सऊदी अरब ने कहा है कि इराकी क्षेत्र से लॉन्च किए गए ड्रोन हमले में उसकी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को निशाना बनाया गया। रियाद और मदीना क्षेत्रों में हुए इस हमले में लोगों के घायल होने और ढांचागत नुकसान की सूचना है। एहतियाती कदम के तौर पर पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
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क्या हुआ था?
सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार को इराक से आए कई ड्रोन ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को निशाना बनाया। मंत्रालय ने कहा कि हमलों से रियाद और मदीना क्षेत्रों में मानव चोटें तथा भौतिक नुकसान हुआ। ऊर्जा मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, पाइपलाइन को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद किया गया।
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यह पाइपलाइन इतनी अहम क्यों है?
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल को देश के आर-पार लाल सागर तट की ओर ले जाती है। इसका रणनीतिक महत्व इस बात में है कि यह निर्यात के लिए ऐसा वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी व्यवधान की स्थिति में उपयोगी हो सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, यह मार्ग जलडमरूमध्य में पैदा हुई रुकावट को कम करने में मदद करता रहा है।
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इसलिए अस्थायी बंदी को केवल घरेलू ऊर्जा अवसंरचना पर हमला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तेल-आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा की परीक्षा के रूप में भी देखा गया। हालांकि, अस्थायी रुकावट का अर्थ अपने-आप स्थायी निर्यात-क्षमता हानि नहीं है।
ड्रोन कहां से लॉन्च हुए थे?
इराक ने पुष्टि की कि हमले उसकी धरती से लॉन्च हुए थे। इराकी अधिकारियों के अनुसार, लॉन्च स्थल ईरानी सीमा के निकट स्थित मैसान प्रांत में था। प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने मैसान ऑपरेशंस कमांड की जांच का आदेश दिया और उसके कमांडर को पद से हटा दिया।
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लेकिन ड्रोन इराक से लॉन्च होने की पुष्टि और हमला करने वाले समूह की पहचान, दो अलग बातें हैं। सऊदी अरब ने केवल इतना कहा कि ड्रोन इराक से आए थे। इराक में ईरान-समर्थित मिलिशिया सक्रिय हैं और सऊदी अरब पहले भी ऐसे समूहों पर तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के आरोप लगा चुका है। फिर भी, उपलब्ध रिपोर्टिंग में न सऊदी अरब और न ही इराक ने किसी नामित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है, और किसी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली थी।
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सऊदी अरब ने तत्काल जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं की?
सऊदी अरब ने कहा कि उसने इराकी प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी के अनुरोध पर शुरुआती चरण में जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया। इससे बगदाद को जांच और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई का समय मिला। साथ ही रियाद ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा, क्षेत्र, अवसंरचना और नागरिकों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
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इराक ने भी हमले की निंदा की और कहा कि वह अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र को किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देगा।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
हमले की अरब और इस्लामी देशों व संगठनों ने निंदा की। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) और मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई। GCC ने इसे सऊदी सुरक्षा, क्षेत्र और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को प्रभावित करने वाला खतरनाक उकसाव बताया।
पाकिस्तान, मिस्र, इराक, जॉर्डन, सीरिया, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और फिलिस्तीन सहित कई देशों की ओर से भी निंदा दर्ज की गई। अरब लीग ने सऊदी अवसंरचना को निशाना बनाए जाने को सऊदी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।
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अभी क्या स्पष्ट है और क्या नहीं?
उपलब्ध रिपोर्टिंग से चोटों, नुकसान, पाइपलाइन की अस्थायी बंदी और इराकी जांच की पुष्टि होती है। लेकिन किसी खास मिलिशिया की जिम्मेदारी या इस हमले का हर अन्य क्षेत्रीय कूटनीतिक अथवा सुरक्षा घटनाक्रम से प्रत्यक्ष संबंध अभी सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।