बाजारों ने एक बेहद अनुकूल तस्वीर को कीमतों में शामिल कर लिया था: फेडरल रिजर्व (फेड) और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की बहुत सीमित अतिरिक्त सख्ती, महंगाई में कमी, और शेयर व क्रेडिट बाजारों की मजबूती। डॉयचे बैंक के मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट हेनरी एलन का तर्क है कि यह टिकाऊ संतुलन नहीं है। या तो महंगाई का दबाव घटना होगा, या निवेशकों को केंद्रीय बैंकों की ज्यादा सख्त नीति का अनुमान लगाना पड़ेगा।
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मूल असंगति: सीमित दर बढ़ोतरी बनाम बढ़ता मूल्य दबाव
रिपोर्ट की चिंता बाजारों में निहित ब्याज-दर अनुमान और कमोडिटी व कारोबारी सर्वेक्षणों से मिल रहे महंगाई संकेतों के बीच अंतर को लेकर है। बाजार जुलाई 2027 तक फेड की लगभग दो अतिरिक्त दर बढ़ोतरी और ECB की तीन 25-बेसिस-पॉइंट बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा था। एलन के मुताबिक, यह अनुमान सामने दिख रहे मुद्रास्फीति जोखिमों की तुलना में बहुत सीमित है।
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मुद्दा यह नहीं है कि दरों में और बढ़ोतरी निश्चित है। मुद्दा यह है कि मौजूदा एसेट कीमतों में इस जोखिम के लिए बहुत कम गुंजाइश है कि केंद्रीय बैंकों को महंगाई को लक्ष्य तक लाने के लिए ज्यादा कदम उठाने पड़ें। फेड चेयर केविन वार्श द्वारा 2% महंगाई लक्ष्य पर जोर देने के बाद डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्रियों ने भी कहा था कि सितंबर में बढ़ोतरी टालने के लिए आने वाले आंकड़ों को उम्मीद से काफी नरम होना पड़ेगा।
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कमोडिटी कीमतें क्यों चुनौती हैं
एलन का फोकस केवल तेल की अलग-थलग तेजी पर नहीं, बल्कि आपूर्ति-आधारित महंगाई के झटके की आशंका पर था। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधान के बीच ब्रेंट क्रूड एक महीने पहले के 82.49 डॉलर से बढ़कर करीब 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। यूरोपीय प्राकृतिक गैस फ्यूचर्स भी 2023 की शुरुआत के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। अगस्त में चीनी, गेहूं और मक्का की कीमतें भी बढ़ीं।
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ये घटनाक्रम बाजार की उस धारणा को चुनौती देते हैं कि शिपिंग व्यवधान सामान्य हो जाएंगे और ब्रेंट फिर करीब 83 डॉलर के अपने छह-महीने के स्तर की ओर लौट आएगा। यदि ऊर्जा, माल ढुलाई और खाद्य लागत ऊंची बनी रहती है, तो उनका असर ईंधन बिलों से आगे बढ़कर व्यापक महंगाई पर पड़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए नीति को आसान बनाना और मुश्किल हो जाएगा।
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अमेरिका में अगस्त का ISM सेवा क्षेत्र का प्राइसेज पेड सूचकांक चार साल के उच्च स्तर पर पहुंचना भी इसी चिंता से मेल खाता है। यह एक आंकड़ा अकेले महंगाई या फेड की नीति तय नहीं करता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि सेवाओं वाली अर्थव्यवस्था में भी लागत का दबाव फैल सकता है।
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जोखिम परिसंपत्तियों के लिए ‘बहुत संकरा रास्ता’
डॉयचे बैंक ने बाजार के अनुकूल नतीजे को “बहुत संकरा लैंडिंग ज़ोन” कहा है। यदि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहे, महंगाई फिर से कम हो और कमोडिटी दबाव घटे, तो शेयर और क्रेडिट बाजार वास्तविक प्रतिफल (रियल यील्ड) बढ़ने का असर सह सकते हैं। ऐसे माहौल में कर्ज लागत बढ़ने से आय या क्रेडिट गुणवत्ता पर तुरंत बड़ा असर पड़ना जरूरी नहीं है।
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लेकिन ऊर्जा-आधारित आपूर्ति झटका इसका उलटा परिणाम दे सकता है: ज्यादा महंगाई के साथ वास्तविक आय और मांग में कमजोरी। ऐसी स्थिति कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, मौद्रिक ढील की गुंजाइश कम कर सकती है और शेयर वैल्यूएशन व क्रेडिट स्प्रेड—यानी जोखिमभरे कर्ज पर अतिरिक्त प्रतिफल—दोनों को अधिक संवेदनशील बना सकती है।
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अर्थात जोखिम केवल ब्याज दरों के बढ़ने का नहीं है। ज्यादा गंभीर जोखिम यह है कि दरें बढ़ें या लंबे समय तक ऊंची रहें, क्योंकि महंगाई उम्मीद से अधिक टिकाऊ साबित हो रही हो और वृद्धि कमजोर पड़ रही हो।
अमेरिकी महंगाई रिपोर्ट से तेज पुनर्मूल्यांकन क्यों संभव है
अगर अमेरिका की अगली महंगाई रिपोर्ट उम्मीद से ज्यादा मजबूत आती है, खासकर यदि उसमें ऊर्जा और सेवाओं की ऊंची लागत उपभोक्ता कीमतों तक पहुंचने के संकेत मिलते हैं, तो निवेशकों को एक साथ कई धारणाएं बदलनी पड़ सकती हैं। बाजार नीतिगत दरों और रियल यील्ड के अनुमान बढ़ा सकते हैं, आय अनुमान घटा सकते हैं और क्रेडिट जोखिम के लिए अधिक मुआवजा मांग सकते हैं।
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इसीलिए एलन ने धीरे-धीरे बदलाव के बजाय तेज समायोजन की आशंका जताई। इक्विटी और क्रेडिट बाजार मजबूत वृद्धि और सीमित मौद्रिक सख्ती के लिए पोजिशन किए गए थे। यदि महंगाई अनुमान के अनुसार ठंडी नहीं पड़ती, तो इन दोनों धारणाओं को एक साथ झटका लग सकता है।
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रिपोर्ट का व्यावहारिक संदेश सीधा है: बाजार का आशावादी नतीजा अभी भी संभव है, लेकिन उसके लिए कमोडिटी दबाव कम होना और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाए बिना महंगाई में सुधार जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ब्याज-दर अपेक्षाओं और महंगाई जोखिम के बीच की खाई अधिक अनुमानित दरों, जोखिम परिसंपत्तियों की कमजोर कीमतों, या दोनों के जरिए बंद हो सकती है।
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