रिपोर्टेड आकलनों के अनुसार, रूस ने जेट संचालित गेरान ड्रोन के प्रक्षेपण जून में करीब 300 से बढ़ाकर जुलाई में 1,500 और अगस्त में लगभग 2,500 कर दिए। पुराने पिस्टन इंजन गेरान 2/शाहेद आम तौर पर 180–200 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ते हैं, जबकि जेट संस्करणों की क्रूज़ गति 300–400 किमी/घंटा और गेरान 4 की अधिकतम गति करीब 500...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did Russia’s use of jet-powered Geran drones against Ukraine change from June through August, what are the drones’ speed, origins, and i. Article summary: Russia’s summer shift was from a largely propeller-driven Shahed/Geran campaign to a rapidly expanding jet-powered Geran force—roughly 300 launches in June, about 1,500 in July, and an estimated 2,500 in August. That cha. Topic tags: general, general web, user generated, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
रूस के 2026 के ग्रीष्मकालीन ड्रोन अभियान में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया: जेट-संचालित गेरान संस्करण यूक्रेन पर हमलों में सीमित उपस्थिति से निकलकर कहीं अधिक प्रमुख हो गए। यह केवल एक नए ड्रोन मॉडल की बात नहीं है। असल मुद्दा गति, चेतावनी के लिए उपलब्ध समय और वायु-रक्षा की लागत का है।
खुले स्रोतों और यूक्रेनी रिपोर्टों पर आधारित आकलनों में जेट-संचालित गेरान के प्रक्षेपण जून में करीब 300, जुलाई में करीब 1,500 और अगस्त में लगभग 2,500 बताए गए हैं। ये स्वतंत्र रूप से सत्यापित कुल आंकड़े नहीं हैं, फिर भी जून से जुलाई के बीच पांच गुना वृद्धि और अगस्त के अंत में तेज ड्रोन की बड़ी संख्या एक ही संकेत देती है: रूस ने इन तेज प्रणालियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। 18
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गेरान परिवार ईरानी मूल के शाहेद डिजाइन से निकला है। इसका सबसे चर्चित रूप शाहेद-136 है, जिसे रूस गेरान-2 के नाम से इस्तेमाल करता है। सार्वजनिक रूप से ज्ञात जेट-संचालित रूपों में गेरान-3, गेरान-4 और गेरान-5 शामिल हैं। 17
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मुख्य अंतर इंजन का है। पुराने गेरान-2/शाहेद प्रकार पिस्टन इंजन का उपयोग करते हैं और उनकी गति आम तौर पर 180–200 किमी/घंटा बताई जाती है। नए जेट-संचालित संस्करणों की क्रूज़ गति लगभग 300–400 किमी/घंटा बताई गई है; गेरान-4 की शीर्ष गति करीब 500 किमी/घंटा तक हो सकती है। गेरान-4 के लिए नया एयरफ्रेम और चीन निर्मित टेलीफ्लाई टर्बोजेट इस्तेमाल होने की भी रिपोर्ट है। 18
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हर मॉडल के तकनीकी विवरण और युद्धक्षेत्र से आने वाली रिपोर्टों में अंतर हो सकता है। फिर भी व्यापक निष्कर्ष स्पष्ट है: जेट इंजन ने इन ड्रोन को पहले के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुए पिस्टन-संचालित सिस्टमों से काफी तेज बना दिया है।
तेज ड्रोन के कारण किसी लक्ष्य को पहचानने, उसकी श्रेणी तय करने, ट्रैक करने और उसे निशाना बनाने के लिए कम समय बचता है। यदि प्रोपेलर वाला इंटरसेप्टर जेट-संचालित लक्ष्य से तेज नहीं है, तो वह पीछे से उसका भरोसेमंद पीछा नहीं कर सकता। जमीन पर तैनात मोबाइल फायर टीमों और कम दूरी की वायु-रक्षा इकाइयों को भी कार्रवाई के लिए बहुत कम समय मिलता है। 18
