ईरान ने दबाव की रणनीति में अपनी प्रत्यक्ष राज्य क्षमता को अधिक खुलकर इस्तेमाल किया है—मिसाइल और ड्रोन हमले, खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना को धमकी, और होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजरानी पर पाबंदियां इसके प्रमुख हिस्से हैं। ओमान से जुड़े प्रस्तावित जहाजरानी गलियारे और नए प्रतिबंधित क्षेत्र की योजना से संकेत मिलता है कि तेहरान जल...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has Iran’s strategy for projecting power in the Middle East changed during the more-than-six-month U.S.-Iran war following the October 7. Article summary: Iran’s power projection has shifted from a proxy-led “forward defense” model toward direct, state-controlled coercion: long-range missiles and drones, pressure on Gulf energy infrastructure, and regulated violence agains. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
ईरान की क्षेत्रीय रणनीति अब अधिक प्रत्यक्ष और खुलकर राज्य-नियंत्रित होती दिख रही है। पहले जहां तेहरान काफी हद तक सहयोगी सशस्त्र समूहों और ऐसे दबाव पर निर्भर रहता था जिसमें उसकी भूमिका नकारी जा सके, वहीं अब उसने मिसाइल और ड्रोन हमलों को होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास दबाव तथा खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना को धमकियों के साथ जोड़ा है। इसका उद्देश्य अमेरिका, क्षेत्रीय सरकारों और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए संघर्ष की लागत बढ़ाना प्रतीत होता है—साथ ही तनाव घटाने को बातचीत में सौदेबाजी के औजार के तौर पर बचाए रखना। 6
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सबसे बड़ा बदलाव ईरान की अपनी भूमिका की स्पष्टता है। रॉयटर्स के अनुसार, सितंबर की शुरुआत में ईरान ने अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अमेरिकी बलों ने ईरान के तीन पोतों पर हमला किया। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि आगे के हमलों का जवाब अधिक तेज और अधिक पीड़ादायक हो सकता है। 4
इससे पहले की रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिका के नए हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में उन ठिकानों पर मिसाइलें दागीं जिन्हें उसने अमेरिकी संपत्ति बताया। 9 इन घटनाओं में प्रतिरोध और प्रतिशोध के केंद्र में सिर्फ सहयोगी गुट नहीं, बल्कि ईरान की अपनी राज्य क्षमताएं हैं।
यह तरीका दबाव को ज्यादा तात्कालिक बनाता है, लेकिन ईरान की भूमिका को नकार पाना कठिन भी करता है। प्रत्यक्ष हमले पहुंच और संकल्प का त्वरित प्रदर्शन कर सकते हैं; दूसरी ओर, वे विरोधियों को स्पष्ट सैन्य लक्ष्य देते हैं और तनाव तेजी से बढ़ने का रास्ता खोलते हैं।
तेहरान की रणनीति में होरमुज सबसे बड़ा आर्थिक दांव बन गया है। युद्ध से पहले इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) गुजरती थी। 8 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान ने यहां जहाजरानी पर पाबंदियां कड़ी कीं, जबकि अमेरिका और ईरान दोनों ने सार्वजनिक रूप से मार्ग पर नियंत्रण के प्रतिस्पर्धी दावे किए।
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ईरानी अधिकारियों ने समुद्री आवाजाही को राजनीतिक शर्तों से जोड़ा है। सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रज़ाई ने कहा कि जलडमरूमध्य को फिर खोलने की ईरानी शर्तों में क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और ओमान एक ऐसे पारगमन गलियारे पर सहमत हुए हैं जिसमें तय केंद्रीय चैनल का इस्तेमाल होगा। 2
यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूर्ण बंदी के बजाय नियंत्रित व्यवधान की ओर इशारा करती है। तेहरान पहुंच, मार्ग और पाबंदियों को बातचीत में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है, जबकि सीमित वाणिज्यिक आवागमन का विकल्प बनाए रखता है। बाद में ईरान ने कहा कि वह खाड़ी में नया प्रतिबंधित क्षेत्र और नए शिपिंग कॉरिडोर के नक्शे घोषित करेगा; इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को प्रतिबंध सूची में डाला जा सकता है। 3
