लेविटेटेड मैग्नेट डार्क मैटर के दो अलग संकेतों की जांच कर रहे हैं: अति हल्के कणों से आने वाला निरंतर दोलन और अति भारी कण से मिलने वाला क्षणिक यांत्रिक झटका। पेकिंग यूनिवर्सिटी और योहानेस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी माइंज के LeMaMa ने कमरे के तापमान पर 32 fT/√Hz संवेदनशीलता हासिल की और 40–3,000 Hz दायरे में एक्सियन जैसे डा...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How are levitated-magnet experiments advancing the search for dark matter, including Peking University and Johannes Gutenberg University Mai. Article summary: Levitated magnets open two complementary dark-matter channels: room-temperature magnetic-field sensing for coherent ultralight axionlike fields, and cryogenic mechanical sensing for rare, impulsive encounters with ultrah. Topic tags: general, academic, education, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, water
डार्क मैटर दिखता नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक उसके सीधे फोटो लेने के बजाय उसके बेहद हल्के प्रभाव खोजते हैं। हवा में—या अधिक सटीक रूप से, बिना किसी ठोस सहारे के—तैरता छोटा चुंबक इस काम के लिए असाधारण संवेदनशील सेंसर बन सकता है। उस पर घर्षण और यांत्रिक संपर्क का शोर बहुत कम होता है; इसलिए बहुत छोटा चुंबकीय टॉर्क या एक हल्का-सा धक्का भी उसकी गति में दर्ज हो सकता है।
अभी किसी प्रयोग ने डार्क मैटर नहीं खोजा है। लेकिन दो नए तरीकों ने उन द्रव्यमान और अंतःक्रिया-शक्ति संयोजनों की जांच शुरू कर दी है, जिन्हें पहले सीधे परखा नहीं गया था। 17
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पेकिंग यूनिवर्सिटी और जर्मनी की योहानेस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी माइंज की टीम का LeMaMa (Levitated Magnet Magnetometer) निर्वात में बिना यांत्रिक संपर्क के टिकाए गए उप-मिलीमीटर फेरोमैग्नेट का उपयोग करता है। इस उपकरण ने मिलीटेस्ला स्तर के पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र में, कमरे के तापमान पर 32 फेम्टोटेस्ला प्रति रूट हर्ट्ज (32 fT/√Hz) की चुंबकीय संवेदनशीलता दिखाई। 18
इसका लक्ष्य ऐसा अति-हल्का एक्सियन-जैसा डार्क मैटर है जो कणों की अलग-अलग टक्करों के बजाय एक बेहद कमजोर, लगातार दोलन करने वाले प्रभावी चुंबकीय क्षेत्र जैसा व्यवहार कर सकता है। डबल-रेजोनेंस व्यवस्था में टीम ने फोटॉन से युग्मित एक्सियन-जैसे डार्क मैटर को 40–3,000 Hz आवृत्ति-दायरे में खोजा और इस क्षेत्र में एक्सियन-फोटॉन युग्मन पर नए प्रत्यक्ष प्रतिबंध स्थापित किए। 17
दूसरे शब्दों में, वैज्ञानिक किसी टक्कर का इंतजार नहीं कर रहे होते। वे उपकरण के शोर के ऊपर एक संकरी, निश्चित आवृत्ति वाली दोलनशील रेखा तलाशते हैं। कमरे के तापमान पर यह क्षमता खास है, क्योंकि इसके लिए क्रायोजेनिक सेंसर संचालन जरूरी नहीं है। 17