यहीं लागत की मुश्किल पैदा होती है। यूक्रेन तेज ड्रोन के खिलाफ उन्नत वायु-रक्षा मिसाइलें इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन ऐसी मिसाइलें महंगी और सीमित संख्या में होती हैं। तोपें, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मोबाइल फायर टीम और इंटरसेप्टर ड्रोन विकल्प हैं, मगर सभी की क्षमता और कवरेज की सीमाएं हैं। रूस का संभावित उद्देश्य यही है कि धीमे शाहेदों के खिलाफ कारगर रहे कम लागत वाले अवरोधन उपाय कम भरोसेमंद हो जाएं, जबकि हमले बड़े पैमाने पर जारी रखे जा सकें। 24
ये नए सिस्टम अजेय नहीं हैं। रिपोर्टों में इनके अधिक महंगे होने और धीमे प्रोपेलर-चालित संस्करणों की तुलना में संभवतः कम दूरी तक उड़ पाने जैसे समझौते बताए गए हैं। लेकिन रक्षकों के सामने तत्काल समस्या बहुत छोटी हो चुकी कार्रवाई-समय सीमा है। 24
यूक्रेन केवल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय तेज इंटरसेप्टर जोड़कर लागत का संतुलन अपने पक्ष में रखने की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने Alexa Spatium नाम के जेट-संचालित इंटरसेप्टर की जानकारी सार्वजनिक की है। इसकी अधिकतम गति 600 किमी/घंटा तक बताई जाती है और इसे नए गेरान संस्करणों समेत तेज, नीचे उड़ने वाले खतरों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। 23
ब्रिटिश-यूक्रेनी कंपनी Firebolt Engineering ने Griffen नाम का जेट-संचालित, फिक्स्ड-विंग इंटरसेप्टर विकसित किया है, जिसकी गति 350 किमी/घंटा से अधिक बताई गई है। कंपनी और यूक्रेनी रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रणाली ने जुलाई में शाहेद/गेरान-2 श्रेणी के ड्रोन का युद्ध में अवरोधन किया। यह एक अहम संकेत है, हालांकि इसकी क्षमताओं और युद्ध में उपयोग के दावों को कंपनी-संबद्ध तथा युद्धकालीन रिपोर्टिंग के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित कार्यक्रम आंकड़ों के रूप में। 23
SkyFall ने भी अपना P1-SUN Jetkiller तेज इंटरसेप्टर प्रदर्शित किया है, जिसका लक्ष्य विशेष रूप से जेट-संचालित शाहेद का मुकाबला करना है। व्यापक लक्ष्य यह है कि पर्याप्त संख्या में सस्ते और जल्दी बनाए जा सकने वाले इंटरसेप्टर तैनात हों, ताकि सीमित मिसाइल-आधारित वायु-रक्षा को उन खतरों के लिए बचाया जा सके जिनके लिए उसकी जरूरत वास्तव में अधिक है।
यूरोपीय उद्योग भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टिंग में Frankenburg Technologies की Mark I कम लागत वाली निर्देशित वायु-रक्षा मिसाइल अवधारणा का उल्लेख है, जिसका उद्देश्य अवरोधन लागत घटाना और बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव बनाना है। यूक्रेन और MBDA Deutschland ने भी वायु-रक्षा प्रणालियों—जिसमें ड्रोन-रोधी काम शामिल है—पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने का ढांचा बनाया है। 23
हालांकि ये परियोजनाएं तुरंत राष्ट्रीय वायु-रक्षा नेटवर्क का विकल्प नहीं बन सकतीं। प्रभावी रक्षा के लिए सेंसर, कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क, प्रशिक्षित दल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, तैनाती का फैलाव और पर्याप्त उत्पादन क्षमता—सिर्फ तेज एयरफ्रेम नहीं—जरूरी हैं।
