गोल्डमैन सैक्स, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी और डॉयचे बैंक समेत 21 वित्तीय संस्थान 2026 में एक कंपनी बनाने और 2027 की पहली छमाही में डॉलर पेग्ड स्टेबलकॉइन जारी करने की योजना में हैं। [1] समूह का इरादा अन्य G7 मुद्राओं से जुड़े स्टेबलकॉइन तक विस्तार करने का है; यूरो को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन बाकी मुद्राओं के लिए समय सार...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are Goldman Sachs, Bank of America, Citi, Deutsche Bank, and the other financial institutions in the 21-member consortium planning to c. Article summary: Goldman Sachs, Bank of America, Citi, Deutsche Bank and 17 other financial institutions plan to form a company in 2026 to issue a jointly backed, dollar-pegged stablecoin in the first half of 2027. It is a proposed multi. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
21 वित्तीय संस्थानों का यह समूह 2026 में एक नई कंपनी बनाने की योजना रखता है। कंपनी का पहला उत्पाद अमेरिकी डॉलर से जुड़ा—या डॉलर-पेग्ड—स्टेबलकॉइन होगा, जिसे 2027 की पहली छमाही में जारी करने का लक्ष्य है। इसमें गोल्डमैन सैक्स, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी और डॉयचे बैंक जैसे नाम शामिल हैं। यह पहले से बाजार में चल रहा टोकन नहीं, बल्कि प्रस्तावित नया जारीकर्ता और नई डिजिटल मुद्रा परियोजना है। 1
स्टेबलकॉइन ऐसी क्रिप्टो-परिसंपत्ति होती है जिसका मूल्य किसी दूसरी संपत्ति या मुद्रा से जोड़े रखने का लक्ष्य होता है। इस मामले में शुरुआती टोकन अमेरिकी डॉलर से पेग्ड होगा। इसके बाद समूह अन्य G7 मुद्राओं से जुड़े स्टेबलकॉइन जारी करने की दिशा में बढ़ना चाहता है; G7 प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यूरो-नामित टोकन को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता बताया गया है। 1
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हालांकि, सार्वजनिक जानकारी से पाउंड स्टर्लिंग, जापानी येन या कनाडाई डॉलर जैसे अन्य टोकनों के लॉन्च का क्रम अथवा समय तय नहीं होता। टोकन किस ब्लॉकचेन नेटवर्क पर चलेगा, उसके रिजर्व कैसे रखे जाएंगे और गवर्नेंस ढांचा क्या होगा—इन अहम परिचालन विवरणों की भी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यूरो स्टेबलकॉइन के क्षेत्र में 21-सदस्यीय समूह अकेला नहीं होगा। एम्स्टर्डम स्थित Qivalis, 15 देशों के 37 बैंकों के समर्थन वाली अलग कंपनी है। उसका लक्ष्य 2026 की दूसरी छमाही में यूरो-पेग्ड स्टेबलकॉइन लॉन्च करना है। परियोजना ने डिजिटल भुगतानों में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने का उद्देश्य बताया है।
| पहल | शुरुआती मुद्रा | रिपोर्ट किया गया लक्ष्य | अगला फोकस |
|---|---|---|---|
| 21 वित्तीय संस्थानों का समूह | अमेरिकी डॉलर | 2027 की पहली छमाही | अन्य G7 मुद्राएं; यूरो प्राथमिकता |
| Qivalis | यूरो | 2026 की दूसरी छमाही | यूरो-केंद्रित परियोजना |
इसलिए यूरो-नामित स्टेबलकॉइन के लिए दोनों पहलें प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं। Qivalis का उत्पाद 21-सदस्यीय समूह के संभावित यूरो टोकन से पहले बाजार में आ सकता है। दूसरी ओर, बड़ा समूह शुरुआत उस डॉलर से कर रहा है जो स्टेबलकॉइन बाजार की प्रमुख मुद्रा पहले से है।
स्टेबलकॉइन बाजार भारी रूप से डॉलर-केंद्रित है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड के अनुसार, बाजार मूल्य का करीब 90% दो जारीकर्ताओं—टेथर और सर्कल—के नियंत्रण में है।
