प्रयोग ने मुक्त पतन करते परमाणु की पदार्थ तरंग में जमा होने वाला गुरुत्वाकर्षण जनित सापेक्ष फेज़ सीधे मापा। [10] परिणाम आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत और निम्न ऊर्जा क्वांटम यांत्रिकी के संयुक्त पूर्वानुमान से मेल खाता है। [10] यह क्वांटम अवस्था में गुरुत्वाकर्षण की सार्वभौमिकता का महत्वपूर्ण परीक्षण है, पर गुरुत्वाकर...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did an international team led by researchers at Ben Gurion University of the Negev, the University of Ulm, and the University of Oxford. Article summary: The Quantum Galileo Interferometer directly measured the gravity induced phase accumulated by a freely falling atomic matter wave, and found the phase predicted when quantum mechanics is treated consistently with Einstei. Topic tags: general web, ai, code, crypto, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर (QGI) ने मुक्त रूप से गिरती एक परमाणवीय पदार्थ-तरंग में गुरुत्वाकर्षण के कारण जमा होने वाला क्वांटम फेज़ सीधे मापा। मापा गया फेज़ उस पूर्वानुमान से मेल खाता है जो क्वांटम यांत्रिकी को आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत के साथ संगत रूप में लागू करने पर मिलता है। यह क्वांटम स्तर पर गुरुत्वाकर्षण की सार्वभौमिकता की अहम जांच है—लेकिन इससे न तो गुरुत्वाकर्षण के क्वांटम होने की पुष्टि होती है, न ही सामान्य सापेक्षता और क्वांटम यांत्रिकी का एकीकरण। 10
शोधकर्ताओं ने रुबिडियम परमाणुओं को अत्यंत निम्न तापमान तक ठंडा किया और हर परमाणु के तरंग-फलन को सुसंगत ढंग से दो अलग-अलग स्थानिक तरंग-पैकेटों में बांटा।
बाद में दोनों पैकेटों को फिर मिलाया गया। उनके हस्तक्षेप पैटर्न से उनके बीच का सापेक्ष फेज़ पढ़ा गया। चूंकि दोनों शाखाओं की गति और गुरुत्वाकर्षणीय यात्रा अलग थी, यह तुलना उस फेज़ को अलग से देखने देती है जो मुक्त-पतन कर रही क्वांटम तरंग को मिलना चाहिए। 10
सरल शब्दों में, वैज्ञानिकों ने एक ही परमाणु को दो संभावित क्वांटम राहों में रखा: एक राह को सहारा मिला हुआ था, जबकि दूसरी गिर रही थी। दोनों को मिलाने पर उनके बीच का बहुत सूक्ष्म अंतर मापा गया।
नतीजा इस बात का समर्थन करता है कि एक परमाणु, जो दो स्थानों से जुड़ी सुसंगत क्वांटम सुपरपोज़िशन में है, फिर भी गुरुत्वाकर्षण में वही मुक्त-पतन फेज़ दिखाता है जिसकी अपेक्षा तुल्यता सिद्धांत से की जाती है। 10
तुल्यता सिद्धांत का मूल विचार यह है कि स्थानीय स्तर पर मुक्त-पतन कर रही वस्तु को ऐसा अनुभव होता है जैसे गुरुत्वाकर्षण को हटाया गया हो। फिर भी, जब उस वस्तु की तरंग को एक ऐसी संदर्भ शाखा से मिलाया जाता है जो पृथ्वी के सापेक्ष सहारा पाकर स्थिर रही, तो अनुमानित गुरुत्वाकर्षणीय फेज़ अंतर दिखाई देता है। यही इस प्रयोग का केंद्रीय अवलोकन है। 10
इस प्रयोग में परमाणु को क्वांटम वस्तु की तरह लिया गया, लेकिन गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पहले से दिया हुआ शास्त्रीय पृष्ठभूमि-क्षेत्र माना गया। निम्न ऊर्जा पर यह मानक और अत्यंत सफल सैद्धांतिक ढांचा है। इसलिए यह परिणाम सामान्य सापेक्षता और क्वांटम यांत्रिकी को एक ही पूर्ण सिद्धांत में नहीं जोड़ता। 10
यह भी नहीं दिखाता कि गुरुत्वाकर्षण स्वयं क्वांटम सूचना वहन करता है या वह अनिवार्य रूप से क्वांटम क्षेत्र है। उस प्रश्न के अधिक निर्णायक परीक्षण के लिए, उदाहरण के तौर पर, दो स्वतंत्र रूप से नियंत्रित द्रव्यमानों के बीच केवल गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न उलझाव (एंटैंगलमेंट) देखना होगा—और गैर-गुरुत्वाकर्षणीय कपलिंग तथा वैकल्पिक मॉडलों को भरोसेमंद ढंग से बाहर करना होगा। अब तक किसी प्रयोग ने गुरुत्वाकर्षण की क्वांटम प्रकृति का निर्णायक प्रमाण नहीं दिया है। 4
