ब्रिटेन प्राथमिक कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत डिवाइस और ऐप कंपनियों को 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए नग्न तस्वीरें लेने, देखने और साझा करने से रोकना होगा। नीति का उद्देश्य ग्रूमिंग, दबाव और सेक्सटॉर्शन से जुड़े जोखिम को कम करना है; 2024 में IWF द्वारा आपराधिक मानी गई रिपोर्टों में 91% में बच्चों द्वार...
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शोध उत्तर
ब्रिटेन सरकार ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्मार्टफोन और टैबलेट पर नग्न तस्वीरें लेना, साझा करना या देखना रोका जा सके। प्रस्ताव में Apple और Google जैसे डिवाइस-प्लेटफॉर्म प्रदाताओं के साथ-साथ बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप्स के प्रदाताओं को भी जिम्मेदार बनाया जाएगा। लक्ष्य केवल वैकल्पिक सेटिंग देना नहीं, बल्कि संबंधित सेवाओं में प्रभावी सुरक्षा लागू करना है।1
यह अभी कानून नहीं है, बल्कि सरकार की घोषित नीति है। विधेयक का पूरा मसौदा, तकनीकी मानक और लागू करने की प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
सरकार का घोषित लक्ष्य बच्चों के लिए डिवाइस-स्तर पर सुरक्षा लागू करना है। इसके तहत तकनीकी कंपनियों को फोन और टैबलेट में पहले से मौजूद सुविधाएं सक्रिय करनी होंगी या ऐसी तकनीक लगानी होगी जो नग्न तस्वीरों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर सके।1
यह योजना किसी एक मैसेजिंग ऐप तक सीमित नहीं है। सरकार बच्चों के इस्तेमाल वाले ऐप्स के लिए भी ऐसे नियम लाना चाहती है, ताकि उनके जरिए नग्न तस्वीरों तक पहुंच या उनका साझा किया जाना रोका जा सके। किन ऐप्स, ऑपरेटिंग सिस्टम के किन हिस्सों और किस प्रकार की तस्वीरों को नियम में शामिल किया जाएगा, यह भविष्य के कानून पर निर्भर करेगा।
नीति की शुरुआती रूपरेखा के मुताबिक, बच्चों के लिए ये सुरक्षा उपाय डिफॉल्ट रूप से चालू रहेंगे। बिना रोक-टोक सुविधाएं इस्तेमाल करने के लिए वयस्कों को यह साबित करना पड़ सकता है कि उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है।1
जून में Apple और Google को तीन महीने के भीतर अपनी योजनाएं पेश करने और स्वेच्छा से सुरक्षा मजबूत करने को कहा गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि पर्याप्त कार्रवाई न होने पर कानून लाया जाएगा।1
मंत्रियों ने बाद में माना कि दोनों कंपनियों ने ऑपरेटिंग सिस्टम स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और नाबालिगों के उपकरणों पर नग्न तस्वीरों को केवल धुंधला करने के बजाय ब्लॉक करने की दिशा में प्रगति हुई है। Apple की उम्र-जांच व्यवस्था और सुरक्षा सुविधाओं को भी अहम कदम बताया गया। फिर भी सरकार का निष्कर्ष था कि स्वैच्छिक उपाय पूरे डिवाइस और ऐप इकोसिस्टम में पर्याप्त रूप से व्यापक नहीं हैं।1
यही अंतर इस नीति के केंद्र में है। किसी एक चैट या संचार सुविधा में रोक जोखिम घटा सकती है, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि तस्वीर डिवाइस पर ली, सेव की, दूसरी जगह साझा या देखी न जा सके। प्रस्तावित कानून इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