होरमुज पर दबाव से ऊर्जा कीमतें, बीमा लागत, जहाजरानी और खाड़ी देशों की राजनीतिक गणनाएं प्रभावित हो सकती हैं। मगर यही व्यवधान ईरान को भी बांधता है। रॉयटर्स ने सितंबर में रिपोर्ट किया कि ईरान करीब सात सप्ताह से इस जलडमरूमध्य के जरिए कच्चे तेल की कोई महत्वपूर्ण मात्रा नहीं भेज पाया था। 15
यही तेहरान की रणनीति का मूल समझौता है: वह जितने प्रभावी ढंग से जलमार्ग बाधित करेगा, उतनी अधिक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लागत लगा सकेगा। लेकिन उतना ही अधिक आर्थिक बोझ खुद पर डालेगा और विरोधियों को उसके समुद्री बलों के खिलाफ कार्रवाई या वैकल्पिक मार्ग विकसित करने का प्रोत्साहन देगा।
नेतृत्व में बदलाव ने सुरक्षा नीति की केंद्रीयता बढ़ाई है। अगस्त में मोहसिन रज़ाई को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने मोहम्मद बाक़ेर ज़ोलक़द्र की जगह ली। यह निकाय ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति का समन्वय करता है। रॉयटर्स ने रज़ाई को प्रमुख कट्टरपंथी और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का करीबी सहयोगी बताया। 12
रज़ाई होरमुज अभियान पर भी प्रमुख सार्वजनिक आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने जलडमरूमध्य खोलने की शर्तें, प्रस्तावित गलियारा और प्रतिबंधित क्षेत्र का खाका रखा है। 2
3 इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि ईरान की पूरी निर्णय-प्रक्रिया पूरी तरह एकजुट है, लेकिन इतना जरूर दिखता है कि समुद्री दबाव की नीति देश के सर्वोच्च सुरक्षा संस्थानों के जरिए सामने रखी जा रही है।
युद्ध की घरेलू आर्थिक लागतें शासन की राजनीतिक स्थिति को सीमित रखती हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अगस्त के अंत की उसकी रिपोर्ट से पहले वाले महीने में वार्षिक मुद्रास्फीति 66% थी और अधिकारियों को चिंता थी कि अतिरिक्त आर्थिक तकलीफ अशांति भड़का सकती है। 1 इसलिए अधिक केंद्रीकृत सुरक्षा रुख का अर्थ स्वतः अधिक घरेलू मजबूती नहीं है।
उपलब्ध संकेत एक मिश्रित रणनीति की ओर इशारा करते हैं:
कूटनीति भी संघर्ष को फिर भड़कने से नहीं रोक पाई है। रॉयटर्स के अनुसार, जून में हुआ अंतरिम युद्धविराम बाद में टूट गया, जबकि अतिरिक्त अमेरिकी आर्थिक दबाव के बीच वार्ताएं गतिरोध में रहीं। 1
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जोखिम सिर्फ होरमुज के पूर्ण बंद होने का नहीं है। किसी जहाज पर हमला, खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना, या अमेरिकी बलों के साथ नया सैन्य टकराव—इनमें से कोई भी घटना नियंत्रित दबाव को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है। ईरान की बदली रणनीति यह दिखाती है कि वह अब भी भारी कीमत वसूलने की क्षमता रखता है। लेकिन इस दबाव का प्रयोग जितना बढ़ेगा, उतना ही उसे प्रत्यक्ष सैन्य और आर्थिक जवाबी कार्रवाई का सामना करने का खतरा भी बढ़ेगा। 4
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ईरान ने दबाव की रणनीति में अपनी प्रत्यक्ष राज्य क्षमता को अधिक खुलकर इस्तेमाल किया है—मिसाइल और ड्रोन हमले, खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना को धमकी, और होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजरानी पर पाबंदियां इसके प्रमुख हिस्से हैं।
ईरान ने दबाव की रणनीति में अपनी प्रत्यक्ष राज्य क्षमता को अधिक खुलकर इस्तेमाल किया है—मिसाइल और ड्रोन हमले, खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना को धमकी, और होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजरानी पर पाबंदियां इसके प्रमुख हिस्से हैं। ओमान से जुड़े प्रस्तावित जहाजरानी गलियारे और नए प्रतिबंधित क्षेत्र की योजना से संकेत मिलता है कि तेहरान जलमार्ग को स्थायी रूप से बंद रखने के बजाय शर्तों के साथ नियंत्रित पहुंच को सौदेबाजी के औजार के रूप में देखता है।
मोहसिन रज़ाई की अगस्त में सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में नियुक्ति ने एक कट्टरपंथी नेता को उस निकाय में प्रमुख भूमिका दी है जो ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति का समन्वय करता है।