डीजल की तंगी मुख्यतः रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कमी है, केवल कच्चे तेल की कमी नहीं। रूस से डीजल निर्यात प्रतिबंध और रूस व मध्य पूर्व की बाधित रिफाइनरियों ने वैश्विक आपूर्ति का लचीला हिस्सा घटाया है। रिकॉर्ड डीजल कीमतें और क्रैक स्प्रेड संकेत देते हैं कि संकट कच्चे तेल को डीजल में बदलने और उसे खरीदार तक पहुंचाने...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is driving the global diesel and refined-fuel supply squeeze described by energy executives at the September 2026 Asia-Pacific Petroleu. Article summary: The squeeze is principally a refining-products problem rather than simply a crude-oil shortage: war-related refinery outages, constrained tanker traffic and Russia’s removal of diesel from export markets have hit middle . Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
डीजल बाजार पर दबाव इसलिए है क्योंकि रुकावट उस चरण में है जहां कच्चा तेल उपयोगी ईंधन बनता है। रूस और मध्य पूर्व में रिफाइनरियों को नुकसान तथा उत्पादन में कटौती, रूसी निर्यात पाबंदियां और टैंकरों की आवाजाही में बाधाएं—इन सबने डीजल, जेट ईंधन और समुद्री ईंधन की उपलब्धता व डिलीवरी घटाई है। सर्दियों की अधिक मांग से पहले भंडार फिर भरने की गुंजाइश भी सीमित रह गई है। 1
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कच्चा तेल और डीजल आपस में जुड़े हैं, लेकिन एक-दूसरे का विकल्प नहीं हैं। कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रसंस्कृत कर डीजल और जेट ईंधन जैसे मिडिल डिस्टिलेट बनाने पड़ते हैं। इसके बाद इन्हें जहाज, पाइपलाइन या ट्रक से ग्राहकों तक पहुंचाना होता है। रिफाइनरी संचालन या तैयार ईंधन की ढुलाई बाधित होने पर कच्चे तेल की कीमतों पर अपेक्षाकृत कम दबाव हो सकता है, जबकि डीजल दुर्लभ हो जाता है।
सिंगापुर में एशिया-पैसिफिक पेट्रोलियम कॉन्फ्रेंस (APPEC) में उद्योग अधिकारियों ने इसे मुख्यतः तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की समस्या बताया। उनके अनुसार रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन और मध्य पूर्व से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति गायब है, जबकि अन्य जगहों पर अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता बहुत कम है। 1 अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमान के मुताबिक, मध्य पूर्व का रिफाइनिंग प्रसंस्करण दूसरी तिमाही में युद्ध-पूर्व स्तर से 29 लाख बैरल प्रतिदिन कम था और तीसरी तिमाही में भी 22 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहने का अनुमान था।
यही कारण है कि कच्चे तेल का बाजार नरम होने से पंप पर राहत की गारंटी नहीं मिलती। रिफाइनरियों में कम प्रसंस्करण से कच्चे तेल की मांग घट सकती है, लेकिन साथ ही डीजल और जेट ईंधन का उत्पादन भी कम हो जाता है।
यूक्रेनी हमलों ने रूस की रिफाइनरियों के संचालन को बाधित किया है। इसके बाद रूस ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध आपूर्ति घटी और उसके नियमित खरीदारों को दूसरी जगह से कार्गो तलाशने पड़े। 5
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रूस ने उत्पादक कंपनियों के लिए डीजल निर्यात प्रतिबंध 30 सितंबर तक बढ़ाया है। इसमें समुद्री ईंधन और गैसऑयल भी शामिल हैं। गैर-उत्पादकों के डीजल निर्यात, मोटर गैसोलीन और जेट ईंधन पर अलग-अलग, अधिक लंबी अवधि की पाबंदियां लागू हैं। 4 जो देश रूस से सीधे डीजल नहीं खरीदते, उन पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि दूसरे आयातक अमेरिका, यूरोप और एशिया के वैकल्पिक कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा देते हैं।
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ईरान संघर्ष ने मध्य पूर्व में रिफाइनरी प्रसंस्करण और टैंकर यातायात को प्रभावित किया है। इससे एक तरफ तैयार ईंधन का उत्पादन घटा है, दूसरी तरफ उपलब्ध कार्गो को पहुंचाना कम कुशल और अधिक महंगा हुआ है। 1
2 यानी दबाव दोहरा है—रिफाइनरियों से कम उत्पाद निकल रहे हैं और हर बैरल की ढुलाई ज्यादा कठिन हो गई है।
रिफाइनरियां डीजल और अन्य अधिक-मूल्य वाले उत्पादों को प्राथमिकता भी दे रही हैं। इससे डीजल की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन जहाजों और बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल ऑयल की तंगी बढ़ सकती है। 2