तीन महीने का शुरुआती अल्टीमेटम इस चेतावनी के साथ दिया गया था कि स्वैच्छिक उपाय कम पड़े तो कानून बनाया जाएगा। पहले की नीति रिपोर्टिंग में नियम न मानने वाली कंपनियों पर जुर्माने और अंतिम विकल्प के तौर पर वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की आपराधिक जिम्मेदारी की संभावना का उल्लेख था।1
हालांकि, अंतिम प्रवर्तन ढांचा अभी प्रकाशित नहीं हुआ है। जब तक विधेयक पेश नहीं होता, यह नहीं कहा जा सकता कि कौन-से जुर्माने, नियामक शक्तियां या अनुपालन मानक वास्तव में कानून बनेंगे।
नीति का मुख्य फोकस उन तस्वीरों पर है जिन्हें बच्चे खुद बनाते या साझा करते हैं—अक्सर ग्रूमिंग, दबाव, धमकी या ब्लैकमेल की परिस्थितियों में। इंटरनेट वॉच फाउंडेशन (IWF) ने 2024 में 4,24,047 रिपोर्टों का आकलन किया और 2,91,273 रिपोर्टों में आपराधिक बाल यौन शोषण सामग्री, उसके लिंक या उसका विज्ञापन होने की पुष्टि की। आपराधिक मानी गई रिपोर्टों में 91% में स्वयं बनाई गई तस्वीरें शामिल थीं।5
सेक्सटॉर्शन—यानी यौन तस्वीरों के आधार पर ऑनलाइन ब्लैकमेल—इस नुकसान को बढ़ाने का एक तरीका है। बच्चे को तस्वीर भेजने के लिए दबाव डाला जा सकता है और फिर उसे तस्वीर सार्वजनिक करने की धमकी देकर और तस्वीरें भेजने, पैसे देने या दूसरी मांगें मानने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
Childline के आंकड़े भी सहायता सेवाओं पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच ऑनलाइन बाल यौन शोषण और उत्पीड़न से जुड़ी 2,444 काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए; इनमें 242 सत्रों में पैसे ऐंठने के उद्देश्य वाले सेक्सटॉर्शन का जिक्र था।2 IWF ने अलग से बताया कि 2025 की पहली छमाही में बच्चों के यौन ब्लैकमेल की रिपोर्टें साल-दर-साल 72% बढ़ीं और उसके सत्यापित मामलों के डेटासेट में लड़कों की हिस्सेदारी 97% थी।
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ये आंकड़े यह साबित नहीं करते कि केवल डिवाइस-स्तर की रोकथाम से शोषण खत्म हो जाएगा। लेकिन वे बताते हैं कि मंत्री तस्वीर बनने, भेजे जाने या ब्लैकमेल में इस्तेमाल होने से पहले ही प्रक्रिया को बाधित करना क्यों चाहते हैं।
Apple और Google के पास पहले से बच्चों की सुरक्षा और निगरानी वाले खातों से जुड़े कुछ टूल मौजूद हैं। Apple का कम्युनिकेशन सेफ्टी फीचर समर्थित संचार सेवाओं में कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को नग्न तस्वीरों के बारे में चेतावनी या सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। Google भी निगरानी वाले उपयोगकर्ता अनुभवों के साथ बाल-सुरक्षा नियंत्रण देता है।
सरकार का कहना है कि यदि ये उपाय पूरे डिवाइस और बच्चों के इस्तेमाल वाले ऐप्स को भरोसेमंद तरीके से कवर नहीं करते, तो वे पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए प्रस्तावित कानून का मानक अधिक व्यापक है: सुरक्षा को बच्चे के डिवाइस अनुभव का अंतर्निहित हिस्सा बनाया जाए, न कि सीमित या वैकल्पिक सुविधा भर छोड़ा जाए।1
