AI से लेखन असाइनमेंट रोज़ या लगभग रोज़ ड्राफ्ट कराने वाले छात्रों का विज्ञान का औसत स्कोर 481 था, जबकि कभी या लगभग कभी AI न इस्तेमाल करने वालों का 509—28 अंकों का अंतर। यह संबंध है, AI के कारण अंतर होने का प्रमाण नहीं। नतीजा यह नहीं कि AI का हर उपयोग नुकसानदेह है: रिपोर्टिंग के अनुसार सप्ताह में एक दो बार, सीखने में...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the OECD’s PISA 2025 report—based on more than 760,000 fifteen-year-olds in 91 countries and the first PISA cycle since generative. Article summary: PISA 2025 found a strong association—not proof of causation—between frequent, task-substituting chatbot use for schoolwork and lower science performance. Its central implication is not “ban AI,” but teach students to use. Topic tags: general, general web, government, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with f
PISA 2025 का संदेश यह नहीं है कि स्कूलों में जनरेटिव AI पर हर हाल में प्रतिबंध लगा दिया जाए। चेतावनी इस बात को लेकर है कि छात्र इसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से अधिक 15-वर्षीय छात्रों के डेटा में, ऐसे कामों के लिए चैटबॉट का लगातार उपयोग—जो छात्र की अपनी पढ़ाई, शोध या लेखन की जगह ले सकते हैं—कम विज्ञान प्रदर्शन से जुड़ा मिला। हालांकि ये तुलनाएं प्रेक्षणात्मक हैं; इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि स्कोर में अंतर सीधे AI के कारण ही आया। 1
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जिन छात्रों ने कहा कि वे लेखन असाइनमेंट का ड्राफ्ट बनाने के लिए AI का कभी या लगभग कभी उपयोग नहीं करते, उनका PISA विज्ञान आकलन में औसत स्कोर 509 था। इसके विपरीत, जो छात्र यह काम रोज़ या लगभग रोज़ AI से कराते थे, उनका औसत 481 रहा। सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रभाव को समायोजित करने के बाद भी यह 28 अंकों का अंतर बना रहा। 2
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प्रारंभिक शोध कराने और पढ़ने के लिए दिए गए पाठ का सारांश बनवाने जैसे उपयोगों में भी ऐसी ही प्रवृत्ति दिखी। इन खास कार्यों के लिए AI का उपयोग करने वाले छात्रों के विज्ञान स्कोर औसतन करीब 20 अंक कम थे; पढ़ाई का सारांश AI से बनवाने के नियमित उपयोग में अंतर लगभग 30 अंकों के करीब था। 6
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इसका अर्थ यह नहीं कि किसी एक छात्र का स्कोर चैटबॉट ने ही घटाया। अधिक AI इस्तेमाल करने वाले छात्रों की पूर्व उपलब्धि, प्रेरणा, घरेलू परिस्थितियां, शिक्षण तक पहुंच या उन्हें मिलने वाले कार्यों का प्रकार अलग हो सकता है। निष्कर्ष इतना ही है कि PISA डेटा में गहन, काम की जगह लेने वाला AI उपयोग और कमजोर विज्ञान नतीजे साथ-साथ दिखे। 4
सिर्फ 14% छात्रों ने बताया कि वे स्कूलवर्क के लिए AI का बिल्कुल उपयोग नहीं करते। यानी 86% ने इसका कम-से-कम कभी-कभार इस्तेमाल किया था। शिक्षा प्रणालियों के बीच अंतर बहुत बड़ा था: जापान में AI से दूर रहने वाले छात्र लगभग 10 में 4 थे, जबकि वियतनाम में यह हिस्सा करीब 4% था। 1
इसलिए स्कूलों के सामने सवाल अब यह नहीं है कि विद्यार्थियों का सामना चैटबॉट से होगा या नहीं। असली सवाल है कि कक्षा में ऐसे नियम और अभ्यास कैसे बनाए जाएं जो पढ़ने, तर्क करने, स्रोतों की जांच करने और मौलिक लेखन की आदत बचाए रखें।
रिपोर्टिंग में यह संबंध सीधा नहीं था। सप्ताह में करीब एक या दो बार AI का सीमित उपयोग—खासकर सीखने में सहायता के लिए—न तो AI इस्तेमाल करने और न ही रोज़ इस्तेमाल करने, दोनों की तुलना में बेहतर परिणामों से जुड़ा था। 9
