अमेरिका के प्रस्तावित सेमीकंडक्टर टैरिफ के जवाब में दक्षिण कोरिया और जापान वॉशिंगटन से अपने देश-स्तरीय समझौतों का सम्मान करने की मांग कर रहे हैं। ताइवान, दूसरी ओर, अपने अमेरिका के साथ व्यापार एवं निवेश समझौते और TSMC के बड़े अमेरिकी विस्तार को प्रमुख आधार बना रहा है। लेकिन वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के संकेतों से यह आशंका बनी है कि राहत देश के समझौते के आधार पर नहीं, बल्कि हर कंपनी की अमेरिका में निर्माण क्षमता और निवेश-प्रतिबद्धता के आधार पर तय हो सकती है। ऐसा हुआ तो राष्ट्रीय स्तर पर तय सुरक्षा-प्रावधान कंपनी-दर-कंपनी मंजूरी में बदल सकते हैं।
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प्रस्तावित अमेरिकी नीति में क्या है?
ट्रंप प्रशासन लक्षित सेमीकंडक्टर शुल्क तैयार कर रहा है। इसका दायरा केवल अलग से आयात होने वाले चिप्स तक सीमित नहीं रह सकता; सर्वर, लैपटॉप और गेम कंसोल जैसे चिप-युक्त उत्पाद भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
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चर्चा में एक ऐसा मॉडल है जिसमें अमेरिका में फैब—यानी चिप निर्माण संयंत्र—बनाने वाली कंपनियों को शुल्क से राहत मिले। एक अन्य संभावना यह है कि कंपनी की अमेरिकी उत्पादन प्रतिबद्धता के अनुपात में शुल्क-मुक्त आयात कोटा तय किया जाए। जिन कंपनियों का अमेरिका में उत्पादन नहीं है, उन पर टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि शुल्क दर, शामिल उत्पाद, कोटा का फॉर्मूला, समय-सीमा और कानूनी ढांचा अभी घोषित नहीं हुए हैं।
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दक्षिण कोरिया: राष्ट्रीय समानता की गारंटी पर जोर
सियोल संभावित अतिरिक्त चिप निवेश पर बातचीत कर रहा है और साथ ही उस द्विपक्षीय आश्वासन का हवाला दे रहा है जिसके तहत कोरियाई सेमीकंडक्टर को प्रतिस्पर्धी देशों के उत्पादों से “कम अनुकूल नहीं” व्यवहार मिलना चाहिए। चिंता यह है कि यदि कसौटी कोरिया का समझौता नहीं बल्कि हर कंपनी की अमेरिकी क्षमता बन गई, तो सैमसंग और SK hynix को TSMC की तुलना में कम अनुकूल स्थिति मिल सकती है।
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- सैमसंग ने सेंट्रल टेक्सास में अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए 37 अरब डॉलर से अधिक के नियोजित निवेश की घोषणा की है। इसके लिए CHIPS कार्यक्रम के तहत अधिकतम 4.745 अरब डॉलर के संभावित प्रोत्साहन का भी उल्लेख है।
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- SK hynix के पास अमेरिका में एडवांस्ड पैकेजिंग और एआई उत्पादों से जुड़ी निवेश योजना है। फिर भी, मौजूदा टैरिफ दबाव के दौरान किसी भी कोरियाई कंपनी ने TSMC के विस्तारित फैब निर्माण के बराबर नई अमेरिकी फैब प्रतिबद्धता घोषित नहीं की थी।
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- दक्षिण कोरिया के व्यापक व्यापार पैकेज में अमेरिका में 350 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता शामिल थी। पर यह किसी कंपनी के लिए तय, मात्रात्मक चिप-फैब सीमा के समान नहीं है।
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जापान: 550 अरब डॉलर के निवेश ढांचे का सहारा
जापान जुलाई 2025 के अपने रणनीतिक व्यापार एवं निवेश ढांचे की ओर इशारा कर रहा है, जिसके तहत उसने अमेरिकी रणनीतिक क्षेत्रों में अधिकतम 550 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। टोक्यो चाहता है कि सेमीकंडक्टर संबंधी उपाय उस समझौते में सहमत टैरिफ व्यवस्था को बनाए रखें, न कि कंपनियों पर अलग और असीमित चिप शुल्क लगा दें।
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इस ढांचे के अंतर्गत अधिकांश जापानी आयात पर सामान्य अमेरिकी टैरिफ 15% किया गया था। अब बड़ा अनसुलझा प्रश्न यह है कि भविष्य के सेक्शन 232 सेमीकंडक्टर उपायों पर यह व्यवस्था कैसे लागू होगी। सेक्शन 232 अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर व्यापार प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया है।
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ताइवान और TSMC: अमेरिकी क्षमता बढ़ाना सबसे मजबूत तर्क
ताइवान के अमेरिका के साथ हुए सेमीकंडक्टर-केंद्रित व्यापार समझौते में टैरिफ रियायतों के साथ अमेरिकी तकनीकी उत्पादन में निवेश की प्रतिबद्धताएं जुड़ी हैं। प्रस्तावित अमेरिकी कसौटी पर TSMC सबसे स्पष्ट उदाहरण बनकर उभरती है। कंपनी ने एरिज़ोना में नई फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग और अनुसंधान एवं विकास क्षमता समेत अमेरिका में कुल 165 अरब डॉलर तक निवेश का वादा किया है।
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कंपनी-विशिष्ट छूट क्यों बदल सकती है खेल के नियम?
कोरिया जैसी देश-स्तरीय “कम अनुकूल नहीं” गारंटी औपचारिक रूप से बरकरार रह सकती है, फिर भी नतीजे सैमसंग, SK hynix, TSMC और जापानी आपूर्तिकर्ताओं के लिए अलग-अलग हो सकते हैं। कारण यह कि हर कंपनी को उसकी अमेरिकी निर्माण समय-सारिणी, उत्पादन क्षमता, उत्पाद मिश्रण या निवेश के आकार के आधार पर अलग छूट अथवा कोटा मिल सकता है।
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इससे बातचीत का केंद्र संधि या देश-स्तरीय समझौते से हटकर प्रशासन की कंपनी-विशिष्ट मंजूरी बन जाएगा। साथ ही उन सौदों पर फिर से सवाल उठ सकते हैं जिनमें देशों ने स्थिर और अनुमानित टैरिफ व्यवस्था के बदले व्यापक निवेश, बाजार पहुंच या सरकारी खरीद जैसी रियायतें दी थीं।
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फिलहाल क्षेत्र की प्रतिक्रिया सीधा विरोध नहीं है। सियोल अतिरिक्त निवेश पर चर्चा कर रहा है, टोक्यो अपने 550 अरब डॉलर वाले ढांचे पर भरोसा जता रहा है और ताइपे/TSMC अमेरिकी उत्पादन विस्तार को अनुपालन के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं। लेकिन टैरिफ दर क्या होगी, कौन-से उत्पाद पात्र होंगे, एम्बेडेड चिप्स वाले सामान शामिल होंगे या नहीं, निवेश का श्रेय कैसे गिना जाएगा और द्विपक्षीय समझौता वास्तविक छूट देगा या केवल तुलनात्मक समानता—इनमें से किसी पर अभी स्पष्टता नहीं है।
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