सत्यापन योग्य निरस्त्रीकरण से पहले वह आगे सैनिकों की तैनाती नहीं बदलेगा या वापसी नहीं करेगा। अमेरिकी और इज़रायली अधिकारियों ने पुनर्निर्माण को भी निरस्त्रीकरण से जोड़ा है।
कुशनर की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि उनकी नजर में अक्टूबर 2025 का समझौता कैसे संभव हुआ: दोहा हमले के बाद इज़रायल की कूटनीतिक कमजोरी को अमेरिका ने वार्ता में इस्तेमाल किया। इज़रायल की सत्तारूढ़ पार्टी उसी घटना को हमास के खिलाफ दबाव अभियान का हिस्सा मानती है।
मगर अधिक महत्वपूर्ण और अब भी अनसुलझा प्रश्न क्रियान्वयन का है—हमास का सत्यापन योग्य निरस्त्रीकरण, इज़रायली वापसी का समय और दायरा, गाज़ा का पुनर्निर्माण, तथा हमास के बिना किसी नए प्रशासन का वहां प्रभावी ढंग से सत्ता संभाल पाना।
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कुशनर ने दोहा हमले को “भयानक” और सैन्य रूप से असफल बताया; उनके मुताबिक इससे इज़रायल वैश्विक स्तर पर अलग थलग पड़ा और अमेरिका को समझौते के लिए दबाव बनाने का अवसर मिला। [3][13]
कुशनर ने दोहा हमले को “भयानक” और सैन्य रूप से असफल बताया; उनके मुताबिक इससे इज़रायल वैश्विक स्तर पर अलग थलग पड़ा और अमेरिका को समझौते के लिए दबाव बनाने का अवसर मिला। [3][13] नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का कहना है कि गाज़ा सिटी में सैन्य कार्रवाई, दोहा हमला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव ने हमास को अपनी मांगें छोड़ने तथा बचे बंधकों की रिहाई मानने के लिए प्रेरित किया। [48][58]
बाद की वार्ता का मुख्य गतिरोध क्रम को लेकर है: हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण के बदले इज़रायली वापसी, पुनर्निर्माण और गाज़ा में गैर हमास प्रशासन की स्थापना। [34][44][46]