चीन की सेना ह्यूमनॉइड रोबोट के लिए खरीद, प्रशिक्षण डेटा और युद्ध परिदृश्य सिमुलेशन बढ़ा रही है, लेकिन रॉयटर्स को किसी सक्रिय पीएलए इकाई में सशस्त्र ह्यूमनॉइड की तैनाती का सबूत नहीं मिला। [1] 2025–26 में पीएलए से जुड़े संस्थानों ने ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म, बुद्धिमान धारणा व वस्तु संचालन प्रणालियां, और भू भाग व गतिविधि स...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How is China accelerating the development of humanoid robots for military combat, what evidence did a Reuters investigation based on more th. Article summary: China is building a military pathway for humanoid robots by linking its dominant commercial robotics base with PLA research, procurement, data collection and operational concepts. The evidence points to early-stage exper. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
चीन ह्यूमनॉइड रोबोटों के संभावित सैन्य उपयोग की बुनियाद तैयार कर रहा है। इसके लिए वह अपने बड़े वाणिज्यिक रोबोटिक्स उद्योग को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के शोध, खरीद, प्रशिक्षण प्रणालियों और संचालन संबंधी प्रयोगों से जोड़ रहा है। लेकिन उपलब्ध साक्ष्य किसी सशस्त्र रोबोट सैनिक-दल की तैनाती नहीं, बल्कि तेज होती तैयारी और परीक्षण का संकेत देते हैं। रॉयटर्स को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि किसी सक्रिय पीएलए इकाई में सशस्त्र ह्यूमनॉइड रोबोट को सेवा में शामिल किया गया हो। 1
रॉयटर्स ने चीन के 100 से अधिक सैन्य खरीद-नोटिस, अकादमिक अध्ययन, पेटेंट, आधिकारिक प्रकाशन, सरकारी रिकॉर्ड और रक्षा कंपनियों की सामग्री की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 और 2026 में सैन्य ह्यूमनॉइड से जुड़ी गतिविधियां तेज हुईं। पीएलए से जुड़े संस्थान रोबोटों को सैन्य जरूरतों के आधार पर परख रहे थे, रोबोट व उन्हें प्रशिक्षित करने वाली तकनीक खरीद रहे थे और सैनिकों के साथ उनकी भूमिका का अध्ययन कर रहे थे। 1
काम उन बुनियादी क्षमताओं पर केंद्रित है जो किसी रोबोट को नियंत्रित माहौल से बाहर उपयोगी बना सकती हैं:
रॉयटर्स ने मई 2025 का एक पीएलए टेंडर पहचाना, जिसमें ह्यूमनॉइड रोबोट, उसकी स्थापना और तकनीकी प्रशिक्षण मांगा गया था। सितंबर 2025 में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (एनयूडीटी) से जुड़े एक नोटिस में ह्यूमनॉइड रोबोट के लिए बुद्धिमान परसेप्शन और कुशल संचालन प्रणाली की मांग थी। जून 2026 में पीएलए के लगभग 3 लाख डॉलर के बजट में सेंसर और गति-संबंधी डेटा जुटाने व लेबल करने की प्रणाली शामिल थी। रॉयटर्स यह तय नहीं कर सका कि पहले के टेंडर पूरे हुए या ठेके किस कंपनी को मिले। 1
वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स अगस्त 2026 में हुए थे, 2025 में नहीं। आयोजन में रोबोटों की बेहतर गतिशीलता और दूसरी क्षमताएं दिखीं, लेकिन कई साफ नजर आने वाली विफलताएं भी सामने आईं। यह अंतर महत्वपूर्ण है: प्रभावशाली डेमो का अर्थ युद्धक्षेत्र में भरोसेमंद प्रदर्शन नहीं होता। 1
दो दिन बाद पीएलए के आधिकारिक समाचारपत्र पीएलए डेली ने अत्याधुनिक तकनीक को प्रयोगशालाओं से निकालकर रोबोटिक “कॉम्बैटेंट्स” के लिए सैन्य प्रशिक्षण मैदानों तक पहुंचाने की अपील की। इससे नागरिक क्षेत्र की ह्यूमनॉइड प्रगति को सैन्य परीक्षण में बदलने के विचार को सार्वजनिक गति मिली। 1
संस्थागत रुचि के संकेत पहले से थे। 2024 में एनयूडीटी और एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंसेज के मंच पर ह्यूमनॉइड प्रणालियों के सैन्य उपयोग पर चर्चा हुई। 2025 में एनयूडीटी की एक प्रतियोगिता में दुश्मन की रेखाओं के पीछे घुसपैठ, मानचित्रण और लक्ष्य-स्थान पता लगाने जैसे मिशनों का सिमुलेशन किया गया। इसमें ठिकानों की सुरक्षा, गश्त और निरीक्षण जैसी भूमिकाओं पर भी विचार हुआ। 1
बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च के आंकड़ों के हवाले से रॉयटर्स ने कहा कि 2025 में वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट शिपमेंट में चीनी निर्माताओं की हिस्सेदारी करीब 95% थी। इससे पीएलए को घरेलू स्तर पर प्लेटफॉर्म, पुर्जे, सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का बड़ा पूल मिल सकता है। 1
इसका मतलब यह नहीं कि वाणिज्यिक रोबोट अपने-आप सैन्य उपयोग के लिए तैयार हैं। फायदा यह है कि बड़ा नागरिक बाजार तेज सुधार, पुर्जों तक पहुंच और अपेक्षाकृत कम लागत पर बड़े पैमाने के उत्पादन में मदद कर सकता है। साथ ही सैन्य शोधकर्ताओं को डेटा और तकनीकी क्षमता का व्यापक आधार मिल सकता है।
फिर भी, कारखाने में काम करने वाले या प्रदर्शनी में दिखाए गए रोबोट को असमान जमीन, खराब मौसम, संचार बाधा, भौतिक नुकसान, सीमित बैटरी और अप्रत्याशित मानवीय व्यवहार झेलना होगा। इसके बाद ही उसे लड़ाकू उपयोग के योग्य माना जा सकता है। 1
सबसे विस्तृत अवधारणा शहरी युद्ध से जुड़ी है। अगस्त 2025 के एक एनयूडीटी शोधपत्र में छह “कॉम्बैट रोबोटों”—ह्यूमनॉइड, रोबोट डॉग और मानवरहित वाहनों के मिश्रण—का मॉडल बनाया गया। इन्हें दो आक्रमण दलों में बांटकर जमीनी सैनिकों के साथ दुश्मन के कब्जे वाली इमारत को कमरा-दर-कमरा और मंजिल-दर-मंजिल साफ करने की कल्पना की गई। शोधपत्र में अनुमान था कि संबद्ध उपकरण पांच से दस वर्षों में उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि उसमें हथियारों, युद्ध में बल प्रयोग के नियमों या नागरिकों से निपटने की व्यवस्था का विवरण नहीं था। 1
पीएलए से जुड़े दस्तावेजों में संभावित भूमिकाएं ये बताई गई हैं:
इनमें से कई कामों के लिए ह्यूमनॉइड आकार अनिवार्य रूप से सबसे व्यावहारिक विकल्प नहीं है। पहियों वाले, ट्रैक वाले या चार पैरों वाले रोबोट नियमित टोही, परिवहन और निगरानी के लिए सरल तथा कम खर्चीले हो सकते हैं। ह्यूमनॉइड वहां उपयोगी हो सकते हैं जहां सीढ़ियां, दरवाजे और इंसानों के लिए बने कमरे पार करने में मानव-जैसा शरीर मदद दे—लेकिन इसे वास्तविक परिस्थितियों में हासिल करना अब भी तकनीकी रूप से कठिन है। 1
चीन की सरकारी रक्षा कंपनी नोरिन्को का कहना है कि उसका पूर्ण आकार का फूशी ह्यूमनॉइड संतरी ड्यूटी, हर मौसम में टोही, बुद्धिमान गश्त और खतरनाक मिशन कर सकता है। कंपनी की सामग्री में एक टेलीऑपरेशन प्रणाली का भी उल्लेख है, जिससे मानव ऑपरेटर दूर से रोबोट को नियंत्रित कर सके। 1
टेलीऑपरेशन अहम है क्योंकि जहां स्वायत्त निर्णय भरोसेमंद या उचित नहीं हो, वहां मानव को नियंत्रण में रखा जा सकता है। हालांकि, ये कंपनी के दावे हैं; युद्ध जैसी परिस्थितियों में इनके स्वतंत्र सत्यापन का प्रमाण नहीं दिया गया है। 1
ह्यूमनॉइड रोबोट बहुत ऊर्जा खर्च करते हैं और नियंत्रित माहौल से बाहर अक्सर भरोसेमंद नहीं रहते। युद्धक्षेत्र में चुनौती और बढ़ जाती है: क्षतिग्रस्त ढांचा, कठिन भू-भाग, मौसम, संचार में बाधा और मानवीय अनिश्चितता के बीच रोबोट को संतुलन बनाए रखना, बदलते परिवेश को समझना और उचित निर्णय लेना होगा। 1
चीनी सैन्य टिप्पणियों में भी गति, परसेप्शन और बुद्धिमत्ता से जुड़ी अनसुलझी समस्याओं का उल्लेख है। इनमें व्यापक उपयोग से पहले तकनीकी सफलता, लागत में कमी और बड़े पैमाने पर उत्पादन की जरूरत बताई गई है। 1
इसलिए उपलब्ध साक्ष्य रोबोट पैदल-सैनिकों की कल्पना से कहीं अधिक संयमित निष्कर्ष देते हैं: चीन सैन्य ह्यूमनॉइड के लिए शोध, खरीद और डेटा का ढांचा बना रहा है, लेकिन उसने बड़े पैमाने पर सक्षम सशस्त्र ह्यूमनॉइड तैनात करने की क्षमता प्रदर्शित नहीं की है।