ऐसे में केवल टोकन जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा। किसी नए भुगतान या सेटलमेंट माध्यम की उपयोगिता इस पर निर्भर करेगी कि उपयोगकर्ता, क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, मार्केट मेकर और भुगतान सेवा प्रदाता उसे अपनाते हैं या नहीं। बड़े बैंकों का समर्थन संस्थागत ग्राहकों के लिए भरोसे का संकेत हो सकता है, लेकिन उससे अपने आप तरलता या व्यापक उपयोग पैदा नहीं होता।
यूरो स्टेबलकॉइन के लिए चुनौती और स्पष्ट है। रॉयटर्स ने Qivalis की सदस्यता बढ़ने के बावजूद यूरो-पेग्ड स्टेबलकॉइन की मांग को सीमित बताया। मिसाल के तौर पर, सोसाइटी जेनेराल की क्रिप्टो इकाई SG-FORGE ने 2023 में यूरो-पेग्ड स्टेबलकॉइन लॉन्च किया था। दिसंबर 2025 तक उसके केवल €64 मिलियन के टोकन प्रचलन में थे।
इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर बैंक-समर्थित यूरो स्टेबलकॉइन असफल होगा। लेकिन इतना जरूर दिखता है कि नियामकीय स्थिति और किसी बड़े बैंक का समर्थन, अपने-आप व्यापक उपयोग की गारंटी नहीं देते।
यूरोपीय नीति-निर्माताओं की चिंता यह है कि बड़े पैमाने पर बैंक जमा निजी तौर पर जारी स्टेबलकॉइन में स्थानांतरित हो सकते हैं। लगार्ड ने यूरो-पेग्ड स्टेबलकॉइन की जरूरत पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि ये ECB के संचालन में दखल दे सकते हैं और तनावपूर्ण बाजार स्थितियों में निकासी की होड़ होने पर वित्तीय अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।
ECB ने यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों को यह भी चेताया कि यूरो स्टेबलकॉइन के बढ़ते निर्गम से बैंक ऋण देने की क्षमता घट सकती है और ब्याज दरों को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है। तर्क यह है कि यदि परिवार और कंपनियां बड़ी मात्रा में बैंक जमा को स्टेबलकॉइन में बदल दें, तो बैंकों के पास कर्ज देने के लिए उपलब्ध वित्तपोषण कम हो सकता है। साथ ही, मौद्रिक नीति का असर अर्थव्यवस्था तक पहुंचना कम अनुमानित हो सकता है।
यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है कि कई बड़े वैश्विक वित्तीय संस्थान साझा डॉलर टोकन योजना के लिए एक साथ आए हैं। फिर भी, असली परीक्षा आगे है। प्रमुख सवाल ये रहेंगे:
फिलहाल निष्कर्ष सीधा है: कंसोर्टियम 2027 की पहली छमाही में डॉलर-पेग्ड स्टेबलकॉइन लाने की योजना बना रहा है। इसके बाद अन्य G7 मुद्राओं से जुड़े टोकन उसके रोडमैप में हैं, जिनमें यूरो को प्राथमिकता मिली हुई है। 1
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गोल्डमैन सैक्स, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी और डॉयचे बैंक समेत 21 वित्तीय संस्थान 2026 में एक कंपनी बनाने और 2027 की पहली छमाही में डॉलर पेग्ड स्टेबलकॉइन जारी करने की योजना में हैं। [1]
गोल्डमैन सैक्स, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी और डॉयचे बैंक समेत 21 वित्तीय संस्थान 2026 में एक कंपनी बनाने और 2027 की पहली छमाही में डॉलर पेग्ड स्टेबलकॉइन जारी करने की योजना में हैं। [1] समूह का इरादा अन्य G7 मुद्राओं से जुड़े स्टेबलकॉइन तक विस्तार करने का है; यूरो को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन बाकी मुद्राओं के लिए समय सारिणी या क्रम घोषित नहीं हुआ है। [1][3]
यूरो बाजार में इसे Qivalis से प्रतिस्पर्धा मिल सकती है, जो 37 बैंकों का अलग कंसोर्टियम है और 2026 की दूसरी छमाही में यूरो पेग्ड स्टेबलकॉइन लाने का लक्ष्य रखता है। [27]