रोजर पेनरोज़ के वस्तुनिष्ठ-अपचयन प्रस्ताव के अनुसार, किसी वस्तु की स्थानिक सुपरपोज़िशन अपने-आप सुसंगति खो सकती है, यदि प्रतिस्पर्धी द्रव्यमान-वितरणों से जुड़ी गुरुत्वाकर्षणीय स्व-ऊर्जा पर्याप्त बड़ी हो। इस मॉडल में अधिक भारी और अधिक दूर तक अलग हुई सुपरपोज़िशनों के लिए कोलैप्स का समय कम होने की अपेक्षा है। 5
QGI प्रयोग में एकल परमाणुओं का इस्तेमाल हुआ और सुसंगत फेज़ मापा गया। यह उन विशाल, दीर्घजीवी और व्यापक स्थानिक सुपरपोज़िशनों से बहुत दूर का क्षेत्र है, जहां ऐसे कोलैप्स मॉडल को परखना संभव हो सकता है। 5
महत्वपूर्ण बात यह है कि अपेक्षित फेज़ का मिल जाना, हस्तक्षेप की दृश्यता में किसी असामान्य कमी को मापने या उस पर कड़ी सीमा लगाने के बराबर नहीं है। ऐसी जांच में टकराव, विकिरण, चुंबकीय शोर और उपकरणीय त्रुटियों जैसे साधारण पर्यावरणीय डीकोहेरेंस को भी अलग करना होगा।
शोधकर्ता QGI को परमाणुओं से आगे बढ़ाकर नैनोडायमंड के लिए स्टर्न-गेरलाख प्रकार की इंटरफेरोमेट्री की दिशा में एक कदम मानते हैं। नैनोडायमंड काफी अधिक भारी हो सकते हैं। उनमें मौजूद नाइट्रोजन-वैकेंसी (NV) स्पिन का इस्तेमाल उनकी स्थानिक सुपरपोज़िशन बनाने, नियंत्रित करने और पढ़ने के लिए किया जा सकता है। 10
प्रस्तावित चिप-आधारित चुंबकीय-उत्तोलन और सुपरपोज़िशन कार्यक्रम लगभग (10^{-19}) से (10^{-15}) किलोग्राम द्रव्यमान वाले कणों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं। इससे उन द्रव्यमानों की सीमा बहुत बढ़ सकती है जिनमें क्वांटम सुसंगति को परखा जा सके। 12
यदि बड़ी, अच्छी तरह पृथक नैनोडायमंड सुपरपोज़िशन किसी तय कोलैप्स मॉडल की अनुमति से अधिक समय तक बनी रहती है, तो वह मॉडल सीमित होगा। अगर सुसंगति गायब होती है, तो उसे गुरुत्वाकर्षण से जोड़ने से पहले सामान्य डीकोहेरेंस के सभी संभावित कारणों को हटाना जरूरी होगा। 5
चीन के अंतरिक्ष स्टेशन तियानगोंग पर किया गया प्रयोग QGI का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक है। उसमें कक्षा में (^{85})Rb और (^{87})Rb के दो समस्थानिकों वाला परमाणु इंटरफेरोमीटर इस्तेमाल कर उनकी मुक्त-पतन त्वरणों की तुलना की गई। यह कमजोर तुल्यता सिद्धांत—अर्थात मुक्त-पतन की सार्वभौमिकता—की कक्षीय क्वांटम जांच है। 12
दोनों प्रयोग क्वांटम-परमाणु प्रणालियों में तुल्यता सिद्धांत के अनुरूप परिणामों का समर्थन करते हैं, पर इनमें से कोई भी अपने आप में गुरुत्वाकर्षण के क्वांटीकरण का पता नहीं लगाता। 10
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प्रयोगशाला में “क्वांटम-ग्रैविटी संकेत” के दावों को बहुत सावधानी से पढ़ना चाहिए। गुरुत्वाकर्षण-मध्यस्थित एंटैंगलमेंट जैसे प्रस्तावित संकेतों पर भी सैद्धांतिक बहस जारी है; कुछ हालिया कामों में तर्क दिया गया है कि कुछ शास्त्रीय-गुरुत्वाकर्षण ढांचे अलग मान्यताओं के तहत एंटैंगलमेंट-जैसे प्रभाव दे सकते हैं। 9
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इसलिए QGI परिणाम की सबसे सटीक व्याख्या सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है: यह गुरुत्वाकर्षण से अनुमानित एक क्वांटम फेज़ का स्वच्छ प्रत्यक्ष अवलोकन है, क्वांटम ग्रैविटी की खोज नहीं।
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प्रयोग ने मुक्त पतन करते परमाणु की पदार्थ तरंग में जमा होने वाला गुरुत्वाकर्षण जनित सापेक्ष फेज़ सीधे मापा। [10]
प्रयोग ने मुक्त पतन करते परमाणु की पदार्थ तरंग में जमा होने वाला गुरुत्वाकर्षण जनित सापेक्ष फेज़ सीधे मापा। [10] परिणाम आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत और निम्न ऊर्जा क्वांटम यांत्रिकी के संयुक्त पूर्वानुमान से मेल खाता है। [10]
यह क्वांटम अवस्था में गुरुत्वाकर्षण की सार्वभौमिकता का महत्वपूर्ण परीक्षण है, पर गुरुत्वाकर्षण के क्वांटम होने का प्रमाण नहीं। [10][4]