कीमतों के संकेत तत्काल आपूर्ति-कमी की ओर इशारा करते हैं। 3 सितंबर को गैसबडी के अनुसार अमेरिका में डीजल का औसत खुदरा भाव रिकॉर्ड 5.820 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड—अर्थात कच्चे तेल को डीजल में बदलने का अनुमानित प्रीमियम—दिन के कारोबार में रिकॉर्ड 108.02 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
क्रैक स्प्रेड का बढ़ना अहम है, क्योंकि इससे पता चलता है कि समस्या केवल महंगे कच्चे तेल की नहीं है। डीजल के एक तैयार बैरल का मूल्य उसके कच्चे माल की तुलना में असाधारण रूप से बढ़ गया है। सरल शब्दों में, खरीदार उपलब्ध डीजल और अन्य मिडिल डिस्टिलेट के लिए तीखी बोली लगा रहे हैं।
आमतौर पर ऊंचे रिफाइनिंग मार्जिन रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन APPEC में सीमित अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता को प्रमुख अड़चन बताया गया। 1 ऐसे में भंडार बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं: कम स्टॉक ठंडी सर्दी, किसी अनियोजित रिफाइनरी बंदी या टैंकर यातायात में नई बाधा के खिलाफ कम सुरक्षा देते हैं।
रॉयटर्स द्वारा उद्धृत केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, एशिया का हल्के और मिडिल डिस्टिलेट का आयात अगस्त में घटकर अनुमानित 51 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो जुलाई में 56.1 लाख बैरल प्रतिदिन था और युद्ध शुरू होने के बाद सबसे निचला स्तर है। 3 क्षेत्रीय आयात में यह गिरावट जरूरी नहीं कि ईंधन बाजार का तनाव कम होने का संकेत हो; यह उपलब्धता सीमित होने का प्रमाण भी हो सकती है।
अगस्त में चीन का समुद्री मार्ग से कच्चे तेल का आयात 71.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह जुलाई से थोड़ा अधिक था, लेकिन ईरान संघर्ष से पहले के स्तर से करीब 40% कम था। कम कच्चा तेल आयात और कम रिफाइनिंग प्रसंस्करण वैश्विक कच्चे तेल की मांग को दबा सकते हैं। लेकिन इससे एशियाई बाजार को राहत देने वाले रिफाइंड उत्पादों के संभावित निर्यात भी सीमित हो जाते हैं।
डीजल, जेट ईंधन और समुद्री ईंधन महंगा होने का असर मालभाड़े, औद्योगिक लागत, खाद्य वितरण और हवाई यात्रा तक पहुंच सकता है। किसी देश पर वास्तविक प्रभाव उसके स्थानीय भंडार, रिफाइनिंग तक पहुंच, मुद्रा की चाल, सरकारी ईंधन नीतियों और बाधाओं की अवधि पर निर्भर करेगा।
निकट अवधि में अधिक संभावित स्थिति कच्चे तेल की कीमतों में लगातार एकतरफा तेजी नहीं, बल्कि रिफाइंड ईंधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। क्षतिग्रस्त रिफाइनरियां चालू हों, रूसी निर्यात लौटे, मध्य पूर्व में शिपिंग सामान्य हो या मांग इतनी कमजोर पड़े कि आपूर्ति-संतुलन सुधरे—तो बाजार को राहत मिल सकती है। इसके उलट, कम भंडार और सीमित अतिरिक्त क्षमता डीजल को नई बाधाओं के प्रति असाधारण रूप से संवेदनशील बनाते हैं। 1
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अगस्त में रॉयटर्स ने बताया था कि यूरोपीय डीजल वायदा कीमतें 2027 तक 2024-25 के औसत से करीब 35% ऊपर थीं, जबकि अमेरिकी हीटिंग-ऑयल वायदा—जो डीजल का एक प्रमुख बेंचमार्क है—उस औसत से करीब 42% ऊपर था। वायदा कीमतें बाजार की अपेक्षाएं हैं, निश्चित पूर्वानुमान नहीं। फिर भी संदेश साफ है: केवल कच्चे तेल की आपूर्ति बहाल होने से संकट पूरी तरह खत्म नहीं होगा, जब तक रिफाइनिंग क्षमता और ईंधन व्यापार के रास्ते भी सामान्य नहीं होते।
वैश्विक ईंधन संकट का मूल कारण रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स की अड़चन है। रूस की निर्यात पाबंदियों, युद्ध से रिफाइनरियों को हुए नुकसान और मध्य पूर्व में बाधित शिपिंग ने डीजल व संबद्ध ईंधनों की लचीली आपूर्ति घटा दी है, ठीक ऐसे समय में जब सर्दियों की मांग निकट है। रिकॉर्ड डीजल मार्जिन बताते हैं कि उपलब्ध अतिरिक्त तैयार बैरल दुर्लभ है। जब तक अधिक रिफाइनिंग क्षमता चालू नहीं होती या व्यापार-मार्ग सुचारु नहीं होते, बाजार अचानक क्षेत्रीय कमी और तेज कीमत वृद्धि के जोखिम में रहेगा। 1
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डीजल की तंगी मुख्यतः रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कमी है, केवल कच्चे तेल की कमी नहीं।
डीजल की तंगी मुख्यतः रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कमी है, केवल कच्चे तेल की कमी नहीं। रूस से डीजल निर्यात प्रतिबंध और रूस व मध्य पूर्व की बाधित रिफाइनरियों ने वैश्विक आपूर्ति का लचीला हिस्सा घटाया है।
रिकॉर्ड डीजल कीमतें और क्रैक स्प्रेड संकेत देते हैं कि संकट कच्चे तेल को डीजल में बदलने और उसे खरीदार तक पहुंचाने के चरण में है।