तो लाम के 7–12 सितंबर के रूस और फ्रांस दौरे का सबसे बड़ा नतीजा दो समानांतर मोर्चों पर दिखा। एक ओर वियतनाम ने रूस के साथ अपनी पुरानी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को फिर सक्रिय करने का संकेत दिया; दूसरी ओर, फ्रांस के साथ अपेक्षाकृत नई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को उन्नत तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, रेल, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में ठोस रूप दिया। इसका महत्व केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक भी था: हनोई ने एक ही सप्ताह में मॉस्को और पेरिस—दो अलग भू-राजनीतिक ध्रुवों—से सक्रिय संवाद किया।
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रूस: ऊर्जा, परमाणु सहयोग और औद्योगिक संपर्क
मॉस्को में तो लाम और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वियतनाम-रूस व्यापक रणनीतिक साझेदारी को “नए युग” में और मजबूत करने का संयुक्त बयान जारी किया। वार्ता के मुख्य विषयों में परमाणु ऊर्जा सहयोग को फिर गहराई देना, तेल एवं गैस, ऊर्जा, परिवहन और रेल संपर्क, अनुसंधान तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी शामिल थे। रूस की इन क्षेत्रों में ऐतिहासिक क्षमता है, जबकि वियतनाम ऊर्जा और औद्योगिक विकास के व्यावहारिक विकल्पों का विस्तार करना चाहता है।
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फ्रांस: विज्ञान, तकनीक और नौ सहयोग समझौते
पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने वियतनाम-फ्रांस व्यापक रणनीतिक साझेदारी के क्रियान्वयन की पुष्टि की। विज्ञान और प्रौद्योगिकी को ऊर्जा तथा एयरोस्पेस के साथ एक प्रमुख नए स्तंभ के रूप में स्थापित किया गया।
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दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा, पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह, महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्व, जल प्रबंधन, रेल अवसंरचना, विमानन और परिवहन समेत नौ समझौतों अथवा सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। एयरबस, थेल्स और एल्स्टॉम जैसी कंपनियों की भागीदारी ने यात्रा को केवल प्रतीकात्मक राजनयिक आयोजन नहीं रहने दिया, बल्कि इसे व्यावसायिक और प्रौद्योगिकी-सहयोग का ठोस आधार भी दिया।
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फ्रांस ने यह भी दोहराया कि वह वियतनाम को अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।
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अंतरिक्ष: विकास और आपदा-सहनशीलता का नया क्षेत्र
तो लाम ने पेरिस में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और “स्पेस फॉर डेवलपमेंट एंड रेज़िलिएंस” नेटवर्क का प्रस्ताव रखा। इसका लक्ष्य अंतरिक्ष और पृथ्वी-अवलोकन तकनीकों को आपदा-प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन, जल प्रबंधन, कृषि, अवसंरचना नियोजन और वियतनाम के डिजिटल-तकनीकी उन्नयन से जोड़ना है।
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इसका रणनीतिक पक्ष यह है कि उपग्रह-आधारित आंकड़े केवल अंतरिक्ष कार्यक्रम का विषय नहीं रहते; वे बाढ़, मौसम, कृषि और शहरी नियोजन जैसे विकास संबंधी फैसलों के लिए उपयोगी साधन बन सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा में विकल्पों का विस्तार
फ्रांस वियतनाम के लिए ऊर्जा संक्रमण, बिजली ग्रिड और रेल आधुनिकीकरण, एयरोस्पेस तथा संभावित असैन्य परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञता का पश्चिमी साझेदार बन सकता है। रूस, दूसरी ओर, पारंपरिक ऊर्जा, तेल-गैस और परमाणु सहयोग में महत्वपूर्ण संभावित भागीदार बना हुआ है।
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यहां रणनीतिक लाभ किसी एक देश पर निर्भरता नहीं, बल्कि आपूर्तिकर्ताओं, तकनीकों, वित्त और विशेषज्ञता के स्रोतों में विविधता लाना है।
यूरोप, आसियान और ‘बैंबू डिप्लोमेसी’ का संकेत
फ्रांस की हिंद-प्रशांत रुचि वियतनाम को दक्षिण-पूर्व एशिया में पेरिस के लिए उपयोगी साझेदार बनाती है। बदले में वियतनाम को यूरोपीय तकनीक, निवेश और राजनीतिक सहयोग तक एक अतिरिक्त रास्ता मिलता है। इस तरह द्विपक्षीय परियोजनाएं आसियान की केंद्रीय भूमिका, यूरोप के साथ आर्थिक संबंधों और जलवायु संक्रमण के वियतनामी लक्ष्यों से जुड़ती हैं।
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रूस और फ्रांस की लगातार यात्राओं ने वियतनाम की उस विदेश-नीति शैली को भी दिखाया, जिसे अक्सर “बैंबू डिप्लोमेसी” कहा जाता है—यानी सिद्धांतों पर स्थिर रहते हुए अलग-अलग शक्तियों के साथ लचीले, व्यावहारिक संबंध। निर्यात-निर्भर वियतनामी अर्थव्यवस्था के सामने व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बीच बाजारों, निवेश स्रोतों और रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार विशेष महत्व रखता है।
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आगे क्या?
रॉयटर्स के अनुसार, तो लाम के 21 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने की अपेक्षा थी। नियोजित अमेरिकी यात्रा के बाद कनाडा की राजकीय यात्रा की भी उम्मीद जताई गई थी। ये योजनाएं उस समय संभावित थीं, पूरी हो चुकी यात्राएं नहीं।
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यदि यह क्रम साकार होता है, तो इसका संदेश स्पष्ट होता: वियतनाम रूस, यूरोप, उत्तर अमेरिका और बहुपक्षीय संस्थानों—सभी के साथ सार्थक रिश्ते बढ़ाना चाहता है, लेकिन प्रतिस्पर्धी महाशक्ति-गुटों में औपचारिक रूप से किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता।
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अंततः, इस दौरे ने राजनीतिक दिशा, सहयोग के ढांचे और कई समझौते दिए हैं। इसकी स्थायी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वित्तपोषण, तकनीक हस्तांतरण की शर्तें, प्रतिबंध एवं निर्यात-नियंत्रण संबंधी बाधाएं, और परमाणु, रेल, उपग्रह व महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाएं वास्तविक निवेश वाली योजनाओं में कितनी बदलती हैं।