अमेरिका भी सैन्य ह्यूमनॉइड की संभावनाएं तलाश रहा है। 2025 में अमेरिकी सेना ने “मिलिटराइज़्ड ह्यूमनॉइड कैपेबिलिटीज” के लिए एक प्रतियोगिता शुरू की। संभावित उपयोगों में टोही, सुरक्षा, अवरोध हटाना, खतरनाक सामग्री से जुड़े कार्य और शहरी आक्रामक या रक्षात्मक मिशन शामिल थे। कार्यक्रम में सैन्य विशेषज्ञों के साथ परीक्षण के लिए अधिकतम 10 फाइनलिस्ट चुने जा सकते थे और आगे के अनुबंधों के लिए 12.5 लाख डॉलर तक रखे गए थे। 1
रॉयटर्स के आकलन में दो पैरों और चार पैरों वाले रोबोट प्लेटफॉर्म के मामले में अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग चीन से पीछे है, हालांकि अमेरिकी सैन्य वित्तपोषित नवाचारों ने चीन के कुछ प्रमुख रोबोट-डॉग डिजाइनों को प्रभावित किया है। 1
चीन की बढ़त को औद्योगिक और आपूर्ति-श्रृंखला की ताकत के रूप में देखना चाहिए, न कि बेहतर युद्धक्षेत्र स्वायत्तता के प्रमाण के रूप में। इस प्रतिस्पर्धा का फैसला केवल उत्पादन संख्या से नहीं होगा; मजबूत गतिशीलता, परसेप्शन, संचार, ऊर्जा प्रणाली, मानव-मशीन कमान ढांचा और परिचालन परीक्षण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
सबसे कठिन प्रश्न यह नहीं है कि कोई रोबोट इमारत के भीतर चल सकता है या नहीं। सवाल यह है कि क्या जीवन-मृत्यु से जुड़े निर्णयों में मशीन पर भरोसा किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार लड़ाकों और नागरिकों में फर्क करना तथा घायल या आत्मसमर्पण कर रहे लड़ाकों की सुरक्षा जरूरी है। रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ने चेतावनी दी है कि स्वायत्त प्रणालियों के लिए आत्मसमर्पण पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह संदर्भ, व्यवहार और इरादे पर निर्भर करता है। 1
चीन के रक्षा मंत्रालय ने मार्च में कहा था कि एआई हथियार मानव नियंत्रण में रहने चाहिए। जुलाई 2025 के पीएलए डेली लेख में भी किसी जीवित लक्ष्य पर रोबोट द्वारा गोली चलाने से पहले मानव सत्यापन की चर्चा की गई थी। 1
इन संकेतों से शुरुआती मॉडल का अनुमान लगाया जा सकता है: करीबी मानव निगरानी में निगरानी, परिवहन, गश्त, टोही या उच्च-जोखिम वाले प्रवेश कार्य; न कि खुद लक्ष्य चुनकर हमला करने वाले सशस्त्र रोबोट दस्ते।
ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के मैल्कम डेविस ने ह्यूमनॉइड को फिलहाल युद्धक्षेत्र के लिए अव्यावहारिक बताया, लेकिन उनका आकलन है कि वे पांच से दस वर्षों में व्यवहार्य हो सकते हैं। 1
यह समयसीमा एनयूडीटी के शहरी-हमले वाले परिदृश्य से मेल खाती है, लेकिन इसे तैनाती की निश्चित भविष्यवाणी नहीं, एक लक्ष्य के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। मौजूदा सबसे मजबूत साक्ष्य यही है कि चीन सैन्य ह्यूमनॉइड के प्रयोग के लिए शोध, खरीद और डेटा ढांचे में निवेश कर रहा है। निकट अवधि में सबसे संभावित उपयोग दूरस्थ मानव निगरानी के तहत टोही, गश्त, रसद और खतरनाक जगहों में प्रवेश के हैं—स्वायत्त सशस्त्र रोबोट टुकड़ियों के नहीं। 1
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चीन की सेना ह्यूमनॉइड रोबोट के लिए खरीद, प्रशिक्षण डेटा और युद्ध परिदृश्य सिमुलेशन बढ़ा रही है, लेकिन रॉयटर्स को किसी सक्रिय पीएलए इकाई में सशस्त्र ह्यूमनॉइड की तैनाती का सबूत नहीं मिला। [1]
चीन की सेना ह्यूमनॉइड रोबोट के लिए खरीद, प्रशिक्षण डेटा और युद्ध परिदृश्य सिमुलेशन बढ़ा रही है, लेकिन रॉयटर्स को किसी सक्रिय पीएलए इकाई में सशस्त्र ह्यूमनॉइड की तैनाती का सबूत नहीं मिला। [1] 2025–26 में पीएलए से जुड़े संस्थानों ने ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म, बुद्धिमान धारणा व वस्तु संचालन प्रणालियां, और भू भाग व गतिविधि संबंधी सेंसर डेटा जुटाने पर जोर बढ़ाया। [1]
चीन की वाणिज्यिक रोबोट आपूर्ति श्रृंखला तेज विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन में मदद कर सकती है, लेकिन ऊर्जा, विश्वसनीयता, धारणा और घातक बल पर मानव नियंत्रण बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। [1]