मसलन, किसी उत्तर पर प्रतिक्रिया मांगना, वैकल्पिक उदाहरण लेना या अपनी समझ जांचने के लिए प्रश्न बनवाना अलग बात है। दूसरी ओर, पढ़ाई का सारांश, शोध-नोट्स या असाइनमेंट का ड्राफ्ट AI से बनवाकर उसे खुद जांचे बिना जमा कर देना अलग है।
सबूत यह नहीं कहते कि AI का हर उपयोग सीखने को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन वे यह जरूर संकेत देते हैं कि पढ़ने, लिखने और प्रमाण जांचने की मानसिक मेहनत से बचने के लिए AI को शॉर्टकट बनाना, PISA में मापी जाने वाली क्षमताओं के अनुकूल नहीं है।
शिक्षण की भूमिका अहम दिखती है। नियमित AI उपयोगकर्ताओं में, जिन छात्रों को AI से बनी जानकारी का आकलन करना सिखाया गया था, उनके अंक ऐसे साथियों से करीब 13 अंक अधिक थे जिन्हें यह प्रशिक्षण नहीं मिला था। 4
कक्षा में उपयोगी मॉडल AI को बैसाखी नहीं, बल्कि सहारा मानने का है—एक ऐसा साधन जिसके उत्तरों पर छात्र सवाल उठाएं, उन्हें प्रमाणों से मिलाएं और बेहतर बनाएं। शिक्षक-निर्देशित प्रक्रिया में छात्रों से यह कराया जा सकता है:
ऐसी पद्धतियां सिर्फ चमकदार उत्तर जमा कराने के बजाय उस सोच के लिए छात्र को जवाबदेह रखती हैं, जिससे वास्तविक सीख बनती है।
AI से जुड़े निष्कर्ष OECD देशों में प्रदर्शन की बड़ी गिरावट के बीच आए हैं। 2015 से 2025 के बीच औसत पठन स्कोर 28 अंक और गणित स्कोर 22 अंक घटे; विज्ञान में इसी अवधि में 7 अंकों की गिरावट आई। 1
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इन दीर्घकालिक बदलावों का दोष केवल जनरेटिव AI को नहीं दिया जा सकता। स्कोर में गिरावट चैटबॉट के व्यापक होने से पहले शुरू हो चुकी थी। परिणामों पर रिपोर्टिंग डिजिटल ध्यान-भंग, पढ़ने में घटती रुचि और सीखने से जुड़ी दूसरी व्यापक चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है। 1
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PISA 2025 हर छात्र के AI उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की दलील नहीं देता। यह सतर्क और प्रमाण-आधारित रुख अपनाने का समर्थन करता है। स्कूल AI के उस उपयोग के बीच स्पष्ट अंतर कर सकते हैं जो सीखने को सहारा देता है और उस उपयोग के बीच जो सीखने की प्रक्रिया को बदल देता है।
महत्वपूर्ण पढ़ाई, शोध और लेखन में मूल काम की जिम्मेदारी छात्र की ही रहनी चाहिए। जहां AI की अनुमति हो, वहां उसके उपयोग को सत्यापन, व्याख्या और संशोधन से जोड़ना चाहिए। केंद्रीय सबक साफ है: चैटबॉट का शैक्षिक मूल्य इस बात पर नहीं निर्भर करता कि वह मौजूद है या नहीं, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि वह छात्र को अधिक गहराई से सोचने में मदद करता है या सोचने से बच निकलने देता है। 4
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Studio Global AI
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AI से लेखन असाइनमेंट रोज़ या लगभग रोज़ ड्राफ्ट कराने वाले छात्रों का विज्ञान का औसत स्कोर 481 था, जबकि कभी या लगभग कभी AI न इस्तेमाल करने वालों का 509—28 अंकों का अंतर। यह संबंध है, AI के कारण अंतर होने का प्रमाण नहीं।
AI से लेखन असाइनमेंट रोज़ या लगभग रोज़ ड्राफ्ट कराने वाले छात्रों का विज्ञान का औसत स्कोर 481 था, जबकि कभी या लगभग कभी AI न इस्तेमाल करने वालों का 509—28 अंकों का अंतर। यह संबंध है, AI के कारण अंतर होने का प्रमाण नहीं। नतीजा यह नहीं कि AI का हर उपयोग नुकसानदेह है: रिपोर्टिंग के अनुसार सप्ताह में एक दो बार, सीखने में मदद के लिए किया गया सीमित उपयोग, बिल्कुल न इस्तेमाल करने या रोज़ इस्तेमाल करने की तुलना में बेहतर नतीजों से जुड़ा था।
स्कूलवर्क के लिए AI पहले ही आम हो चुका है: 86% छात्रों ने कम से कम कभी कभार इसका उपयोग करने की बात कही। AI आउटपुट की जांच करना सिखाए गए नियमित उपयोगकर्ताओं के अंक भी अधिक थे।