रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल सैन्य ठिकानों की लड़ाई नहीं रह गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की निर्यात-आधारित आर्थिक जीवनरेखाओं पर दबाव बना रहे हैं। रूस यूक्रेन के काला सागर बंदरगाहों और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है; दूसरी ओर यूक्रेन लंबी दूरी के ड्रोन से रूसी रिफाइनरियों, तेल-निर्यात ढांचे और शिपिंग पर वार कर रहा है। इसका सीधा असर बंदरगाह कर्मचारियों व विदेशी नाविकों की सुरक्षा, यूक्रेनी अनाज निर्यात, रूस की घरेलू ईंधन उपलब्धता और वैश्विक डीजल बाजार पर पड़ रहा है।
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काला सागर में व्यापारिक जहाज युद्ध का हिस्सा कैसे बने
रूस के रक्षा मंत्रालय ने अगस्त के अंत में कहा कि उसने पिव्देन्नी/युझ्नी बंदरगाह पर यूक्रेनी सेना के लिए कथित रूप से आपूर्ति ले जा रहे तीन मालवाहक जहाजों और एक टैंकर को निशाना बनाया। मंत्रालय ने पास के ओदेसा में एक अन्य मालवाहक जहाज, तथा पिव्देन्नी और ओदेसा के बंदरगाह ढांचे पर भी हमले का दावा किया। चोर्नोमोर्स्क में ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाने का भी दावा किया गया। ये रूसी दावे हैं; लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों और बाहरी रिपोर्टिंग में जहाजों तथा बंदरगाह अवसंरचना को नुकसान की पुष्टि दर्ज है।
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जुलाई में भी रूस ने ओदेसा और चोर्नोमोर्स्क में बंदरगाह सुविधाओं व जहाजों पर हमले करने की बात कही थी। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का निशाना वे गहरे-पानी वाले बंदरगाह रहे हैं जो युद्धकालीन अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी अनाज और अन्य कार्गो का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।
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यह केवल माल की देरी का मामला नहीं है। ओदेसा क्षेत्र के अभियोजकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि 20 जून से 20 जुलाई के बीच रूस ने 28 नागरिक जहाजों पर हमला किया और 21 लोगों की मौत हुई। इसके बाद सुरक्षा जोखिम के कारण कुछ जहाज-मालिकों ने यूक्रेन के काला सागर बंदरगाहों पर जहाज भेजना रोक दिया।
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यूक्रेन के बंदरगाह प्रशासन के अनुसार, जुलाई में नागरिक जहाजों पर 57 हमले हुए, जिनमें 22 समुद्र में हुए, और बंदरगाह अवसंरचना पर 67 प्रहार हुए। ये यूक्रेनी आधिकारिक आंकड़े हैं, स्वतंत्र रूप से ऑडिट किए गए कुल आंकड़े नहीं।
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नागरिक हताहत और अनाज निर्यात पर दबाव
जुलाई में मक्का ले जा रहे एक व्यापारी जहाज पर मिसाइल हमले में 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश विदेशी नागरिक थे।
22 इससे काला सागर में वाणिज्यिक नौवहन और बंदरगाहों में काम करना प्रत्यक्ष युद्ध जोखिम बन गया है।
ओदेसा–चोर्नोमोर्स्क–पिव्देन्नी बंदरगाह समूह पर लगातार प्रहारों से टर्मिनल क्षतिग्रस्त होते हैं, लोडिंग बाधित होती है और बीमा व मालभाड़ा लागत बढ़ती है। जहाजों के आने से हिचकने पर यूक्रेन की कृषि उपज—विशेषकर अनाज—के समुद्री निर्यात पर असर पड़ता है। सितंबर की शुरुआत तक ओदेसा क्षेत्र की निर्यात अवसंरचना पर हमले जारी रहे।
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यूक्रेन का जवाब: रूसी तेल और रिफाइनरियों पर ड्रोन
यूक्रेन की रणनीति रूस के उस ऊर्जा तंत्र पर केंद्रित है जो घरेलू ईंधन और निर्यात, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ड्रोन हमलों ने कई बार रिफाइनरियों को उत्पादन रोकने या घटाने पर मजबूर किया। जून में मॉस्को क्षेत्र को ईंधन देने वाली गज़प्रोम नेफ्त की बड़ी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लगी और उद्योग सूत्रों ने परिचालन रुकने की बात कही। हमले में संयंत्र की क्षमता के 53% वाले प्राथमिक प्रसंस्करण ढांचे को नुकसान पहुंचने की सूचना थी।
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रूस की तेल-निर्यात क्षमता का 20% से लगभग 40% हिस्सा बंद होने जैसे आंकड़ों को सावधानी से पढ़ना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह अनुमान मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में तेल-निर्यात क्षमता के ऑफलाइन होने से जुड़ा था; इसे सभी रिफाइनरी क्षमता का स्थिर या स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रतिशत नहीं माना जा सकता। फिर भी, यह स्पष्ट है कि रिफाइनरियों पर हमलों से बार-बार गंभीर व्यवधान हुए हैं।
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डीजल निर्यात रोकने की नौबत क्यों आई
घरेलू ईंधन कमी और कीमतों में उछाल के बीच रूस ने 8 जुलाई से डीजल निर्यात पर रोक लगाई। बाद में यह प्रतिबंध 30 सितंबर तक बढ़ाया गया; इसमें रूसी उत्पादकों का समुद्री ईंधन और गैसोइल निर्यात भी शामिल है।
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अगस्त के पहले सात दिनों में रूस का डीजल और गैसोइल निर्यात घटकर 80,000 बैरल प्रतिदिन रह गया, जो कई वर्षों का निचला स्तर था। यह आंकड़ा टैंकर-ट्रैकिंग डेटा पर आधारित है।
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असर रूस से बाहर भी पहुंचा
रूस दुनिया के प्रमुख डीजल निर्यातकों में है, इसलिए उसके निर्यात प्रतिबंध और रिफाइनरी बंद होने का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। रूस और सऊदी अरब में रिफाइनरियों पर हमलों सहित अन्य आपूर्ति बाधाओं ने यूरोप और अमेरिका में डीजल बाजार को और तंग किया।
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रूस के जुलाई निर्यात प्रतिबंध की घोषणा के बाद अमेरिकी डीजल वायदा 11% उछला, जबकि यूरोपीय गैसोइल का ब्रेंट क्रूड पर प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
20 हालांकि ऊंची डीजल कीमतों को केवल यूक्रेनी ड्रोन हमलों का परिणाम कहना सही नहीं होगा: मध्य पूर्व संघर्ष, अन्य रिफाइनरी व्यवधान और व्यापक आपूर्ति जोखिम भी महत्वपूर्ण कारक रहे हैं।
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संक्षेप में, रूस समुद्र के रास्ते यूक्रेन की निर्यात अर्थव्यवस्था को सीमित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि यूक्रेन रूस के उस ऊर्जा और निर्यात तंत्र को निशाना बना रहा है जो उसके युद्ध प्रयासों को ईंधन और आय देता है। इस पारस्परिक अभियान का बोझ अब युद्धक्षेत्र से बाहर भी दिख रहा है—नागरिक हताहतों, खाद्य-शिपिंग जोखिम और महंगे परिष्कृत ईंधन के रूप में।