चंद्रा अभिलेखागार की जांच में छह निकटवर्ती आकाशगंगाओं में 84 पहले अनदेखे हाइपरसॉफ्ट एक्स रे स्रोत पहचाने गए। ये स्रोत मुख्यतः 0.3 keV से कम ऊर्जा पर चमकते हैं, इसलिए सामान्य उच्च ऊर्जा एक्स रे खोजों में अक्सर दिखाई नहीं देते। इनमें साथी तारे से गैस खींचते श्वेत बौने, न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल हो सकते हैं; हबल के प...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did scientists led by Mustafa Muhibullah discover by mining publicly available data from NASA’s Chandra X-ray Observatory—namely, the 8. Article summary: Muhibullah’s team uncovered 84 previously overlooked, luminous point sources—“hypersoft X-ray sources” (HSSs)—in M31, M101, and four elliptical galaxies by reanalyzing public Chandra archive data. They appear to be a new. Topic tags: general, government, education, academic, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
मुस्तफ़ा मुहीबुल्लाह के नेतृत्व में खगोलविदों ने नासा की चंद्रा एक्स-रे वेधशाला के सार्वजनिक अभिलेखीय डेटा की फिर से जांच कर 84 चमकीले, बिंदु-जैसे एक्स-रे स्रोत पहचाने हैं। इन्हें हाइपरसॉफ्ट एक्स-रे स्रोत (Hypersoft X-ray Sources या HSSs) कहा गया है। इनकी खासियत यह है कि इनका अधिकांश उत्सर्जन असाधारण रूप से कम ऊर्जा वाले एक्स-रे में—मुख्यतः 0.3 keV से नीचे—केंद्रित है। 3
नमूने में सर्पिल आकाशगंगाएं M31 (एंड्रोमेडा) और M101 (पिनव्हील), तथा चार दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगाएं शामिल हैं। फिलहाल यह एक प्रेक्षण-आधारित वर्ग है: इनके स्पेक्ट्रम का विशिष्ट ऊर्जा-हस्ताक्षर स्पष्ट है, लेकिन हर स्रोत की भौतिक प्रकृति अभी तय नहीं हुई है। 3
अधिकांश एक्स-रे सर्वेक्षण अपेक्षाकृत ऊंची ऊर्जा वाले बैंड पर केंद्रित होते हैं। HSSs इसके उलट हैं: वे चंद्रा के सबसे कम-ऊर्जा वाले डेटा में उभरते हैं, लेकिन सामान्य, उच्च-ऊर्जा एक्स-रे छवियों में बहुत धुंधले दिखते हैं या दिखते ही नहीं। शोध दल ने इन्हें 0.3 keV से नीचे के प्रमुख उत्सर्जन और 0.15–0.3 keV फोटॉनों का 0.3–1.0 keV फोटॉनों के मुकाबले अत्यधिक अनुपात होने के आधार पर परिभाषित किया है। 3
इनकी खोज कठिन होने के दो प्रमुख कारण हैं:
इस तरह एक्स-रे और UV अवलोकन-क्षेत्रों के बीच एक तरह का ‘ब्लाइंड स्पॉट’ बनता है, जिसमें वर्षों से चमकीले स्रोतों की एक आबादी छिपी रह सकती थी। चंद्रा के पहले के अध्ययनों में भी 0.3 keV से नीचे ही उत्सर्जन करने वाले स्रोत मानक कैटलॉग और प्रकाशित सूचियों में काफी हद तक अनुपस्थित पाए गए थे। 6
एक प्रमुख संभावना अभिवृद्धि करने वाली द्वितारा प्रणाली की है। इसमें कोई सघन खगोलीय पिंड अपने साथी तारे से गैस खींचता है। यह पिंड श्वेत बौना, न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल हो सकता है। भीतर गिरती और गर्म होती गैस से, कई सामान्य एक्स-रे द्वितारा प्रणालियों के कठोर एक्स-रे की जगह, अत्यधिक पराबैंगनी और अति-मृदु एक्स-रे प्रधान स्पेक्ट्रम बन सकता है।