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राइस यूनिवर्सिटी का POLONAISE प्रयोग बिल्कुल अलग स्थिति के लिए बनाया गया है। इसमें एक चुंबकीय कण को बहुत कम तापमान पर अतिचालक ट्रैप में तैराया जाता है। वैज्ञानिक ऐसे छोटे, अचानक यांत्रिक झटके खोजते हैं जो किसी गुजरते हुए अति-भारी डार्क-मैटर कण से आ सकते हैं।
इस विश्लेषण ने 4 × 10^5 से 8 × 10^14 GeV/c² तक की द्रव्यमान-सीमा जांची—लगभग नौ ऑर्डर ऑफ मैग्निट्यूड का विस्तार। इसने उन मॉडलों पर सीमाएं तय कीं जिनमें डार्क मैटर न्यूट्रॉन के साथ लंबी दूरी के युकावा-प्रकार के बल के जरिए अंतःक्रिया करता है; यह संवेदनशीलता लगभग 30 meV/c² तक के मध्यस्थ कण-द्रव्यमान के लिए लागू थी। 1
अभियान में डार्क मैटर का कोई विश्वसनीय संकेत नहीं मिला। फिर भी यह नतीजा उपयोगी है, क्योंकि जिन स्थितियों में कण के गुजरने पर उपकरण में मापने योग्य झटका अपेक्षित था, उनमें से कुछ द्रव्यमान-अंतःक्रिया संयोजन अब खारिज हो गए हैं। 1
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LeMaMa जहां एक सतत दोलन खोजता है, वहीं POLONAISE का काम बहुत विरल और क्षणिक घटनाओं के लिए है। यदि डार्क मैटर अत्यंत भारी है, तो उसका प्रवाह बहुत कम हो सकता है। तब असली संकेत को कंपन, विद्युतचुंबकीय हस्तक्षेप और अन्य स्थानीय व्यवधानों से अलग करना बड़ी चुनौती बन जाता है।
मुख्य लाभ है कम ऊर्जा-हानि और कम घर्षण। किसी ठोस सहारे के संपर्क से घर्षण और शोर पैदा होता है। लेविटेशन उस संपर्क को हटाता है, इसलिए चुंबक की घूर्णन या रैखिक गति बेहद कमजोर बलों और टॉर्क के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकती है। लेविटेटेड माइक्रोमैग्नेट को अति-कम-शोर मैग्नेटोमेट्री, बल-मापन, एक्सेलेरोमेट्री, ग्रैविमेट्री और मूलभूत भौतिकी के प्रयोगों के लिए प्रस्तावित किया गया है।
डार्क मैटर के संदर्भ में यही विशेषता दो रास्ते बनाती है:
ये तरीके मौजूदा डार्क-मैटर डिटेक्टरों की जगह नहीं लेते। उनका काम उन संकेतों और द्रव्यमान-क्षेत्रों तक खोज को फैलाना है, जिनके लिए पारंपरिक कण-रिकॉइल डिटेक्टर उतने उपयुक्त नहीं हैं। 7
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अति-भारी डार्क मैटर की खोज में शोर घटाना और कई डिटेक्टरों को साथ काम कराना महत्वपूर्ण होगा। कम तापमान से तापीय गति कम की जा सकती है। अलग-अलग जगह रखे लेविटेटेड सेंसरों का एक नेटवर्क किसी वास्तविक गुजरते कण को समय-संबंधित संकेतों या दिशा-सूचना के जरिए पहचानने में मदद कर सकता है, जबकि स्थानीय कंपन को खारिज कर सकता है।
रास्ता आसान नहीं है। एक सैद्धांतिक आकलन के अनुसार, केवल गुरुत्वाकर्षण के जरिए प्लैंक-द्रव्यमान स्तर के डार्क मैटर को पहचानने के लिए शोर में अत्यंत बड़ी कमी और बहुत विशाल सेंसर-ऐरे चाहिए होगा। हालांकि उसी आकलन ने यह भी कहा कि कई दूसरे, अब तक न जांचे गए उम्मीदवार मौजूदा या निकट-भविष्य की यांत्रिक प्रणालियों की पहुंच में हो सकते हैं। 4
न्यूरॉन्स में बहने वाली विद्युत धाराएं बहुत कमजोर चुंबकीय क्षेत्र बनाती हैं। इन्हें मैग्नेटोएन्सेफैलोग्राफी (MEG) में मापा जाता है, जहां SQUID और ऑप्टिकली पंप्ड मैग्नेटोमीटर महत्वपूर्ण तकनीकें हैं।