अगस्त के अंत तक लंबे समय तक चलने वाले रूसी हमलों में जेट-संचालित ड्रोन अधिक दिखाई देने लगे थे। रॉयटर्स ने बताया कि कीव और आसपास के क्षेत्र में हमले पांचवें दिन तक खिंच गए; कई जेट-संचालित ड्रोन वाले झुंडों ने राजधानी और आसपास के इलाकों का सामान्य जीवन बाधित किया।
अधिक संख्या में और तेज हथियारों से बिजली, परिवहन, आवास, चिकित्सा सेवाओं और दूसरे नागरिक ढांचे की रक्षा पर दबाव बढ़ता है। खतरा तब और बढ़ जाता है जब हमले में स्ट्राइक ड्रोन, डिकॉय, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल एक साथ शामिल हों, क्योंकि रक्षकों को अपने सबसे सीमित हथियारों का इस्तेमाल किस लक्ष्य पर करना है, इसका त्वरित निर्णय लेना पड़ता है।
जेट-संचालित गेरान अकेले इस्तेमाल नहीं हो रहे। रूस ने यूक्रेन के काला सागर तट पर शाहेद/गेरान ड्रोन और मिसाइलों के साथ Banderol प्रकार के लोइटरिंग म्यूनिशन भी तैनात किए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, रूस ओडेसा के आसपास बंदरगाह और रेल ढांचे पर Banderol तथा गेरान-4 प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहा था। 10
इसका आर्थिक असर तुरंत पड़ सकता है। intellinews द्वारा उद्धृत रिपोर्ट के मुताबिक, 29–30 अगस्त को बार-बार हुए हमलों ने ओडेसा में माल ढुलाई के कामकाज को बाधित किया और यूक्रेनी पोर्ट्स एसोसिएशन के अनुसार दैनिक जहाज यातायात सात या आठ से घटकर एक रह गया। 12 ऐसे हमले यूक्रेन के बंदरगाह संचालन और अनाज-निर्यात गलियारे पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
जून से अगस्त के बीच जेट-संचालित गेरान के रिपोर्टेड विस्तार को रूस के औद्योगिक और सामरिक अनुकूलन के रूप में देखना चाहिए। तेज एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन यूक्रेन के लिए अपनी मौजूदा रक्षा व्यवस्था के सबसे सस्ते हिस्सों पर निर्भर रहना कठिन बनाते हैं।
इसलिए यूक्रेन का जवाब भी उत्पादन की चुनौती है: बड़ी संख्या में तेज इंटरसेप्टर तैयार और तैनात करना, साथ ही पारंपरिक वायु-रक्षा मिसाइलों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की आपूर्ति बनाए रखना। उभरती इंटरसेप्टर परियोजनाएं लागत का संतुलन बेहतर कर सकती हैं। मगर उनकी असली परीक्षा यही होगी कि क्या उन्हें उस पैमाने पर बनाया, नेटवर्क से जोड़ा और तैनात किया जा सकता है जिसकी जरूरत बार-बार होने वाले मिश्रित ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर रहे देश को है।
Studio Global AI
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रिपोर्टेड आकलनों के अनुसार, रूस ने जेट संचालित गेरान ड्रोन के प्रक्षेपण जून में करीब 300 से बढ़ाकर जुलाई में 1,500 और अगस्त में लगभग 2,500 कर दिए।
रिपोर्टेड आकलनों के अनुसार, रूस ने जेट संचालित गेरान ड्रोन के प्रक्षेपण जून में करीब 300 से बढ़ाकर जुलाई में 1,500 और अगस्त में लगभग 2,500 कर दिए। पुराने पिस्टन इंजन गेरान 2/शाहेद आम तौर पर 180–200 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ते हैं, जबकि जेट संस्करणों की क्रूज़ गति 300–400 किमी/घंटा और गेरान 4 की अधिकतम गति करीब 500 किमी/घंटा बताई गई है।
यूक्रेन Alexa Spatium और Firebolt Engineering के Griffen जैसे तेज, अपेक्षाकृत कम लागत वाले इंटरसेप्टर विकसित कर रहा है, लेकिन मिसाइल, रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां अभी भी अनिवार्य हैं।