चंद्रा स्पेक्ट्रम से अनुमानित तापमान लगभग 2 लाख से 2.5 लाख डिग्री सेल्सियस है। चूंकि यह अनुमान दूरबीन की संवेदनशीलता-सीमा के निचले किनारे पर किए गए मापों से मॉडल के जरिए निकाला गया है, इसलिए इसे प्रत्यक्ष तापमान माप नहीं माना जा सकता। संभव है कि अलग-अलग प्रकार के सघन पिंड या अभिवृद्धि की अलग अवस्थाएं एक जैसा हाइपरसॉफ्ट संकेत उत्पन्न करें।
यदि HSSs में कुछ श्वेत बौने ऐसे हों जो साथी तारे से लगातार द्रव्यमान प्राप्त कर रहे हैं, तो वे उन प्रणालियों की पहचान में मदद कर सकते हैं जो टाइप Ia सुपरनोवा विस्फोट से जुड़ी परिस्थितियों के करीब पहुंच रही हों। टाइप Ia सुपरनोवा के पूर्वज तंत्रों की सटीक पहचान तारकीय खगोलभौतिकी का अब भी एक बड़ा अनसुलझा प्रश्न है।
इनका अनुमानित UV उत्सर्जन आसपास की अंतरतारकीय गैस पर भी असर डाल सकता है। UV फोटॉन गैस को आयनित करते हैं; आयनीकरण में बदलाव गैस की रसायनिकी और उसके ठंडा होने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। ये प्रक्रियाएं आकाशगंगाओं के भीतर गैस के व्यवहार से जुड़ी हैं। नासा के अनुसार, ये नए स्रोत टाइप Ia सुपरनोवा के पूर्वजों और अंतरतारकीय गैस के आयनीकरण—दोनों को समझने में उपयोगी हो सकते हैं।
अगला अहम कदम चंद्रा के मापों से अनुमानित UV विकिरण की स्वतंत्र जांच है। प्रस्तावित हबल स्पेस टेलीस्कोप अवलोकन चुने हुए HSSs के UV समकक्षों को खोजेंगे या उनकी चमक की सीमा तय करेंगे। इससे अति-मृदु एक्स-रे स्पेक्ट्रम से निकाले गए ऊर्जा-उत्पादन के अनुमान की पुष्टि या चुनौती की जा सकेगी।
UV अवलोकनों को एक्स-रे चमक, समय के साथ बदलाव, स्थानीय परिवेश और साथी तारों के संकेतों के साथ मिलाकर वैज्ञानिक श्वेत-बौना प्रणालियों को न्यूट्रॉन-तारा या ब्लैक-होल प्रणालियों से अलग पहचानने की कोशिश करेंगे। इससे यह भी पता चल सकता है कि हाइपरसॉफ्ट एक्स-रे स्रोत वास्तव में एक ही भौतिक आबादी हैं, या कई अलग प्रकार की सघन द्वितारा प्रणालियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक साझा प्रेक्षणीय नाम।
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चंद्रा अभिलेखागार की जांच में छह निकटवर्ती आकाशगंगाओं में 84 पहले अनदेखे हाइपरसॉफ्ट एक्स रे स्रोत पहचाने गए।
चंद्रा अभिलेखागार की जांच में छह निकटवर्ती आकाशगंगाओं में 84 पहले अनदेखे हाइपरसॉफ्ट एक्स रे स्रोत पहचाने गए। ये स्रोत मुख्यतः 0.3 keV से कम ऊर्जा पर चमकते हैं, इसलिए सामान्य उच्च ऊर्जा एक्स रे खोजों में अक्सर दिखाई नहीं देते।
इनमें साथी तारे से गैस खींचते श्वेत बौने, न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल हो सकते हैं; हबल के पराबैंगनी अवलोकन इस संभावना की जांच करेंगे।