LeMaMa की कमरे के तापमान वाली फेम्टोटेस्ला संवेदनशीलता इसे भविष्य में तंत्रिका-चुंबकीय संकेतों के मापन का संभावित विकल्प बनाती है; पेकिंग यूनिवर्सिटी की टीम ने भी इस उपयोग का उल्लेख किया है। हालांकि प्रयोगशाला-सेंसर को व्यावहारिक ब्रेन-इमेजिंग प्रणाली में बदलने के लिए भरोसेमंद वैक्यूम पैकेजिंग, चुंबकीय शील्डिंग, कंपन से अलगाव, कैलिब्रेशन और अनेक सेंसरों के समन्वित संचालन की जरूरत होगी।
LeMaMa में छोटा सेंसर-मैग्नेट और ऊंची संवेदनशीलता दोनों हैं। इसके डेवलपर्स उच्च स्थानिक-रिजॉल्यूशन चुंबकीय इमेजिंग, निकट-दूरी डिटेक्शन और भूभौतिकीय सर्वेक्षण को संभावित उपयोग मानते हैं। संवेदनशील चुंबकीय मापन से जमीन के नीचे दबे धातु के पाइप, केबल, ड्रम या बिना फटा आयुध जैसी वस्तुओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
लेकिन फील्ड में इस्तेमाल करना प्रयोगशाला से अधिक कठिन होगा। आसपास के बदलते चुंबकीय क्षेत्र और कंपन ऐसे इंजीनियरिंग अवरोध हैं जिन्हें बेहद कमजोर स्थानीय संकेत पढ़ने वाले सेंसर के लिए नियंत्रित करना जरूरी होगा।
लेविटेटेड मैग्नेट अब केवल एक विशेष प्रकार के डार्क-मैटर डिटेक्टर नहीं रह गए हैं; वे एक लचीले प्रिसीजन-सेंसिंग प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहे हैं। LeMaMa दिखाता है कि कमरे के तापमान पर तैरता चुंबक एक्सियन-जैसे डार्क मैटर के लिए व्यापक आवृत्ति-दायरे वाला अति-संवेदनशील मैग्नेटोमीटर बन सकता है। POLONAISE दिखाता है कि क्रायोजेनिक लेविटेटेड मैग्नेट अति-भारी कणों से जुड़े दुर्लभ-घटना मॉडलों को जांच सकता है। 17
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किसी भी प्रयोग ने अभी डार्क मैटर का पता नहीं लगाया है। उनकी उपलब्धि यह है कि उन्होंने डार्क मैटर की संभावित दुनिया का बड़ा हिस्सा प्रयोगों की पहुंच में ला दिया है—और ऐसे सेंसर विकसित किए हैं जिनका उपयोग आगे चलकर मूलभूत भौतिकी से लेकर मस्तिष्क इमेजिंग और चुंबकीय सर्वेक्षण तक हो सकता है। 2
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लेविटेटेड मैग्नेट डार्क मैटर के दो अलग संकेतों की जांच कर रहे हैं: अति हल्के कणों से आने वाला निरंतर दोलन और अति भारी कण से मिलने वाला क्षणिक यांत्रिक झटका।
लेविटेटेड मैग्नेट डार्क मैटर के दो अलग संकेतों की जांच कर रहे हैं: अति हल्के कणों से आने वाला निरंतर दोलन और अति भारी कण से मिलने वाला क्षणिक यांत्रिक झटका। पेकिंग यूनिवर्सिटी और योहानेस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी माइंज के LeMaMa ने कमरे के तापमान पर 32 fT/√Hz संवेदनशीलता हासिल की और 40–3,000 Hz दायरे में एक्सियन जैसे डार्क मैटर के नए प्रत्यक्ष प्रतिबंध बताए। [17][18]
राइस यूनिवर्सिटी के POLONAISE को डार्क मैटर का संकेत नहीं मिला, लेकिन उसने 4 × 10^5 से 8 × 10^14 GeV/c² द्रव्यमान सीमा में कुछ अति भारी डार्क मैटर मॉडलों को बाहर किया। [1][2]