नीति का सबसे बड़ा अनसुलझा प्रश्न यह है कि डिवाइस किसी उपयोगकर्ता को वयस्क या बच्चा कैसे पहचानेगा और नग्नता की पहचान कैसे करेगा, बिना वैध निजी गतिविधियों की जरूरत से ज्यादा निगरानी किए।
डिजिटल अधिकारों के पक्षधर संगठनों ने चेताया है कि उम्र सत्यापन प्रणालियों में बायोमेट्रिक अनुमान, पहचान जांच, व्यवहार की प्रोफाइलिंग या डेटा साझा करना शामिल हो सकता है। ओपन राइट्स ग्रुप का तर्क है कि ऑनलाइन उम्र जांच, दुकान पर पहचान पत्र दिखाने जैसी साधारण व्यवस्था के बजाय निजता में दखल देने वाली डिजिटल पहचान प्रक्रिया बन सकती है।
यही चिंता तस्वीरों को नियंत्रित करने वाली तकनीक पर भी लागू होती है। बच्चों की सुरक्षा के लिए बनी प्रणाली को डिवाइस या संचार सेवा में मौजूद निजी तस्वीरों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। निजता पर इसका असर उन निर्णयों पर निर्भर करेगा जो अभी सार्वजनिक नहीं हैं: जांच डिवाइस पर होगी या किसी ऑनलाइन सेवा के जरिए; तस्वीर का डेटा डिवाइस से बाहर जाएगा या नहीं; गलत पहचान होने पर क्या होगा; कौन-सी जानकारी रखी जाएगी; और स्वतंत्र निगरानी या अपील की क्या व्यवस्था होगी।
एक व्यावहारिक कानून को बच्चों की सुरक्षा के साथ डेटा संग्रह सीमित करने, दुरुपयोग रोकने और वयस्कों के लिए वैध सामग्री तक पहुंच का वास्तविक रास्ता सुनिश्चित करना होगा।
सरकार ने कहा है कि वह प्राथमिक कानून लाएगी, लेकिन कोई स्पष्ट समयसीमा या पूरा कानूनी और तकनीकी ढांचा घोषित नहीं किया गया है। इसलिए संसद, तकनीकी कंपनियों, बाल-सुरक्षा संगठनों और निजता समर्थकों के सामने अभी कई सवाल हैं।
बाल संरक्षण संगठन मानते हैं कि सेक्सटॉर्शन और स्वयं बनाई गई शोषणकारी तस्वीरों की बढ़ती घटनाओं के बीच स्वैच्छिक कदम पर्याप्त तेजी से आगे नहीं बढ़े। दूसरी ओर, निजता समर्थक इस बात की बारीकी से जांच करेंगे कि अंतिम मॉडल सुरक्षा नियंत्रणों को आम लोगों के लिए नियमित पहचान जांच या डिफॉल्ट कंटेंट स्कैनिंग में तो नहीं बदल देता।
इस कानून की असली कसौटी दोहरी होगी: क्या यह बच्चों को दबाव और तस्वीर-आधारित शोषण से वास्तव में बचाता है, और क्या यह लोगों की पहचान व निजी तस्वीरों के इस्तेमाल पर स्पष्ट तथा अनुपातिक सीमाएं भी तय करता है।
Studio Global AI
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ब्रिटेन प्राथमिक कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत डिवाइस और ऐप कंपनियों को 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए नग्न तस्वीरें लेने, देखने और साझा करने से रोकना होगा।
ब्रिटेन प्राथमिक कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत डिवाइस और ऐप कंपनियों को 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए नग्न तस्वीरें लेने, देखने और साझा करने से रोकना होगा। नीति का उद्देश्य ग्रूमिंग, दबाव और सेक्सटॉर्शन से जुड़े जोखिम को कम करना है; 2024 में IWF द्वारा आपराधिक मानी गई रिपोर्टों में 91% में बच्चों द्वारा स्वयं बनाई गई तस्वीरें थीं।
कानून का मसौदा और तकनीकी नियम अभी सार्वजनिक नहीं हैं। उम्र सत्यापन, निजी तस्वीरों की पहचान, गलत ब्लॉकिंग और वयस्कों की वैध पहुंच जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।